शिक्षकों के अभाव, स्कूलों के विलयन एवं गिरते शिक्षा स्तर के कारण सरकारी स्कूल लगातार बंदी के शिकार हो रहे हैं। नीति आयोग के अनुसार पिछले 10 वर्षों में देशभर में 94000 स्कूल बंद हुए हैं यानी 2014 - 2015 में जहां 10.98 लाख सरकारी स्कूल थे वहीं अब 2023 - 2024 में इनकी संख्या घटकर लगभग 10.4 लाख रह गई है। सरकारी स्कूलों की संख्या में यह भारी गिरावट न केवल स्कूली शिक्षा के सामने बड़ी चुनौती है अपितु सरकार की गलत शिक्षा नीति की जवाबदेही भी।
आज प्रातः झांसी के कचहरी रोड स्थित "अंबेडकर चौक" पर भारत रत्न, संविधान निर्माता परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया..!
एक्सप्रेसवे इसलिए बनते हैं कि लोग तेज़ी से बेफ़िक्र होकर चलें, इसलिए नहीं कि लोग रस्ते भर ऊपरवाले का नाम जपें।
भाजपा सरकार में इधर 4700 करोड़ से बना लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले धँसा, उधर भाजपा की ही सरकार में महाराष्ट्र में 6700 करोड़ में बना ‘मिसिंग लिंक’ का हाल-बेहाल हुआ जिससे वो भाजपा सरकार और भ्रष्टाचारियों के ‘कनेक्टिंग लिंक’ के रूप में पूरे विश्व में बदनाम हो गया। भाजपा शासित राज्यों में ‘महा-भ्रष्टाचार की प्रतियोगिता’ चल रही है क्या? ये दोनों लखनऊवालों ने डिज़ाइन किए हैं क्या?
जितना समय दो शहरों के बीच लगेगा उससे ज़्यादा तो एक्सप्रेसवे से शहर में प्रवेश करने में लगेगा। जनता पूछ रही है कि ये जनता की सुविधा के लिए डिज़ाइन किया गया है या भाजपाई ठेकेदारों को मुनाफ़ा कमवाने के लिए?
अगर भ्रष्टाचार की वजह से यही हाल रहा तो 40 मिनट के सफ़र पर निकलने से पहले यात्री 40 बार सोचेगा। गति यदि सुरक्षित नहीं है तो उसका कोई अर्थ नहीं है।
चिता पर लेटे लोग, पानी में खड़े लोग, मिट्टी में धंसे लोग |ये किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित उन आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की हकीकत है, जो अपने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जब लोग जल सत्याग्रह करने को मजबूर हों, सांकेतिक फांसी लगाकर अपनी पीड़ा दिखा रहे हों, चूल्हा बंद भूख हड़ताल पर बैठे हों, तब सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं रह जाता, सवाल लोकतंत्र का हो जाता है। ग्रामीण पूछ रहे हैं अगर ग्रामसभा की सहमति ली गई थी, तो दस्तावेज़ सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते? अगर पुनर्वास न्यायपूर्ण है, तो लोग चिता पर लेटने को क्यों मजबूर हैं?
विकास के नाम पर अगर जंगल डूबेंगे, गांव उजड़ेंगे और आदिवासियों को अपनी ही धरती पर बेगाना बना दिया जाएगा, तो इतिहास इसे विकास नहीं, विस्थापन की त्रासदी के रूप में याद रखेगा।सरकार को तय करना होगा कि वह बांध बना रही है या लोगों के भरोसे को डुबो रही है। आज केन-बेतवा के किनारे सिर्फ एक आंदोलन नहीं चल रहा, बल्कि यह सवाल खड़ा हो रहा है कि इस देश में विकास का मॉडल जनता की सहमति से चलेगा या जनता की कीमत पर?
"न्याय दो या मार दो" का नारा किसी आंदोलन की रणनीति नहीं, व्यवस्था की विफलता का आईना है।
#KenBetwaLinkProject #JalSatyagraha #ChitaAndolan #AdivasiAdhikar #JalJungleZameen
यह देखिए उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित "लक्ष्मी ताल" की हकीकत।
स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किया गया यह लक्ष्मी ताल आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है।
कागज़ों में हर साल सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन ज़मीनी सच्चाई आपके सामने है।
आखिर यह पैसा कहाँ जा रहा है..?
यह केवल एक तालाब की दुर्दशा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार, लापरवाही और जनता के पैसे की खुली बर्बादी का प्रमाण है।
2008 में फोटो स्टूडियो वाले ब्राह्मण हिमांशु कुमार पाठक उर्फ मिथिया पाठक ने एक महिला को स्टूडियो में बंद करके छाती दबाई और सलवार उतारने की कोशिश की।
ट्रायल कोर्ट ने उसे attempt to rape का दोषी माना था,
लेकिन 9 जुलाई 2026 को जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने फैसला सुना दिया “ये attempt to rape नहीं है” और आरोपी को बरी कर दिया।
निर्माण घटिया होगा तभी तो दुर्घटनाएँ होंगीं! सूखा मसाला भरकर पिलर ढाला जा रहा है.
क्या रेलवे के इंजीनियर और ठेकेदार अपने घरों का पिलर भी इसी तरह ढलवाते हैं?
Modi's Hindu nationalist government has systematically dismantled most of India's higher education system.
It's a damning legacy that disadvantages Indian citizens, possibly for generations. The most recent anti-intellectual move --
https://t.co/0Yo7Yb1kbd #Hindutva#highered
थुकला बुद्ध में अपने पिताजी खोज रहा है?🤣🤣
खास बात यह है कि बुद्ध से पहले 27 बुद्ध थे ये बात थुकला के किसी अब्बू को नहीं पता था। इसलिए थुकला के सभी अब्बुओं ने भरभर के बुद्ध को गाली दी अब चुकी वैदिक काल पूरी तरह से डिबंक हो चुका है तो बुद्ध में ही अब्बू खोजने लगा।
मुझे कमेंट में ब्लॉक कर रखा है।
मुग़ल बादशाह भारत को लूटने नही शासन करने आए थे.
भारत का एक रुपया भी बुखार या समरकंद नही गया.
Babur की मृत्यु आगरा में हुई. बाद में अवशेषों को काबुल में दफन किया गया. मुग़ल साम्राज्य में अफगानिस्तान भारत का अभिन्न अंग था.
Humayun की मृत्यु दिल्ली में हुई.
Akbar की मौत आगरा में हुई.
Jahangir कश्मीर के राजौरी में मरे, दफन लाहौर में किया गया.
Shahjahan की मौत आगरा किले में हुई. ताजमहल के तहखाने में दफन किया गया.
Aurangzeb की मौत महाराष्ट्र के अहमदनगर में हुई, आज नाम अहिल्याबाई नगर है.
अनुपम खेर बताना चाहिए मुग़लों ने जो खजाना लुटा वो कहां लेकर गए. अगर अनुपम खेर का जन्म मुग़ल काल में हुआ तो अनुपम खेर अकबर के दरबार में मंत्री होते, बादशाह जिंदाबाद के नारे लगा रहे होते.
भारत में राम बोधिसत्व के रूप में प्रचलित थे और फिर सभी बुद्धिस्ट देशों में भी जातको के रूप में पहुचें। तब तक राम भक्ति आस्था के लिए नहीं बल्की बोधिसत्व और उनकी शिक्षाओ के लिए प्रासंगिक थे ।
लेकिन राम की भक्ति और उसमे आस्था रखने की वकालत हिंदुओं के किस संप्रदाय ने और कब शुरू की?
2019 में राम मंदिर का जो फैसला आया था, उसके विरोध में मायावती जी और अखिलेश यादव जी को आवाज उठनी चाहिए थी। डॉ. विलास खरात का कहना है कि अयोध्या हमारी विरासत है और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एक बहुत बड़ी साजिश रची गई !
@Mayawati@yadavakhilesh@SwamiPMaurya@narendramodi
मैं अंडमान और निकोबार के विनाश के खिलाफ़ पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूँ।
अंडमान और निकोबार भारत की सबसे अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं।
वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी रक्षा करना मेरा कर्तव्य है।
#GreenOverGreed