सुप्रीम कोर्ट ने कल, मार्च 11 को एक ऐतिहासिक फ़ैसले में OBC के non-creamy layer (NCL) के मामले में बड़ा बदलाव कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर माता-पिता Group IV में सरकारी नौकरी करते हैं और अगर उनकी आय ₹8 लाख/वर्ष से ऊपर हो गई है, तो भी उसे क्रीमी लेयर में नहीं जोड़ा जाएगा। साथ ही, ऐसे मामलों में कृषि आय को भी नहीं जोड़ा जाएगा। केवल ‘अन्य स्रोतों’ (बिजनेस, प्रॉपर्टी आदि) से परिवारिक आय (3 साल) ₹8 लाख/वर्ष से कम होनी चाहिए।
SC के निर्णय के अनुसार DoPT ने 2004 में जो पत्र निकाला था, उसका पैरा 9 अब अमान्य हो गया है। इस अनुसार बैंक/प्राइवेट नौकरी वालों की सैलरी मात्र को क्रिमी लेयर नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में पहले पोस्ट की सरकारी ग्रुप III और IV के साथ equivalence तय किया जाएगा। तब तक केवल 1993 OM लागू रहेगा।
इस निर्णय का फ़ायदा अनेकों ऐसे लोगों को मिलेगा, जिन्हें पहले क्रीमी लेयर की ग़लत परिभाषा के कारण OBC रिजर्वेशन से बाहर रखा गया और वो नौकरी में तो हैं, लेकिन सही कैडर में नहीं हैं।
ऐसे सभी मामलों में पिछले डेट (retrospectively) ये फैसला लागू होगा।
DOPT को इसे लागू करने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। अगर ज़रूरी हुआ, तो supernumerary posts बनायी जायेंगी, ताकि दूसरे वर्गों के कर्मचारियों की सीनियरिटी पर असर न आए।
भविष्य के Civil Services Examination (CSE) में वैध OBC-NCL सर्टिफिकेट (DM/तहसीलदार से) को प्राथमिकता; सैलरी आधारित रिजेक्शन बंद।
इस निर्णय से OBC आरक्षण का मूल मकसद बहाल होगा।
रोहित नाथन (CSE-2012), केतन बैच (CSE-2015) जैसे अनेकों मामलों में DoPT को 6 महीने में re-verification कर OBC-NCL स्टेटस देना होगा।