उत्तम कार्य : मथुरा में एक मिल्क टैंकर मिलावट से भरा 2000 लीटर दूध लेकर बिक्री करने जा रहा था. FSDA की टीम ने इस टैंकर को बीच रास्ते में रोका और दूध की जांच की. जांच में दूध पूरी तरह मिलावटी निकला. FSDA टीम ने टैंकर चालक को हिरासत में लिया तथा मिलावटी दूध को नाली में बहवाया.
दूध की कीमत 120000 रुपये बतायी जा रही है. FSDA ने बहुत ही सराहनीय कार्य किया तथा तथा हजारों लोगों के जीवन में छोटा सा महत्वपूर्ण योगदान दिया है. विभाग इसी तरह आये दिन खाने पीने के सामानों की जिम्मेदारी पूर्वक जांच सुनिश्चित करे तो लोगों के जीवन से कई बीमारियां खुद ब खुद गायब हो जायेंगी.
हमारे पूर्व सांसद डा.महेंद्रनाथ जी पांडेय को भी बुलेटप्रूफ जैकेट मिला है.
अब बताओ भला, हमारे निहायत शरीफ पूर्व सांसद जी से किसे जान का खतरा है, जो उन्हें बुलेटप्रूफ जैकेट दिया गया है?
इसमें कई लोगों को तो यमराज से ही खतरा है.
एथेनॉल की मांग एवं चीनी का दाम बढ़ने से गन्ना किसानों की आर्थिक हालत सुधर जायेगी!
पहले उन्हें 400 रुपया प्रति कुंतल दाम मिलता था, अब प्रति कुंतल 400 रुपया दाम मिलेगा!
बधाई गन्ना किसानों को!!
इटावा का मामला है. इंस्पेक्टर साहब, उनकी टीम और मुकेश यादव जी का अभिनय तो शानदार है. सराहनीय है कि यूपी पुलिस अभिनय में लगातार सुधार करती जा रही है.
इस अभिनय में मुझे सबसे अच्छा सीन इंस्पेक्टर साहब का खटाखट नोट गिनना लगा. जिस रफ्तार से वो नोट गिन रहे थे, उसमें उनकी प्रेक्टिस साफ नजर आ रही थी.
अब मैं पूरे भरोसे, इत्मीनान और ब्रह्म बाबा का किरिया खाकर कह सकता हूँ कि नोट गिनने में यूपी पुलिस दूसरे नंबर पर पहुंच गई है, पहले नंबर पर आईएएस और बैंक कैशियर हैं.
वैसे, आप लोग चाहें तो इंस्पेक्टर साहब और उनकी टीम के साथ मुकेश यादव वल्द राम नरेश यादव, हाल मुकाम इटावा को उनके शानदार परफॉर्मेंस के लिये नंबर दे सकते हैं.
ये पूच एआई वाले साहब पता नहीं कहाँ पर ताइवान सिटी का विकास सिंगापुर और जापान सिटी की तर्ज पर कर रहे हैं.
अभी हमलोग क्यूटो और वेनिस से ही पार नहीं पा पाये हैं, अब सिंगापुर और जापान से भी पार पाना पड़ेगा!!
यीडा की 92वीं बोर्ड बैठक में यमुना सिटी के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। यमुना सिटी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने को मंजूरी दी गई है। ताइवान सिटी का विकास सिंगापुर और जापान सिटी की तर्ज पर किया जाएगा।
#YEIDA#YamunaCity#YamunaExpressway
दरअसल, जो लोग निगेटिव मानसिकता के होते हैं, वह हर गलत काम में केवल कमी ही खोजते हैं, लेकिन जो पॉजिटिव सोच वाले हैं, वो लोग गलत काम में भी अच्छाई ढूंढ ही निकालते हैं. अब देखिये 4200 करोड़ रुपये का लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे बरबाद हो चुका है, यहां वहां दरार पड़ रही है, सड़क टूट रही है, कहीं धंस रही है, इस पर चलना खतरनाक है. ये सब तो सबको दिख रहा है, लेकिन इसके पीछे पीएनसी कंपनी की अच्छी सोच किसी को नजर नहीं आ रही है!
अब बताओ भला, पीएनसी इंफ्राटेक ने अगर सड़क ठीक, टिकाऊ, मजबूत और अच्छा बनाया होता तो मीडिया वालों को इस पर कोई समाचार करने को मिलता? नहीं मिलता ना? पीएनसी ने इसीलिये जानबूझकर और मीडिया वालों का खबर में सहयोग करने के लिये सड़क को बरबाद बनाया ताकि उन पर जो 24 घंटे फालतू समाचार चलाने का दबाव होता है, वह कम हो सके और वो कम से कम कुछ अच्छा समाचार चला सकें! यह होती है सहयोग की भावना, जिसे पीएनसी ने दिखाया है.
दूसरे, सड़क एक बार में ही बन जाती और सब सही चलता तो आज जो लोग काम कर रहे हैं, उन्हें काम कहां से मिलता? कंपनी ने मजदूरों को काम देने के लिये ही सड़क को बरबाद बनाया ताकि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को रोजगार मिल सके. साथ ही कंपनी ने सड़क को ऊंचा खाला भी इसीलिये बनाया कि कुछ महिलाओं को इस पर झाड़ू पोछा करने, पानी बहवाने का काम मिल सके! फिर भी, ऐसी सकारात्मक और राष्ट्रहित की सोच रखने वाली कंपनी पर निशाना साधा जा रहा है.
#तिरछी_कटारी
#PNCInfra
#PNCInfratech
#NHAI
#nhai_official
पता नहीं किसको मेरे एक्स एकाउंट की जरूरत आन पड़ी है? बेचारा परेशान है. 18 बार खटाखट कोशिश कर चुका है.
मुझे पासवर्ड खुदे याद नहीं है, अन्यथा इतना मेनहत करने वाले को खुद ही बता देता!! उसका भला हो जाता.
भाई जो भी हो संपर्क करो, अपना एक्स हैक कराने में यथासंभव मदद करूंगा, तोहरे मतारी की कसम!!
अभी भइया जी की सरकार नहीं है!
राजधानी लखनऊ में पारा थाना क्षेत्र के बुद्धेश्वर चौकी प्रभारी विनय पटेल पर जानलेवा हमला हुआ है. जानलेवा हमला करने वालों में दबंग लल्लन यादव, पिंटू यादव और उनके दर्जनों साथी शामिल हैं.
जानकारी के अनुसार पारा क्षेत्र में अवैध डेयरी चलाये जाने की सूचना पर नगर निगम की टीम अवैध डेयरी संचालकों पर कार्रवाई करने के लिये पहुंची हुई थी. टीम 18 भैंसों को पकड़ कर वाहन में चढ़ाने लगी.
तभी पशुपालकों ने नगर निगम की टीम और उनके वाहनों पर पथराव कर दिया. सहयोग के लिये मौके पर मौजूद बुद्धेश्वर चौकी इंचाज विनय पटेल ने दबंग पशुपालकों को रोकने का प्रयास किया तो उन पर भी हमला हो गया.
मामला पारा क्षेत्र के आदर्श विहार और जनता विहार कॉलोनी का है. नगर निगम तथा पुलिस की टीम पर पथराव करने के साथ ही लाठी एवं डंडों से भी हमला किया गया. कर्मियों को पकड़ पकड़ कर पीटा गया.
एक दबंग विनय पटेल को धक्का देकर गिरा दिया तथा उनका गला अपने हाथों में कस कर जकड़ लिया. हमले में चौकी इंचार्ज पटेल समेत नगर निगम के तीन कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं. चार वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए हैं.
नगर निगम कर्मी अवधेश कुमार एवं चौकी इंचार्ज विनय पटेल द्वारा इलाके के दबंग लल्लन यादव, उसके साथी पिंटू यादव समेत दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है.
गिरधारी जैसे लोग ही सफलता के झंडे गाड़ते हैं!
गिरधारी से अलग सोचने वाले बस कूढ़ते रहते हैं!! इससे बेपरवाह गिरधारी राजा/मुखिया का सबसे खास आदमी बन जाता है
गौतम अडानी जी का एक प्रवचन सुन रहा था, जिसमें वह कह रहे हैं कि जब मैं पहली बार मुंबई पहुंचा तो मैं सीखना चाहता था, काम को समझना चाहता था, लोगों को समझना चाहता था. मेरे प्रोजेक्ट साइट पर जो भी युवा आता है, उसमें मुझे अपना ही सफर दिखता है. खैर, अडानी जी को सुनकर अच्छा लगा, लेकिन लाखों लोग केवल साइट पर काम ही करते रह जाते हैं, क्योंकि उनको कोई ऐसा साथी नहीं मिलता है, जो उनको एयरपोर्ट, पोर्ट या सरकारी सम्पत्ति सस्ते दामों पर दिलवा सके.
अब देखिये...1988 में अडानी जी ने अपना सफर शुरू किया था. तब से लेकर 2013 तक उनका कुल नेटवर्थ 5 अरब डॉलर के आसपास थी. यानी 25 सालों में अडानी जी केवल 5 अरब डॉलर तक ही पहुंच पाये थे. नियम कानून के साथ डंटे रहते थे तो 5 अरब डॉलर से 10 अरब डॉलर तक पहुंचने में कम से कम दस साल लग जाते, लेकिन 2014 में मोदीजी की सरकार बनने के बाद अडानी जी के बिजनेस ने ऐसा छलांग मारा कि दुनिया भौचक्क रह गई.
वर्तमान में उनके समूह का नेटवर्थ 85 से 90 अरब डॉलर के आसपास है. यह स्थिति तब है, जब उनका समूह किसी मैकेनिकल चीज का उत्पादन नहीं करता है. यानी अडानी समूह किसी उद्योग का संचालन नहीं करता है बल्कि वह दूसरों के संसाधन को अपना बनाकर बेचता है, मतलब केवल बिजनेस करता है. 2013 में अडानी जी भारत के टॉप टेन अमीर बिजनेसमैनों की लिस्ट में तक शामिल नहीं थे. विश्व में भी उनकी अमीरी का नंबर 609 था.
परंतु मोदीजी के केंद्र में पहुंचते ही अडानी साहब की किस्मत बदलने लगी, जबकि उनकी साइट पर आने वाले किसी भी दूसरे साथी को मोदीजी टाइप का कोई साथी ही नहीं मिला कि उसकी किस्मत बदल सके. पर, अडानी जी की किस्मत ऐसी बदली कि 2022 में वह 137.4 अरब डॉलर के साथ बर्नार्ड अरनॉल्ट को पीछे छोड़ते हुए विश्व के तीसरे नंबर के अमीर हो गये. वह एशिया से टॉप तीन में पहुंचने वाले पहले व्यापारी बने, जबकि खानदानी व्यापारी अंबानी पीछे रह गये.
वह तो बुरा हो हिडनबर्ग का, जिसने अडानी समूह के खेल का खुलासा करके उनका मार्केट डाऊन कर दिया. अन्यथा जिस रफ्तार से दूसरे समूहों पर सीबीआई और ईडी का छापा पड़ने के बाद उस समूह की शॉपिंग कर रहे थे, उस हिसाब से तो फिर इनकी अमीरी को कोई पकड़ ही नहीं पाता. बाजार से झटका खाने के बावजूद वर्तमान में अडानी परिवार अमीरी के मामले में 17 से लेकर 19 वें नंबर के बीच झूलता रहता है.
एक बार फिर भारत में उनसे ज्यादा अमीर अंबानी परिवार हो गया है. पर सवाल अक्सर ही उठते हैं कि ऐसा क्या है कि मोदी की सरकार आने के बाद अडानी समूह ने जो रफ्तार पकड़ी वह अब भी जारी है? कैसे और किसकी मदद से आज अडानी समूह के पास सात राज्यों में 13 बंदरगाह और देश के कई महत्वपूर्ण एयरपोर्ट संचालन का जिम्मा है. क्यों भाजपा शासित राज्यों तमाम सड़क एवं इंफ्रा के काम इसी समूह को मिल रहे हैं?
जहां भी अडानी समूह हाथ रखता है, वहां हाथ रखने से दूसरी कंपनियां डरती क्यों हैं? ऐसा क्यों होता है कि जहां भी छापेमारी होती है, बाद में उसका अधिग्रहण गौतम अडानी साहब का समूह ही कर लेता है? 2015 में सरकार की मदद से अडानी साहब डिफेंस सेक्टर में भी घुस गये, जहां कुछ भी अनुभव नहीं होते हुए, बहुत सारा काम मिलने लगा. जबकि पहले से इस सेक्टर में काम कर रही कंपनियों को उतना काम और मदद नहीं मिला, क्यों?
ऐसे ही, मोदी सरकार ने एनडीटीवी की जांच शुरू की, प्रमोटरों को परेशान करना शुरू किया, अडानी साहब ने एनडीटीवी में बड़ी हिस्सेदारी खरीद ली. एनडीटीवी के पुराने प्रमोटर पाक साफ घोषित हो गये. ईडी और सीबीआई ने मुंबई एयरपोर्ट की संचालक कंपनी GVK और MIAL के खिलाफ जांच शुरू की, छापेमारी की. उसने अडानी साहब से एयरपोर्ट संचालन में समझौता कर लिया, बाद में अडानी साहब ने उससे बहुसंख्यक हिस्सेदारी ले ली. व्यस्त मुंबई एयरपोर्ट अडानी साहब का हो गया, कैसे?
स्विटरलैंड की कंपनी होल्सिम ग्रुप से अंबुजा एवं एसीसी सीमेंट का अधिग्रहण करके बाद अडानी समूह ने सांघी समूह के अधिग्रहण की योजना बनाई. सांघी समूह को खरीदने की कोशिश में श्री सीमेंट भी था, लेकिन उसके समूह पर आयकर विभाग के छापे पड़ गये. छापे के बाद श्री समूह सांघी सीमेंट्स खरीदने से पीछे हट गया और अडानी समूह के अंबुजा सीमेंट ने बड़ी आसानी से सांघी समूह का अधिग्रहण कर लिया.
ऐसे ही आंध्र प्रदेश का कृष्णपट्टनम पोर्ट पहले नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड के पास था. बंगाल की खाड़ी में बना यह ऑल वेदर पोर्ट गहरे पानी का प्रमुख बंदरगाह है. बड़े कार्गों जहाजों को संभालने वाले देश के कुछ चुनिंदा पोर्ट में शामिल है. इसकी संचालक कंपनी नवयुग पर आयकर ने कार्रवाई की, फिर उसके बाद चमत्कारिक ढंग से इस पोर्ट का अधिग्रहण अडानी समूह ने कर लिया.
ये सरप्राइजिंग है, और बेहद शानदार भी है.
किसी देश का पीएम खुद गाड़ी चलाकर आ रहा है, ना तो सुरक्षा का तामझाम, ना पीएम का भौकाल.
ये नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह हैं, जो खुद अपनी गाड़ी चलाकर आये, और उतर कर गंतव्य की ओर चले गये. ना तो गुलदस्ता का इंतजार किया, ना ही कोई सलामी या सैल्यूट ली. एकदम सादगी तो चले गये.
अपने देश में तो एक तीसरी श्रेणी का अधिकारी भौकाल बनाता है, विधायक, सांसद और मंत्री का तो खैर कहना ही क्या?
पीएम और सीएम हो तो फिर आम आदमी को सड़क पर चलने की इजाजत ही कहां होती है?