ज़रूरी है अब भाजपा की मर्यादा की मास्टरक्लास!
राजस्थान की राजनीति में भाषा की मर्यादा का नया विश्वविद्यालय खुल गया है। हुआ यह कि आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल ने सरकार या उसके कुछ मंत्रियों को “मूर्ख-वूर्ख” जैसा कुछ कह दिया। बस, फिर क्या था! भाजपा के कई नेता एक साथ भाषाशास्त्री, संस्कृताचार्य और नैतिकता-प्रवक्ता बनकर मैदान में उतर आए। सबने एक सुर में बेनीवाल जी को समझाया कि राजनीति में भाषा की मर्यादा होनी चाहिए, शब्दों का चयन संयमित होना चाहिए और सार्वजनिक जीवन में बोलचाल का स्तर गिरना नहीं चाहिए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ तो बहुत ही भावुक हो रहे थे कि आख़िर भाषा का इतना पतन कैसे हो सकता है!
यह पाठ अभी चल ही रहा था कि सहकारिता मंत्री गौतम दक का कथित वायरल ऑडियो सामने आ गया, जिसमें भाषा की ऐसी पुष्पवर्षा बताई जा रही है कि हिन्दी के शब्दकोश ने भी शायद संकोच में पन्ने मोड़ लिए होंगे। अब प्रश्न यह है कि जब भाजपा के पास भाषा-संस्कार का ऐसा जीवंत, प्रायोगिक और लोकभाषाई मॉडल उपलब्ध है तो हनुमान बेनीवाल को अलग से नसीहत देने की ज़रूरत ही क्या है?
बेनीवाल जी को चाहिए कि वे तुरंत गौतम दक जी से मर्यादित भाषा की एक क्लास लें। पाठ्यक्रम का नाम रखा जा सकता है : “सार्वजनिक जीवन में शब्द-संयम: सिद्धांत और व्यवहार।” पहले अध्याय में बताया जाए कि “मूर्ख” कहना असंसदीय है; लेकिन कथित रूप से गाली-प्रधान संवाद अगर अपने ही खेमे से निकले तो वह शायद “भावावेश”, “व्यक्तिगत बातचीत” या “संदर्भ से काटी गई क्लिप” कहलाता है।
राजनीति में यही सुंदरता है। विरोधी बोले तो भाषा बिगड़ती है, अपना बोले तो भावनाएं उमड़ती हैं। विपक्ष का वाक्य अपराध है, सत्ता का अपशब्द परिस्थिति है।
इसलिए बेहतर होगा कि भाजपा अब बेनीवाल को डांटने के बजाय अपने भीतर एक “भाषा-शुद्धि शिविर” लगाए। उद्घाटन गौतम दक करें, अध्यक्षता वे नेता करें जो कल तक मर्यादा पर प्रवचन दे रहे थे, और मुख्य अतिथि प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह को सार्वजनिक सभा में साला कहने वाले वे महान नेता हों, जो अपने पीछे मर्यादित भाषा की एक लंबी परंपरा छोड़कर गए हैं और खुद गवर्नर हो गए हैं। ऐसे में यह तो बनता है कि श्रोता हनुमान बेनीवाल और उन जैसे लोग हों ताकि वे सीख सकें कि राजनीति में शब्दों की असली मर्यादा वही है, जो पार्टी देखकर तय होती है।
@hanumanbeniwal@madanrrathore
हनुमान बेनीवाल का एक बेतुका बयान सामने आया है। इस बयान में मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के बारे में जैसी भाषा बोली गई है। उसके बाद पूरा राजस्थान अब कहने लगा है कि आप नशे में चूर होकर इस तरह की बातें बोलते हैं। आप सांसद हैं, सांसद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।
-श्री @jawaharbedam
गृह राज्य मंत्री, राजस्थान सरकार