Yesterday, the nation's young came out in Delhi to peacefully protest. They came with love in their hearts, not hatred or anger. They were beaten, both by cops and BJP goons.
This is not the India we want.
Tomorrow, we will march to the Supreme Court as Indians, united beyond party, gender, caste, community and state.
Youth, all opposition parties, civil society groups, all those who believe in democracy and stand by the Constitution of India, will walk with us.
We will submit a memorandum to the Chief Justice on behalf of the nation, demanding an end to vote chori, halting of SIR and the resignation of Gyanesh Kumar.
Narendra Modi, Amit Shah, Ajit Doval and Mohan Bhagwat cannot silence India's voice. These cowards cannot intimidate us. They will have to step aside.
We will march together, with love, brotherhood and patriotism.
Daro mat.
Tomorrow, all of India will march to the Supreme Court.
कल दिल्ली में देश का युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए सड़कों पर उतरा। उनके दिलों में नफ़रत या गुस्सा नहीं, मोहब्बत थी। लेकिन उन्हें पुलिस और BJP के गुंडों, दोनों ने पीटा।
ऐसा भारत हम नहीं चाहते।
कल, सोमवार 12 अक्टूबर को, हम भारतीय होने के नाते सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। पार्टी, महिला-पुरुष, जाति, समुदाय और राज्य की हर दीवार से ऊपर उठकर, हम सब एक साथ चलेंगे।
देश का युवा, तमाम विपक्षी दल, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले, भारत के संविधान के साथ खड़े सभी लोग हमारे साथ चलेंगे।
हम देश की ओर से मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपेंगे। हमारी माँग है - वोट चोरी बंद हो, SIR पर रोक लगे और ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा दें।
नरेंद्र मोदी, अमित शाह, अजित डोभाल और मोहन भागवत भारत की आवाज़ को दबा नहीं सकते। ये कायर हमें डरा नहीं सकते। इन्हें पीछे हटना ही होगा।
हम सब साथ चलेंगे - मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति के साथ।
डरो मत।
कल पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा।
#ChaloDilli
अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई - RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है।
जैसा मैंने कहा था, Mogambo Modi और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।
सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी आवाज़ पूरे देश में गूंजेगी - पहले से कहीं ज़्यादा।
@AmitShah, जितनी पुलिस लानी है, 10 हज़ार, 20 हज़ार, 40 हज़ार, ले आइए। BJP-RSS के जितने गुंडे बुलाने हैं, बुला लीजिए।
हम डरने वाले नहीं हैं। पीछे हटने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है!
सोमवार को हम मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सड़कों पर संविधान को तार-तार किया जा रहा है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, तब कानून के संरक्षक आंखों पर पट्टी डाल कर नहीं बैठ सकते।
संविधान की धज्जियां उड़ेंगी और हम चुप बैठेंगे? ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। जवाबदेही तय करवाकर रहेंगे!
We are not going to stop protesting till Gyanesh Kumar resigns.
This is a fight to protect the most sacred thing in this country.
There is nothing that Narendra Modi and Amit Shah can do that will stop us.
इन आदिवासी छात्रों से मुंबई पुलिस को क्या परेशानी हो गई?
क्या इन्हें आंदोलन का हक़ नहीं?
क्या इन्हें अपने दफ़्तर में रुकने की जगह देना कांग्रेस का अपराध है?
हद है एकदम
महाराष्ट्र में BJP सरकार के अन्याय से त्रस्त आदिवासी छात्र जब अपनी मांग लेकर मुंबई पहुंचे तो रुकने की जगह नहीं थी।
ऐसे में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें तिलक भवन में ठहराया, लेकिन आज सुबह होने से पहले पुलिस कांग्रेस दफ्तर में घुसी और बच्चों को उठाकर ले गई।
इन बच्चों की मांगें आदिवासी छात्रावासों में बुनियादी सुविधाएं और स्कॉलरशिप से जुड़ी हैं, लेकिन बदले में सरकार ने जो किया, वो सबके सामने है।
इसी तरह, पुणे में MPSC के अभ्यर्थी सत्याग्रह पर बैठे हैं, लेकिन सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
BJP सरकार याद रखे- हम इन छात्रों के साथ खड़े हैं, पीछे नहीं हटेंगे.. हम लड़ेंगे और उन्हें न्याय दिलवाकर रहेंगे।
Satyagraha went live 9 hours ago. Since then, more than 10,000 people and groups have come forward.
That's how many struggles Indians are already fighting - quietly, convinced no one was listening.
We are listening. Every submission will be read. Already, we see stories in the topics of education, corruption, social justice, farmers, labour, health, women’s safety, land and environment.
Our team will go through each one, work out how we can help, and reach out where more details are needed. Where any genuine struggle needs to be amplified to be resolved, we will do it.
This is only the beginning. Satyagraha isn't a one-day campaign. It will run for years, and it will stand with every andolan, big or small.
Thank you for speaking up and for standing up for the Constitution.
If you haven't yet, tell me your story 👉 https://t.co/hJ8iARr5La
जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है।
घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ़ इतनी माँग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए। ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया।
आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं। कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए।
और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं।
पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफ़ाज़त की ज़िम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है।
और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आख़िर किसकी हिफ़ाज़त कर रही है?
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है। अमित शाह जी, कहाँ हैं आप? जवाब आपको ही देना है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर उन्होंने देशवासियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया और देश को नई राह दिखाई।
शास्त्री जी की सादगी और देश के प्रति उनका समर्पण हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।
यमुना किनारे बेला एस्टेट में 728 लोग रहते हैं। SIR के बाद वोटर लिस्ट में सिर्फ़ एक नाम बचा - बाकी 727 नाम काट दिए गए।
ये लोग दशकों से यहाँ रह रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के दिल्ली चुनावों में वोट डाल चुके हैं। 2023 में इनके घर तोड़ दिए गए थे - पर ये कहीं नहीं गए, यहीं हैं।
आज मैं इनकी झुग्गी में गया और सीधे इन्हीं से सुना कि चुनाव आयोग ने इनके साथ क्या किया है।
SDM से फ़ोन पर मैंने यही कहा - मकान होने या न होने का वोट के अधिकार से कोई रिश्ता नहीं है। ख़ुद CEC ज्ञानेश कुमार कह चुके हैं कि "हाउस नंबर 0" बेघरों के लिए है। फिर भी 727 लोगों का नाम काट दिया गया।
यह SIR नहीं - यह वोट चोरी का तरीक़ा है। जिनके पास पहले ही सबसे कम है, उनसे उनकी इकलौती ताक़त छीनी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार तो जाएँगे। पर जिस सिस्टम ने उनसे यह करवाया, उसका हिसाब भी होगा।
#VoteChori
मैं तीन साल से वोट चोरी का पर्दाफ़ाश करता आ रहा हूँ। अब चुनाव आयुक्त खुद इसे स्वीकार कर सच्चाई उजागर कर रहे हैं।
ज्ञानेश कुमार ने देशद्रोह किया है। वो अभी इस्तीफ़ा दें और approver बन जाएं।
वोट चोरी की साज़िश में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पूरी जांच होगी।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से मामले की शुरुआत हो सकती! इस पद को कलंकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी! बीजेपी हर गुज़रते लम्हे के साथ देश के लोकतंत्र का मखौल बना रही है. जिम्मेदारी सिर्फ बीजेपी के माथे है! The buck stops with BJP !