माननीय मुख्यमंत्री जी उप्र की राजधानी-क्षेत्र के स्कूल की बदहाली का पहले हाल देखिए फिर 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी और अरबों-खरबों के निवेश का जुमला फेंकिए।
दस दिखाया, सोलह गटकाया
‘भाजपा’ की पुलिस की माया
कन्नौज में पुलिस की गाड़ी से हुए एक्सीडेंट में सोने की तस्करी का खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार टक्कर लगने के बाद जब कार सवार भागने लगे तो पुलिस ने पीछा करके उन्हें पकड़ा और तलाशी के दौरान गाड़ी से 1 किलो के 26 सोने के बिस्कुट पकड़े लेकिन दिखाए गए केवल 10 किलो के बिस्कुट…
अब ध्यान ये रखना है कि कहीं पुलिस दिखाए गए बिस्कुटों को भी ‘पीली धातु’ कहकर सरकारी हिसाब में दर्ज़ न कर ले और बाद में पीतल के बिस्कुट से बदलकर ये सारे सोने के बिस्कुट भी गटक न जाए।
नेपाल से गोरखपुर और गोरखपुर से दिल्ली यही है डबल इंजन के डबल गोरखधंधे का असली रास्ता।
दर्द आपका - डाटा आपका - दौलत इनकी
पूरा सिस्टम BJP-RSS-पूंजीपतियों के फायदे के लिए चलाया जाता है 👇
1. पैसा: अडानी की आमदनी 10 साल में 30 गुना बढ़ी
2. सत्ता: BJP का बैंक बैलेंस 10 हजार करोड़ रुपए है
3. सोच: संस्थाओं में RSS के प्रचारक फिट किए जाते हैं
BJP-RSS के इस सिस्टम ने रोजगार खत्म किया, विश्वविद्यालयों पर कब्जा किया, आपके ऊपर हमला किया है।
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
📍 प्रयागराज, यूपी
#ChhatronKiGoonj
जन सेवा के लिए समर्पित जीवन जीनेवाले, सत्यनिष्ठा एवं सादगी की प्रबुद्ध प्रतिमूर्ति सदैव अनुकरणीय ‘छोटे लोहिया’ पंडित जनेश्वर मिश्र जी की जयंती पर उनके द्वारा जीये गये समाजवादी मूल्यों के प्रति पुनः संकल्पित नमन!
अब सामान्य ज्ञान का स्तर देखकर-सुनकर समझ में आया कि ये प्रतियोगी परीक्षाओं के विरोधी क्यों हैं?
उत्तर प्रदेश के युवा याद रखें ये वही हैं जिन्होंने बेरोज़गारों की बेरोज़गारी का मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा था कि कमी नौकरी की नहीं है बल्कि युवाओं में योग्यता की कमी है।
अपने नाम रूप जो काम होना चाहिए, उस तक में तो ये लड़खड़ाते हैं और दूसरों पर अयोग्यता का आरोप लगाते हैं।
अगर इतना सामान्य ज्ञान नहीं है तो भला प्रदेश क्या चलाएंगे और ‘ज्ञान’ है पर किसी वजह से ‘ध्यान’ नहीं है तो ये और भी गलत बात है। कम-से-कम बाहर जाने पर तो संयम बरता जाए।
इससे संपूर्ण विश्व में उत्तर प्रदेश की छवि को गहरी ठेस पहुँची है, दुनिया कह रही है ऐसे लोगों के हाथ में अगर उप्र की बागडोर है तो फिर क्या ही उम्मीद करना।
वैसे इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि इनके गुट के लोग तो स्वतंत्रता आंदोलन में थे नहीं, इसीलिए स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास ये भूमिगत भूमिका निभाने वाले लोग क्या जानें। ये ज्ञान नहीं एक कान से दूसरे कान तक बात पहुँचानेवाले लोग रहे हैं।
एक बार फिर से दूर-दूर से लोगों को जुटाया जाएगा
“एक नहीं बार-बार झूठ बोलो” पाठ पढ़ाया जाएगा
झूठ के महा दरवाज़े से झूठ का झंडा उठाया जाएगा
अपनी करतूतों की काली सड़कों पर चलाया जाएगा
भाजपाई संगी-साथियों की विभाजनकारी नीतियाँ अपने ही देश के लोगों को एक-दूसरे से डराती हैं, लड़ाती हैं। ये ‘बाँटो-और-राज करो’ की साम्राज्यवादी सोच के वो विचारवंशी लोग हैं, जो भूमिगत रहकर अपनी पहचान छुपाते हैं इसीलिए अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं।
गिरोह ही अनरजिस्टर्ड होते हैं।
ये नकारात्मक लोग देश में अस्थिरता पैदा करते हैं, जिससे लोगों का ध्यान इनके भ्रष्ट शासन-प्रशासन की ओर न जाए और लोगों की भावनाओं का दुरुपयोग कर, ये लोग अपना स्वार्थ सिद्ध करते रहें। यही इनका संकल्प है और इसी की सिद्धी के लिए ये दरारवादी चौबीसों घंटे ‘दीमकी गतिविधियों’ में संलिप्त रहते हैं। सच तो ये है कि कोई भी समाज लड़ना नहीं चाहता है लेकिन ये संगी-साथी अपने कुछ ‘स्वार्थ-सेवी’ लोगों को समाज के बीच तरह-तरह के मुखौटे पहनाकर भेज देते हैं, जो समाज को विखंडित करने के लिए दरारें ढूँढकर उसे खाई बना देते हैं। ये भोलेभाले लोगों को अपना शिकार बनाते हैं और ‘भय और अविश्वास’ का वातावरण बनाकर ये ख़ुदगर्ज़ लोग समाज को हिंसा से भरकर, रक्तरंजित करके अपने गलत मंसूबों को पूरा करते रहते हैं।
वो दिन दूर नहीं जब इन विघटनकारी लोगों के लिए हमारे देश के हर गाँव, बस्ती, शहर और प्रदेश में ‘नाकाबंदी’ घोषित कर दी जाएगी। ऐसे लोगों की जो करतूतें लगातार उजागर हो रही हैं, उससे सावधान होकर लोगों ने इन्हें अपने घर-परिवार में प्रवेश-प्रवास से रोक दिया है।
ये विश्वास के साथ घात करनेवाले लोग हैं। ये स्वयं की सेवा में लगे लोग हैं, इनकी गिद्ध निगाह में सिर्फ़ अपना स्वार्थ होता है। इन्हें न किसी परिवार से मतलब है, न किसी समुदाय से, न किसी प्रदेश या हमारे देश से।
भाजपा और उनके संगी-साथियों की साज़िश और चालबाज़ी के परदे अब पूरी तरह हट गये हैं, इसीलिए इस बार जनता इन्हें हमेशा के लिए हटा देगी और इन मानवता विरोधी लोगों की नकारात्मक विचारधारा को हमेशा के लिए सुखा देगी।
जनता की जागरूकता ही देश का भविष्य बनाएगी।
अब बस कुछ समय की बात है : बुरे दिन जानेवाले हैं।
#बुरे_दिन_जानेवाले_हैं
अयोध्या में यज्ञ के बाद लगी आग सही प्रबंधन-प्रशासन की कमी को दर्शाती है। आशा है सब सुरक्षित होंगे।
इस बात की जाँच हो कि इस यज्ञ की व्यवस्था के पीछे जो आर्थिक और मानवीय स्रोत लगे थे, उनके पीछे कौन था। जनता में फैली ये बात बेहद निंदनीय है कि इस यज्ञ के नाम पर मंत्री जी से संबंधित विभाग से विभागीय स्तर पर बड़ी वसूली हुई और पैसे बचाने के चक्कर में विशेषज्ञों की देखरेख के बिना ही ये आयोजन हुआ।
हमारे प्रदेश में मेहमान बनकर आए हैं, हम उनको मेहमान मानकर ही सम्मान सहित विदा करेंगे। जाने वालों की बात का बुरा नहीं माना जाता है। जब हार साक्षात् दिखने लगती है तो इंसान को न अपने पद का मान रहता है, न ही अपने कथन पर नियंत्रण।
उम्र और पद का मान करना हमारे संस्कार में है और हमेशा रहेगा।
सादर विदाई!
भाजपा राज में सैफ़ई मेडिकल यूनिवर्सटी का इन्सिनेरेटर पूरी तरह ज़ंग खाकर जर्जर हो चुका है। ऐसे में यदि संक्रमण और प्रदूषण फैलानेवाला मेडिकल कूड़ा-कचरा सही तरीक़े से भस्म नहीं किया जाएगा तो वो स्वयं बीमारियों का कारण बनेगा।
इसे मुद्दे को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तुरंत हल किया जाए।
शेरों के सोहर गाओ!
जिस बड़ी सोच के साथ हमने एशियाई शेरों के लिए ‘इटावा लायन सफ़ारी’ की शुरुआत की थी वो सोच फलीभूत हो रही है और यहाँ एशियाई शेरों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
इटावा लायन सफारी पार्क में नीरजा शेरनी ने अपने तीसरे प्रसव में इस बार 4 शावकों को जन्म दिया है। पहली बार के 2 और दूसरी बार के 3 शावक मिलाकर अब यहाँ इसके कुल 9 स्वस्थ शावक सफलता पूर्वक पल रहे हैं।
लायन सफ़ारी से जुड़े, प्रशंसा के पात्र सभी प्रतिबद्ध और कर्तव्यनिष्ठ लोगों को हार्दिक बधाई और अच्छा काम करते रहने के लिए शुभकामनाएँ!
पर्यावरण के चक्र में हर प्राणी का अपना महत्त्व है, इसीलिए हम प्रकृति को बचाने के लिए बड़ी सोच के साथ सकारात्मक पहल करने में विश्वास करते रहे हैं और करते रहेंगे।
टोक्यो जानेवाले अगर चाहते तो बुलेट ट्रेन पकड़कर क्योटो भी हो आते, और ‘प्रधान इच्छा’ की पूर्ति के लिए थोड़ा अनुभव ले आते लेकिन इस तरह कन्नी काटकर आना अच्छी बात नहीं। देश के अंदर का दुराव विदेश की धरती पर जाकर भी निभाना कोई भाजपाइयों से सीखे।
उधर जर्मनी जाकर भी कोई विद्वेषवश वहाँ का ‘साइकिल हाईवे’ देखने नहीं गया और न ही भारत में नव धनाढ्य की निशानी बन रही मर्सिडीज़ का म्यूजियम देखने, कोई बता रहा था कि किसी ने उनसे ये कह दिया कि कार देखने की अनुमति तो होगी पर बैठने के लिए ‘सीट’ नहीं मिलेगी।
"पूरे देश के पाल समाज और सनातन समाज के लोग मुख्यमंत्री से नाराज हैं क्योंकि उन्होंने मणिकर्णिका घाट ही नहीं, राजमाता अहिल्याबाई की मूर्ति को भी तोड़ा है, 100 मंदिर तोड़े इन्होंने।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
‘संविधान को अपने से नीचे समझना ठीक नहीं।’- भाजपाइयों हेतु नैतिक सलाह।
जनता पूछ रही है कि जब अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाए थे तो संविधान के किस अनुच्छेद के तहत ऐसा वैध-कार्य किया था?
- जो महोदय ‘सनातनी संतों’ का तिरस्कार मंचों से लगातार कर रहे हैं,
- जो अपमानजनक अवांछित उपमा दे रहे हैं,
- जो अपनी विध्वंसकारी नकारात्मक ‘बुलडोज़री सोच’ के समर्थन में नारे लगवाकर माघमेले के धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ रहे हैं,
- जो माघमेले के उपद्रवियों के विरुध्द मुक़दमा दर्ज़ नहीं कर रहे हैं,
- वो महोदय मौन ही रहें, यही उनके लिए श्रेयस्कर है।
सत्ताकामी भाजपा का धर्म विरोधी चेहरा बेनक़ाब हो गया है। जो हानि होनी थी वो हो गयी है। अब अगर भाजपाई और उनके संगी-साथी माफ़ी भी माँग लेंगे तो उसका कोई अर्थ नहीं होगा क्योंकि मायने उसी माफ़ी के होते हैं, जो मन से माँगी जाती है, मजबूरी से नहीं।
शासनाधीश याद रखें हठ, हत करता है।
भाजपाइयों का विचार, वक्तव्य और व्यवहार सदैव असंवैधानिक होता है। सत्ता के अहंकार में डूबी ‘संविधान विरोधी भाजपा’ अब नहीं बचेगी।