IT सेलियों के स्टेटस पढ़ने में बहुत आनंद आ रहा है। तो क्या मानें कि CIA और चीनी एजेंट जीत गए? मोदी को झुका दिया? और हाँ, वो ३०० मिलियन व्यू का ट्वीट अपनी गांड में डाल लो अब।
बंगाल का 208 नहीं गिनवाओगे? गुजरात निकाय चुनाव में भाजपा की भारी जीत? कहाँ है UGC का प्रभाव?
घमंड में चूर ये सब के सब साले ख़ुद ही प्रधानमंत्री बने घूमते थे। अभी मुँह बनाए लिख रहे हैं, देखना अब ये डिमांड अपडेट कर देंगे, अब इनको पार्टी बनानी चाहिए!
तो क्यों नहीं हटवा लिया था जून में ही जब 50 लोग होते थे? ख़ुमारी उतरती है बाबू, घमंड अच्छी बात नहीं। तुम्हारी आदत हैं बाँस करवाने की, सेंसिबल बात कोई शांति से बोले तो सुनते नहीं, फिर थूक कर चाटते हो और दाँत निपोड़ कर हँसते हो।
"JEE Main में आए 96% फिर भी नहीं मिला IIT Delhi, दोस्त के आए 79% तो उसे मिल गया"
CJP Protest में छलका छात्र का दर्द, "रिजर्वेशन पर क्यों नहीं बात कर रहे लोग"
@RitikaChandola
जिस देश में चुनावो में ईमानदार व्यक्ति को टिकट ना देकर, जाती देखकर टिकट दिया जाता हो,
जिस देश में जाती देखकर सरकारी नौकरियाँ दी जाती हो
जिस देश में जाती देखकर परीक्षा में pass-fail किया जाता हो,
जिस देश में जाती देखकर एंट्रेंस एग्जाम के कटऑफ सेट किए जाते हो,
जिस देश में जाती देखकर सरकारी योजनाएं लाई जाती हो,
जिस देश में जाती देखकर कॉलेजो के नियम तय किए जाते हो
जिस देश में जाती देखकर कानून की धाराए लिखी जाती हो
जिस देश में उच्चतम राजनीतिक पदो पर जाती देखकर सत्ता सौंपी जाती हो,
जिस देश में मेरिट को स्थान ना देकर जाती को स्थान दिया जाता हो,
जिस देश में योग्यता ना देखकर जाती को ही योग्य माना जाता हो,
उस देश को बर्बाद होने से साक्षात भगवान भी नहीं बचा सकते।
ये आग रुकनी नहीं चाहिए! 🔥🔥
आरक्षण का मुद्दा अब दूसरे न्यूज़ चैनल भी उठा रहे हैं।
इतनी ज़ोर से आवाज़ उठानी है कि हर जगह सुनाई दे। 🔥🔥
शाबाश भाई! 👏🔥 @Harshdubey9956#EndReservation
गोपी कपाड़िया एक डिजिटल व्लॉगर हैं, जो अब अपने देश इंडिया को छोड़कर स्वीडन में रहती हैं।
वो कह रही है कि 30% टैक्स भरती थी मैं इंडिया में,
और
स्वीडन में भी लोग लगभग 30% टैक्स भरते हैं।
जिसके बदले में उन्हें मिलती है साफ हवा, साफ पानी, बेहतर सड़कें, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्री हेल्थ केयर,
बच्चों के लिए जीवन भर फ्री एजुकेशन और भी कई तरह के सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स जो कि किसी को भी चाहिए एक अच्छा जीवन जीने के लिए।
अब वो पूछ रही है कि 30% टैक्स भर के इंडिया में आपको क्या मिलता है।
“सत्ता जब जाती है तब घुँघरू बजा कर नहीं जाती”
डेढ़ दर्जन मेट्रो स्टेशन बंद करने के बाद भी भीड़ को जंतर मंतर आने से रोक नहीं पा रही सरकार!!
राम मंदिर चंदा चोरी ने जनमानस की आस्था के टुकड़े कर दिए और छात्रों को जिस तरह से सरकारी मशीनरी गुंडा मवाली साबित करके पैलेट गन, आंसू गैस मारने में लगी है, पूरा देश इन दो बातों से हिल गया है…
लोगों को लगने लगा है कि ये सरकार “we the people of India” के लिए नहीं बल्कि “मैं, नरेन्द्र दामोदर दास मोदी” की निजी सरकार चल रही है…
सवर्णों का गर्दन काटने पर तुला हुआ है BJP और बेशर्मी की तरह बांकीपुर में वोट मांगने जा रहा है
जनता मार के भगा नहीं रही वही बहुत है
भाजपा को हराने का ये जोश पूरे देश की जनता के पास होना चाहिए।
एक बेईमान नेता हटेगा दूसरा बेईमान उसकी जगह आएगा, एक बेईमान पार्टी हटेगी दूसरी बेईमान पार्टी उसकी जगह आएगी, एक का हटना दूसरे का आना कोई हल है ही नहीं,
●जहां भाजपा सरकार है वहाँ विपक्षी पार्टियां लोकतंत्र की दुहाई देते हुए छाती पीटती हैं,
●जहां विपक्षी पार्टियों की सरकार है वहाँ भाजपा लोकतंत्र की दुहाई देते हुए छाती पीटती हैं,
ऐसा एक राज्य बताइये जहां बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक जैसी समस्याएं नहीं हैं? ऐसा राज्य बताइये जहां स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्थायें दुरुस्त हैं? राज्यों को आपस में कमपेयर करने पर आपको कुछ बेहतर उदाहरण मिल सकते हैं लेकिन जैसे ही आप उनको चीन, अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुलना करेंगे आप शत प्रतिशत निराश होंगे,
जो पार्टी सत्ता में आती है दमनकारी नीतियां अपनाती है, किस पार्टी में अनपढ़, गुंडे, माफिया, अपराधी नहीं भरे हुए हैं? किस पार्टी में भाई भतीजा वाद नहीं है? किस पार्टी ने भ्रष्टाचार की नई परिभाषाएं नहीं लिखी हैं?
इन सभी का हल सिस्टम को ट्रांसपैरेंट और अकाउंटेबल बना कर होगा, जब तक सिस्टम के मूलभूत ढांचों में सिस्टेमिक बदलाव नहीं होंगे तब तक भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से हमें निजात मिलना असंभव है,
•सिस्टम में समस्याओं के टेक बेस्ड हल,
•पॉवरफुल ट्रांसपैरेरेंसी टूल्स का निर्माण और एग्जिस्टिंग टूल्स को मजबूत करना
•नीचे से ऊपर तक की जवाबदेही फिक्स करने के रिफॉर्म
•स्ट्रॉन्ग, ट्रांसपेरेंट , इफेक्टिव , एक्सेसिबल और अफोर्डेबल ग्रीवैंस रीड्रेसल मैकेनिज्म
•कम्यूनिटी पार्टीसीपेशन ,
•जूडिशल रिफॉर्म
•पुलिस रिफॉर्म
•स्टॉप क्रिमिनलाईजेशन ऑफ पालिटिक्स
•स्ट्रॉन्ग विशिलब्लोअर कानून
•नौकरशाही और प्रशासनिक सेटअप में बदलाव
देश में आंदोलन होते रहे हैं और होते रहेंगे, लेकिन हर एक आंदोलन का लक्ष्य सत्ता परिवर्तन होता है, हमारे सामने हमारे देश के ही कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय उदाहरण हैं, उसके बाद क्या बदलाव आए?
आंदोलन तब प्रभावशाली और ऑर्गेनिक होता है जब उसका नेतृत्व समझदार , लक्ष्य पर केंद्रित, अन्य पोलिटिकल पार्टीज से स्टेज साझा न करना, बेवकूफ़ी भरे नारों से दूरी बनाना और आगे की रणनीति समझदारी से बनाने पर होता है,
देश में आंदोलन आगे भी होते रहेंगे, लेकिन जब तक हम मूलभूत ढांचों के बदलावों पर चर्चा नहीं करेंगे तब तक देश में कोई भी बदलाव सम्भव नहीं है
ये रविंद्र जठेड़ी जी हैं, जो पिछले 77 दिनों से आमरण अनशन कर रहे हैं-भेदभाव पूर्ण SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था के ख़िलाफ़!
इनकी हालत नाज़ुक है, लेकिन अफ़सोस है की ये 77 दिन बाद भी उतने ही अकेले हैं, जितना तब जब इन्होंने अनशन शुरू किया था!
@RJatheri जी से हाथ जोड़कर अनुरोध है कि ये अपना अनशन खत्म करें,, ये देश भीड़तंत्र से चलता है! अगर इनके पीछे भीड़ नहीं, तो इनकी आवाज़ किसी के कानों तक नहीं पहुंचेगी!
इसलिए कृपया करके अभी के लिए ये आंदोलन छोड़ कर, अपनी सेहत पर ध्यान दें!🙏🙏
Breaking news 🚨
नितिन गडकरी के दावे झूठे साबित हुये
Live test मे माइलेज में लगभग 35% की गिरावट
@cars24india ने 10 साल पुरानी, non-E20 compliant Swift Dzire पर E20 और शुद्ध पेट्रोल (E0) की टेस्टिंग की
26 sept 2025 को जैसे ही ये वीडियो वायरल होने लगा था , अचानक प्राइवेट कर दिया गया था
@tehseenp
मने जिसको नकली दूध से प्रॉब्लम है
200 का दूध ले ले
जिसको असली आटा चाहिए
159 का ले ले
जिसको असली ट्रेन पे खाना चाहिए
1500 का ले ले
जिसको असली शिक्षा चाहिए 10 करोड़ का ले
ये गधों का नया भारत है
यह रिज़र्वेशन वाला टीचर है आपको ना चाहते हुए भी सरकार आपके ऊपर ये रिज़र्वेशन वाले टीचर थोप रहे हैं
क्या यही लोकतंत्र है? ना चाहते हुए भी अपने बच्चे को पढ़ाना होगा आरक्षण टीचर से जब ये टीचर को सिर्फ रिज़र्वेशन वाले बच्चे को पढ़ाना चाहिए था
अमेरिका के यूटा में भारतीय मूल के मुस्लिम सैयद सोहेल को मुस्लिम होने के कारण 15 से अधिक बार चाकू मारा गया।
संदिग्ध की पहचान 48 वर्षीय पीटर माइकल लार्सन के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोगों ने पीट-पीटकर गिरा दिया।
बाद में संदिग्ध ने पुलिस को बताया कि उसने उसे उसके धर्म के कारण निशाना बनाया और उसका "इरादा मुसलमानों को जान से मारने का था"।
सैयद की हालत गंभीर है।
पहली बार अब्दुल धर्म की वजह से खुद ही पेला गया है अन्यथा वो खुद आठ दस को पेल सकता था
ये हैं तुकाराम मुंडे, जो महाराष्ट्र के 2005 बैच के IAS अधिकारी हैं।
पिछले कुछ हफ़्तों में आपने शायद इनका नाम सुना होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाल ही में उन्हें राज्य के फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) का कमिश्नर नियुक्त किया गया है। पद संभालने के बाद से ही FDA ने अवैध, नकली, सिंथेटिक और मिलावटी उत्पादों के ख़िलाफ़ ज़ोरदार कार्रवाई शुरू कर दी है। सिंथेटिक दूध के नेटवर्क और मिलावटी पनीर से लेकर अवैध गुटखा और साफ़-सफ़ाई न रखने वाले खाने-पीने के ठिकानों तक, कुछ भी उनकी नज़र से नहीं बच पाया है।
मुंडे ने साफ़ कर दिया है कि बड़े-बड़े नामों को भी कोई रियायत नहीं मिलेगी। उनके विभाग ने मुंबई में कई मशहूर जगहों के फ़ूड लाइसेंस सस्पेंड करके सबको चौंका दिया। इनमें 73 साल पुराना मरीन ड्राइव का आइसक्रीम पार्लर 'के. रुस्तम एंड कंपनी' और 'शालीमार हॉस्पिटैलिटी', 'नूर मोहम्मदी होटल' और 'रहमानिया रेस्टोरेंट' जैसे मशहूर खाने-पीने के ठिकाने शामिल हैं। अचानक की गई चेकिंग में साफ़-सफ़ाई में भारी गड़बड़ियाँ पाई गईं, जैसे कि ज़िंदा कीड़े-मकोड़े और एक्सपायर हो चुके सामान का इस्तेमाल।
उनकी सख़्त कार्रवाई का डर ऐसा है कि सिर्फ़ दो दिन पहले, FDA की छापेमारी की अफ़वाह फैलने पर डेयरी किसानों को सैकड़ों लीटर सिंथेटिक दूध बहाते हुए वीडियो में देखा गया।
21 साल के करियर में यह उनका 25वां ट्रांसफ़र है, जो दिखाता है कि वे राजनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं। यह सोचकर हैरानी होती है कि अगर सिर्फ़ एक IAS अधिकारी इतना बदलाव ला सकता है, तो हमारा देश कहाँ होगा अगर हर अफ़सर उनकी तरह ही बिना समझौता किए और तेज़ी से काम करने वाला हो?
#The_skin_doctor
बिना हेलमेट... जुर्माना 1000/-
नो पार्किंग में पार्किंग करना... जुर्माना 3000/-
मोटरसाइकिल का बीमा नही ... जुर्माना 1000/-
शराब पी कर वाहन चलाना... जुर्माना 10000/-
नो एंट्री में वाहन चलाना... जुर्माना 5000/-
मोबाईल फोन पे बात करना... जुर्माना 2000/-
प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं... जुर्माना 1100/-
ट्रिपल सीट ड्राइविंग... जुर्माना 2000/-
1-खराब सिग्नल... कोई जिम्मेदार नहीं है!
2-सड़क पर गड्ढ़े... कोई जिम्मेदार नहीं है!
3-अतिक्रमित फुटपाथ... कोई जिम्मेदार नहीं है!
4-सड़क पर रोशनी नहीं... कोई जिम्मेदार नहीं है!
5-सड़क पर कचरा बह रहा है...कोई जिम्मेदार नहीं है!
6-सड़कों पर लाइट के खंभे नहीं... कोई जिम्मेदार नहीं है!
7-सड़क के मेनहोल में गिर के मर जाये...कोई ज़िम्मेदार नहीं!
8-महीनों से खुदी सड़क ... कोई जिम्मेदार नहीं है!
9-गड्ढों में गिर कर आप गिरो चोटिल हो जाएँ... कोई जिम्मेदार नही है!
10-आवारा गायें जानवर टकरा जाए कुत्ता काट ले... कोई जिम्मेदार नहीं!
11-सड़कों में उफनाते नाले... कोई जिम्मेदार नहीं!
ऐसा लगता है कि जनता ही एकमात्र अपराधी है और जुर्माना देने के लिए उत्तरदायी है। प्रशासन, निगम और सरकार कोई जिम्मेदार नहीं है। उनके लिए कोई नियम लागू नहीं होते हैं। वे किसी भी चूक के लिए कभी ज़िम्मेदार नहीं हैं।
क्या उन्हें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए ????
नागरिक केवल काम करेंगे... दर्द का सामना करेंगे... टैक्स चुकाना होगा... जुर्माने का भुगतान करेगा... सरकार की जेब भरें... और उन्हें फिर से सत्ता में आने के लिए वोट दें !
“नितिन गडकरी जी कह रहे हैं कि लोग Ethanol को ले कर भ्रम फैला रहे हैं !
अरे गडकरी जी,
भ्रम तो गाड़ियों को भी हो गया है
उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि Ethanol डालने के बाद उन्हें चलना है, बंद होना है, झूमना है…
करना क्या है ?”
शेखर सुमन जी ने धुँआ उठा रखा है 🔥🔥🔥