मैंने अपने आँसू पोंछ लिए।इस बार जब वो बच्ची घूम कर आई तो मैं भी हँसने लगी।तभी अपने आप से मैंने यह वादा किया कि अब मैं कभी homesick नहीं महसूस करूँगी।मज़बूत इरादे वाली बनूँगी।❤️
तब से मैं अपने घर से बाहर ही बाहर हूँ।मेरा दिल घर से अधिक दोस्तों में रमा हुआ है। 💐🙏
जब आप उस शिक्षण संस्थान में ऑटोग्राफ़ देते हैं जहाँ से आप पढ़ कर आए हैं तो ये आपके कंधों पर एक ज़िम्मेदारी की तरह होता है।आपका नाम उस जगह से जुड़ा होता है।जाने अनजाने ही सही आप उसका प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं।
वो हवा की रफ़्तार से आगे निकल गई।फिर अगली सड़क से गोल घूम कर वापस आई।इस बार जब उसने मुझे रोते देखा तो वह धीरे से मुस्कुराई।मुझे तो ख़ुद पर शर्म ही आ गई।मुझे लगा वो छोटी सी बच्ची इतने मज़े से हॉस्टल में रहती है और एक मैं हूँ जो कॉलेज में होकर भी बिसूर रही हूँ!
जीवन के झंझावातों से
अपनों के ही आघातों से
क्रूर काल के कठिन क्रमों से
दुनिया भर के भग्न भ्रमों से
मैंने ख़ुद को बचा लिया है !
मैंने ख़ुद को बचा लिया है !
जल्द ही यह नया गीत साझा करूँगी, जो जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव पार कर लक्ष्य तक पहुँचने की यात्रा को दर्शाता है। ❤️
स्वाध्याय जीवन जीने की कला सिखाता है,आत्ममंथन सिखाता है।जब हम ख़ुद नहीं पढ़ेंगे तो अगली पीढ़ी को क्या सिखा पाएंगे ?
ऐसे बहुत सारे सवालों के साथ घर लौट आई।
आप सब मुझे बताइयेगा कि आपका इस विषय पर क्या विचार है!
अति किसी भी चीज़ की बुरी होती है..चाहे वो घर में पसरा सन्नाटा ही क्यों न हो।वैसे तो मैं बहुत शांति पसंद करती हूँ मगर आज घर की शांति अखर रही थी।अंगद तो अपने कमरे में चुपचाप बैठ कर पढ़ाई करता रहता है।
गीत पूरा होने की ख़ुशी में चली गई अपनी पसंदीदा जगह।किताबों की दुनिया में! कुछ एक पढ़ने वाले लोग मिले।पूरा मॉल यूँ तो खचाखच भरा था मगर बुक शॉप ख़ाली।हिन्दी की किताबों के पास सन्नाटा था।सोचती रही कि अपनी भाषा और साहित्य का क्या भविष्य है! किताबें ज्ञान हैं।
तो लड़कियों !
कुछ होने और बनने के लिए तुम्हें किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।तुम ख़ुद में पूर्ण हो।तुम जब जो चाहो कर सकती हो।
और हाँ ! अपनी दुनिया से ऐसे नकारात्मक लोगों को चुपचाप बाहर फेंक दो।
सलाह उनसे लो जिनको उस टॉपिक का अनुभव हो। वरना कुछ मत सुनो ! 🤪
बचपन में मुझे किसी ने कह दिया “तुम्हारे नंबर तो कम आए हैं,तुम्हारे घर में तो सब टॉपर हैं!फिर तुम्हें ऐसे नंबर कैसे आ गए ?मन नहीं लगता क्या तुम्हारा पढ़ने में ?या फिर समझ नहीं आता! ? ”
भगवान क़सम पहली बार ख़ुद पर संदेह हुआ !
एक छोटी सी बात समझ आई कि ये लोगों की अपनी insecurities (असुरक्षा की भावना)हैं जो वो दूसरों पर लाद देते हैं।और जब हम समझदार नहीं होते तो वो सब कुछ मानने लग जाते हैं।उर्दू में कहते हैं “एहसास-ए-कमतरी”..बस इसी भावना के कारण अक्सर लोग ऐसा करते हैं।