“इत��े तेवर हैं तो पब्लिक स्कूल में जाओ…यहाँ मिड डे मील मत खाओ…पूरे दिन में दो सौ रुपये नहीं कमाते..तुम्हारे इतने तेवर हैं!”
(बाक़ी ख़ुद देख लीजिए)
कांवड़ के लिये स्कूल बंद कराने वालों की सरकार में सरकारी स्कूल बच्चों के लिए प्रताड़ना शिविर बन गये हैं.
दूसरी बात ये कि पब्लिक स्कूल तेवर दिखाने के लिए नहीं होते, न ही मिड डे मील अध्यापकों की बपौती है. मिड डे मील बच्चों का अधिकार और सरकार की ज़िम्मेद���री है.
बच्चों से दुर्व्यवहार करने वाले अध्यापकों के साथ सख़्ती कब बरती जाएगी?