हिंदुओं को गुरुद्वारा जाने की चुल्ल मची रहती है, इसलिए ये लोग मारते हैं। वीर पुरुष हैं, निहंग हैं, निहत्थों पर वीरता ऐसे ही निकलती है। मज़ार और गुरुद्वारा जाना ही क्यों है? तुम्हारे मंदिर कम हो गए हैं? वो नहीं मानते तुम्हें अपना, तुम क्यों चिपकना चाहते हो? उनका समाज भी कभी इस पर सामूहिक रूप से नहीं बोलता।
उनके लिए तुम बिहारी, भैये और कुत्ते-सूअर जैसे हो। नस्लभेद, घटिया जातिवाद और क्षेत्रवाद का भौंडा प्रदर्शन हो रहा है।
पटना में परीक्षार्थी सफोकेशन से मर गया घुट-घुट के। सेशन पर जो अराजकता की स्थिति थी, वह हम सबने देखी। विद्यार्थियों को इस देश में कीड़े-मकोड़े की तरह देखा जाता है।
रैंडम जगह पर सेंटर होंगे ताकि बच्चे अधिकतम समस्याओं का सामना कर सकें। उन्हें एक दिन पहले जाना पड़े, रेल में भीड़ हो, सड़कों ��र जाम लगे।
कोई लॉजिक नहीं है बगले के जिले की जगह तीन सौ किलोमीटर दूर सेंटर देने का। कुत्तों की तरह हमारी शिक्षा व्यवस्था इन्हें ट्रीट करती है।
छात्र मर रहे हैं, मारे जा रहे हैं, आंदोलन कर रहे हैं, लीक हुए पेपर की दोबारा परीक्षा दे रहे हैं, और नीरो बंसी बजा रहा है। उसे कोई पॉलिसी नहीं लानी, मरते रहो।
ऐसी निष्ठुर सत्ता, ऐसी घटिया व्यवस्था, ऐसी उपेक्षा मैंने पहले नहीं देखी।
भारत का विपक्ष कितना नल्ला है उसका उदाहरण CBSE और NEET को ले कर इनकी प्रतिक्रिया है। 40 ला�� परीक्षार्थी (कुछ लाख दोनों में) प्रभावित हुए और विपक्ष 2-2 दिन विलंब से जग कर, हमारे जैसों के लिखा और बोला उठा कर सोशल मीडिया पर लिख रहा है।
यदि विपक्ष गंभीर होता तो इथेनॉल की बकलोली से शिक्षा मंत्रालय की निकृष्टता तक, इस देश में कुछ अच्छा हो सकता था, पर इन्हें खानापूर्ति करनी है।
मैं जानता हूँ कि अब कुछ लोग कहेंगे कि मैं विपक्ष के लिए काम कर रहा हूँ, पर कदाचित एक सजग समर्थक और कर्तव्यनिष्ठ पत्���कार का वही धर्म है। मैं विपक्ष के ��ाथ नहीं हूँ, अभी मैं ही विपक्ष हूँ क्योंकि विपक्ष मा%रचो% नल्ला है।
अबे गधे तेरा बाप उत्तर प्रदेश से विधानसभा चुनाव लड़ा था
सर का पसीना गान से बहा दिया था
15 उम्मीदवारों में सबसे अंतिम क्रमांक पर था मात्र 1400 वोट मिले थे
यह तो तेरी और तेरे बाप की औकात है बे
ट्विटर पर इंस्टाग्राम पर फेसबुक पर बकचो di करने से ना सरकार बनती है ना सरकार हिलती है
🤣🤣🤣🤣😂😂
��ंघ का मुखपत्र यह मानता है कि भगवान राम और कृष्ण मोहम्मद की तरह ‘नबीं’ थे। इस पोस्ट की भाषा देखिए। जिस टोन में यह लिखा गया है प्रतीत होता है कि पाँचजन्य को किसी राजा रईस से स्वीकृति चाहिए कि हमारे भगवानों को मुसलमान, नबीं रूप में मान्यता दे दें।
ये RW के कोर हैं? कोर संक्रमित हो चुका है।
सोनिया गाँधी गंगाराम चिकित्सालय में स्वास्थ्य लाभ हेतु गई हैं। फेफड़े का रोग है, दीर्घ काल से है। कई बार विदेश भी जा चुकी है। राहुल, प्रियंका दोनों मिलने गए हैं।
कुछ लोग कह रहे हैं कि क्या राहुल गाँधी ने चिकित्सक की जाति पूछी?
मैं कहता हूँ, निस्संदेह पूछी ही होगी। तभी तो वह ऐसे तथ्य और आँकड़े लाते हैं कि ‘आप अपोलो चले जाइए, वहाँ आपको एक दलित डॉक्टर नहीं मिलेगा।’ तो बिना पूछे ये तथ्य कैसे इंदिरा भवन के सभागार में रखा जाता है?
राहुल गाँधी कई बार केवल यही आँकड़े ही लाने के लिए भ्रमण पर निकल जाते हैं। आपको क्या लगता है कि कृषक, कुली, ड्राइवर, मैकेनिक, विद्यार्थी, मछुआरा, श्रमिक आदि बनते राहुल क्या करने जाते हैं।
वो यही आँकड़े एकत्र करते रहते हैं। सरकार त�� ऐसा करती नहीं, कास्ट सेंसस नहीं, जनगणना नहीं… तो राहुल गाँधी स्वयं यह कार्य करते हैं जो सरकार को करना चाहिए।
सरकार ने तय किया है कि उन्हें यदि गाली खानी ही है तो सुप्रीम कोर्ट वाले विषय पर खा लेते हैं क्योंकि UGC इनसे सँभल नहीं रहा। यदि ऐसा नहीं है तो SC के CJI द्वारा एक पैराग्राफ पर थर्मोन्यूक्लियर मोड में जाने का और कोई मतलब है ही नहीं।
जज साहब भी जानते हैं कि इस पैराग्राफ में ऐसा कुछ भी नहीं है जो अनुचित है, या पढ़ाया न��ीं जाना चाहिए। सरकार जैसे रेंगने लगी है, ताकि हम सब उसे पेलें, उसका औचित्य केवल UGC से ध्यान भटकाना है।
कोई बात नहीं, हम UGC पर कल पुनः लिखेंगे। एक-एक SC/ST एक्ट के कारण हो रही घटना पर लिखते रहें। 8 मार्च को जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन में भी चलेंगे। ये दो कौड़ी के डायवर्सन टैक्टिक्स नहीं चलेंगे। याद रखना, हम वो हैं जो तुम्हारा नैरेटिव चलाते रहे हैं, हमे चूतिया मत बनाओ NCERT के नाम पर। हम बनेंगे नहीं।
ब्राह्मणों को खुश करने का एक इमोशनल ड्रामा..
इंडियन एयर फोर्स के टेस्ट पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को भारत सरकार द्वारा उनके अदम्य साहस के लिए अशोक चक्र से नवाज़ा गया है। अशोक चक्र किसी सिविलियन मामले में विशेष साहस और विशेष वीरता दिखाने के लिए दिया जाता है। यह किसी सिविलियन मामले का हाईएस्ट गैलेंट्री अवॉर्ड है।
ग्रुप कैप्टन एक सरकारी मिशन के तहत सरकारी खर्चे पर भेजे गए थे, जिसके लिए विदेशियों ने इन्हें ट्रेनिंग दी और विदेशी कंपनी एक्सिओम स्पेस के रॉकेट में बैठकर अन्य लोगों के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचे। वहाँ कुछ दिन बिताने के बाद विदेशी रॉकेट इन्हें वापस लेकर आया। अब इसमें साहस और वीरता कहाँ से आ गई?
इस मिशन पर जाने के लिए सैकड़ों लोगों ने अपना इंटरेस्ट जाहिर किया था।
यह बिल्कुल ऐसा है कि किसी व्यक्ति को कोई दूसरा व्यक्ति अपनी कार में बिठाकर दूर हिमालय तक का चक्कर लगवाकर उसके घर के आगे लाकर छोड़ दे और कहा जाए कि जो व्यक्ति बैठकर गया था, उसने हिमालय फतह कर लिया और अदम्य साहस का परिचय दिया।
1971 के बांग्लादेश युद्ध में
भारत के 3,900 भारतीय सैनिक शहीद हुए,
10,000 सैनिक घायल हुए।
✈️ भारतीय वायुसेना ने 75 हवाई जहाज़ खोए।
💰 भारत ने इस युद्ध पर ₹500 करोड़ खर्च किए, जो आज की कीमत में करीब ₹25,000 करोड़ बैठते हैं।उस समय 1 करोड़ बांग्लादेशी शरणार्थी भारत आए।
उनके भरण-पोषण पर भी भारत ने ₹500 ��रोड़ खर्च किए जो आज के हिसाब से ₹25,000 करोड़ और हुए।
यानि उनकी आज़ादी की कीमत भारत ने अपने खून और खजाने से चुका��।
लेकिन आज वही बांग्लादेश ये सारे एहसान भूल कर
➡️ भारत के हिंदुओं का दमन कर रहा है,
➡️ इतिहास को ऐसे भूल रहा है जैसे कभी लिखा ही न गया हो।इसे कहते हैं एहसान फ़रामोशी !
मंदिरों में दिए गए दान के फंड से चलने वाले कॉलेज-हॉस्पिटल में मुसलमानों को प्राथमिकता देने से ले कर निगम की सड़कें और बस अड्डे बनाए जाते रहे हैं। @narendramodi से मेरी यही समस्या है कि मंदिरों को सेकुलर सरकारी संस्था मान कर उसका दुरुपयोग हो रहा है।
कांग्रेस और चुनाव आयोग
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*मुख्य चुनाव आयुक्त MS गिल रिटायर होते ही* कांग्रेस में शामिल हुए *राज्यसभा पहुंचे* और खेल मंत्री बने
*नवीन चावला ने* गांधी परिवार पर किताब लिखी *और सीधे* मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिए गए
कांग्रेस के समय *"चुनाव आयोग"* को ऐसे चलाया जाता था
*निशिकांत दुबे जी ने* कांग्रेस के
*एटम बम* को ही एक्सपोज कर दिया 🔥
कॉन्ग्रेस की एक ही दिन में इतनी चौड़ी कर दी गई है कि अब उनके नेता वस्तुतः यह माँग कर रहे हैं कि मोदी-शाह को उनके द्वारा लिखी स्क्रिप्ट पढ़ देनी चाहिए संसद में।
इसका नाम नहीं लिया, वो नहीं बोला, ये नहीं कहा… यही कह कर नाचते रहो, वो 29, 34 सब जीतेंगे। तुम्हारी अधोजटाओं के बाल पक कर झड़ने लगेंगे, भाजपा तब भी सत्ता में बनी रहेगी, यदि यही राष्ट्रद्रोही एटीट्यूड ले कर चलते रहे।
ट्रम्प को लगा कि बहत्तर बार ‘मैंने रुकवाया’ का झूठ बोल कर, भारत पर दवाब बना लेगा। जब तुम साले इतने ही कनविंसिंग थे, तो फिर ये ट्रेड डील क्यों नहीं हुआ? सारा कुछ ट्रेड पर ही था, तो क्यों नहीं मना लिए?
क्योंकि मोदी घुटने टेक कर न तो तुम्हारा मांसाहारी दूध लेगा, न ही तुम्हारे टर्म्स पर, 30 बार बकलोली सुन कर, सामरिक समझौते करेगा।
अब कॉन्ग्रेस के नंगे नाचेंगे कि देखो डील भी नहीं कर पाया। ये मनमोहन, भिखमंगी इंदिरा या गोरी-लोलुप नेहरू की सरकार नहीं है। आर्म ट्विस्टिंग और वर्चू-सिंगनलिंग नहीं चलेगी।
इन्हें रुपे कार्ड से समस्या है, यूपीआई से समस्या है, ‘मुझे अपना बाप क्यों नहीं मानते’ इससे समस्या है। भारत एक वैश्���िक बाजार है, उसके पास पैसा है। जिन्हें बेचना है बेचेंगे, जिन्हें खरीदना है खरीदेंगे।
साथ ही, सरकार को मैनुफैक्चरिंग पर थोड़ा अधिक ध्यान देना चाहिए। इसे जब तक आप युद्धस्तर पर नहीं देखोगे, कोई झंडू अपना सॉफ्टवेयर/हार्डवेयर एक्सेस बंद करेगा, कोई टैरिफ की धमकी देगा।
रात के ढाई बजे भारत में एयर इंडिया क्रैश की जाँच रिपोर्ट जारी की गई है और पहला संदेह पायलट पर डाला जा रहा है कि उसने दोनों ही इंधन पहुँचाने वाले स्वि�� ऑफ कर दिए।
कॉकपिट में एक पायलट दूसरे से पूछ रहा है कि उसने इंजन तक फ्यूल ले जाने वाले स्विच को ऑफ क्यों कर दिया, तो दूसरा कहता है कि उसने ऐसा नहीं किया है। ये दोनों स्विच रैंडम टच से ऑन-ऑफ नहीं होते, उसे शक्ति लगा कर ऑफ या ऑन किया जाता है।
इस रिपोर्ट के कुछ हिस्से वाशिंगटन पोस्ट में कल से ही चल रहे थे, और आज रिपोर्ट का मूल भाव वही है। पायलट ने स्विच ऑफ किया, स्वतः हो गया, सॉफ्टवेयर की समस्या थी या मैकेनिकल, ये जानकारी नहीं है। केवल यह है कि कुल तेईस सेकेंड में उड़ान भरने से ले कर मे-डे की आपात घोषणा हो गई।
एक महीने में जिस देश में कॉकपिट का ब्लैकबॉक्स डिकोड होता है, जहाँ विदेशी संस्थाओं के पैसों पर बिकने वाले लोग सरकार के हर मंत्रालय में उपस्थित हों, वहाँ रात के ढाई बजे ही रिपोर्ट रिलीज की जाती है।
संभव है कि अब बोइंग को बचाया जाएगा, जैसे कि लम्बे समय से लग रहा था, और पायलट को दोष दिया जाएगा। या तो पायलट की गलती बताई जाएगी या फिर किसी एक को आतंकी योजना के तहत क्रैश का हिस्सा बता दिया जाएगा।
वर्षों तक सोती रही DGCA ने इस क्रैश के बाद ऑडिट किया और एयरपोर्ट एवम् विमान संचालन से संबंधित पंद्रह बड़ी त्रुटियाँ पाई गईं। यानी इन त्रुटियों के साथ भगवान भरोसे हमारे जहाज उड़ रहे थे। क्रैश के दो सप्ताह तक हर दूसरा एयर इंडिया विमान, हर बोइंग 787 रास्ते से लौट रहा था या तकनीकी कारणों से उड़ ही नहीं रहा था।
अचानक से सब ठीक हो गया? अब कोई जहाज लौटाया नहीं जा रहा, सब जहाज ठीक हो गए? या कंपनियों ने मीडिया को इतने पैसे दे दिए कि सारे समाचार दबने लगे?
मुझे बिके हुए सरकारी लोगों और जान की कोई कीमत न लगाने वाली सरकार से किसी भी प्रकार के निष्पक्ष जाँच की कोई आशा नहीं है।
भारत में नाला-पुल-सड़क-भगदड़ आदि से संबंधित मृत्यु पर जिस प्रकार से सरकार मुआवजा ��े कर हाथ झाड़ लेती है, वह दिन दूर नहीं जब लोग इसके उत्तरदायी अधिकारियों को सड़क पर घेर कर लिंच करने लगेंगे।
तंत्र जब शिथिल हो जाता है, तो विजिलांटिज्म का आरंभ होता है। दस अधिकारियों को मॉब जस्टिस मिलेगा, हर चीज सुधरने लगेगी।
अभी प्रशासन और तंत्र इतनी उपेक्षा करता है कि लिखित शिकायत के बाद भी पुल चालू रखा जाता है, नया नहीं बनाया जाता, दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती… होती भी है तो वो बाद में छूट जाते हैं।
उस समय को आमंत्रित न करे सरकार। वह अराजकता नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।