🚨 क्या @USAmbIndia धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े में शामिल था?
🚨 क्या अमेरिका ने @Cockroachisback को ‘मार्गदर्शन’ देकर भारत में आंशिक सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश की?
🚨 @republic के अर्नब के चौंकाने वाले दावे. क्या अब वह अमित शाह से इस सुरक्षा चूक पर जवाब भी मांगेंगे?
🚨 क्या @narendramodi सरकार इतनी कमज़ोर हो गई है कि विदेशी प्रभाव भारत में इतने बड़े विरोध प्रदर्शनों को दिशा दे सके और केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफ़े तक करवाने में भूमिका निभा सके?
🚨 अगर अर्नब जो कह रहे हैं उसमें रत्ती भर भी सच्चाई है, तो @DrSJaishankar को तत्काल इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
@TheDeshBhakt
बुलडोज़र ही क्यों चलाना है?
वैसे भी अच्छी यूनिवर्सिटियाँ बनते-बनते वर्षों लग जाते हैं।
अगर कानूनी रूप से संभव हो, तो ऐसे संस्थान को सरकार अपने अधीन लेकर एक सरकारी विश्वविद्यालय क्यों नहीं बना सकती?
उसे उत्तर प्रदेश की सर्वश्रेष्ठ और देश की उत्कृष्ट विश्वविद्यालयों में क्यों नहीं बदला जा सकता?
देश को शिक्षा चाहिए, संस्थान चाहिए...
हर बार समाधान सिर्फ़ बुलडोज़र ही क्यों?
देश का नुकसान कम से कम हो, इस पर भी विचार होना चाहिए। @myogiadityanath
@DmHapur@MdPvvnl@pvvnlhapur@PVVNLHQ@1912PVVNL@myogioffice@CMOfficeUP@ChairmanUppcl टाउन और ग्रामीण कृषि की सप्लाई एक साथ चल रही हैं। जिससे मशीन का लोड 190एम्प + जा रहा है। जिससे कि ना ग्रामीण सप्लाई चल पा रही हैं और ना कृषि की।
2 दिन से यह समस्या हैं।
कृषि की लाइन के खम्बे टूटे पड़े हैं।
इस कारण ग्रामीण पर कृषि लाइन जोड़ रखी हैं।
��ृपया उचित कार्यवाही करें।
नेहरू के समय PR नहीं था, लोगों का mind hijack नहीं होता था, freebies का लालच नहीं था|
freebies का स्वरूप अलग था।आज की तरह सीधे खाते में पैसे, मुफ्त बिजली या गैस जैसी योजनाएं कम थीं|
नेहरू के दौर में सोशल मीडिया, 24×7 न्यूज़ चैनल और डिजिटल प्रचार नहीं था|
नेहरू के सामने क्या था? (1947–1964)
देश अभी-अभी आज़ाद हुआ था।
साक्षरता लगभग 18% थी।
औसत आयु करीब 32 वर्ष।
उद्योग नगण्य, विदेशी मुद्रा कम।
विभाजन, शरणार्थी संकट, रियासतों का एकीकरण।
सड़क, बिजली, विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक संस्थान लगभग शून्य से बनाने थे।
इसलिए नेहरू ने:
IIT, AIIMS, बड़े बांध, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों पर ज़ोर दिया।
एक औद्योगिक आधार खड़ा करने की कोशिश की।
मोदी के सामने क्या था? (2014–वर्तमान)
दुनिया की सबसे तेज़ इंटरनेट क्रांतियों में से एक।
बड़ा घरेलू बाज़ार।
मजबूत निजी क्षेत्र।
वैश्विक निवेश आकर्षित करने की क्षमता।
युवा आबादी (Demographic Dividend)।
पहले से स्थापित संस्थान और बुनियादी ढांचा।
इसलिए सवाल यह नहीं कि मोदी ने नेहरू से बेहतर किया या नहीं।
सवाल यह है कि 2025-26 में भारत को और क्या करना चाहिए था या कर सकता है?
नेहरू ने भारत की नींव रखी।
आज की सरकारों का काम उस नींव पर दुनिया की सबसे मजबूत ���मारत खड़ी करना था।
2026 में बहस यह नहीं होनी चाहिए कि नेहरू बनाम मोदी कौन बेहतर था।
बहस यह होनी चाहिए कि भारत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और शोध में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों के बराबर क्यों नहीं पहुंच पाया।
पेट्रोल,डीज़ल,रसोई गैस और सीएनजी के बाद अब उत्तर प्रदेश में बिजली 10 % महंगी हो गई है।ज़्यादा परेशानी वाली बात नहीं है,अगर आपका बिल 1000 ₹ आता है तो अब 1100 ₹ आएगा।5000 ₹ आता है तो 5500 आएगा।इतना तो देश 🇮🇳 के प्रति आपका भी फ़र्ज़ बनता है।
- भारत के प्रथम प्रधानमंत्री
- अपनी 98% संपत्ति दान कर दी
- पहला पंचवर्षीय योजना मॉडल लागू किया
- IIT, IIM, AIIMS, ISRO जैसी संस्थाओं की नींव रखी
- आधुनिक भारत के शिल्पकार
- जीवनभर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति नहीं की
- वैज्ञानिक सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया
पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धा���जलि। 🙏
वित्त मंत्री से महंगाई नहीं संभल रही,
गृह मंत्री से मणिपुर नहीं संभल रहा…
शिक्षा मंत्री से पेपर लीक नहीं संभला,
पर्यावरण मंत्री से प्रदूषण नहीं संभला…
रेल मंत्री से रेल हादसे नहीं संभलते,
कृषि मंत्री से किसानों की समस्या नहीं संभलती…
स्वास्थ्य मंत्री से अस्पताल नहीं संभलते,
खाद्य विभाग से मिलावट नहीं संभल रही…
और फिर कहा जाता है
देश सही हाथों में है…
#neet2026
मंत्री जी, अफ़सर, सरकार ���ो ये याद रहना चाहिए कि आप लोग जनता के लिए हैं….
जनता के चुप रहने का ग़लत मतलब निकालना अब बंद कर दीजिए
मुंबई में मंत्री जी तो महिला के अधिकार के नाम पर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन ट्रैफ़िक जाम में महिला फंसी और बोलना शुरू किया तो किसी के पास कोई सही जवाब नहीं था
बहुत बड़ी राहत की खबर: आखिरकार सोनम वांगचुक जोधपुर जेल से 170 दिन बाद होंगे रिहा
गृह मंत्रालय ने कहा: सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत मिली शक्तियों का इस्तमाल करते हुए सोनम वांगचुक की हिरासत को फ़ौरन रद्द करने का फैसला किया है.
केंद्र सरकार का फैसला ऐसे समय में हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की उस याचिका पर सुनवाई हो ��ही है जिसमें वांगचुक की हिरासत को चुनौती दी गई है. मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को है.
नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) बहुत कड़ा और खतरनाक कानून है. कोर्ट से लगातार रिपोर्ट आ रही थीं कि उन पर लगे आरोप आधे अधूरे और सच से बहुत दूर हैं.
👉🏾 सवाल है फिर सोनम कर क्यों लगा NSA? और इतना गंभीर आरोप लगा तो क्यों हटा लिया गया? सरकारें इसका इस्तेमाल सिर्फ़ राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक विरोधि���ों, एक्टिविस्टस और आलोचकों को चुप कराने के लिए करती हैं. इसमें बिना औपचारिक आरोप के 12 महीने तक की हिरासत की इजाज़त है. इस कानून पर नए सिरे से सोचा जाना चाहिए और न्यायालयों को ज़ोरदार और असरदार तरीके से इसमें दखल देना चाहिए
दूसरा, ज़ोर-ज़ोर से TV पर 'गद्दार है सोनम', 'देशद्रोही है सोनम' चिल्लानेवालों की क्या कोई सजा होगी या उन्हें कोई निर्देश दिया जायेगा?
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सच परेशान हो सकता है, पराजित नहीं.
इतनी दयनीय स्थिति कैसे बनी हमारी? ये हो क्या रहा है?
तीन बातेंः
अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लेंडौ ने दिल्ली में कहा, हम भारत के साथ वो गलतियां नहीं दोहराएंगे जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थीं, मतलब 'आप सभी बाजारों को विकसित कर लेंगे और फिर दे���ते ही देखते आप हमें ही पछाड़ देंगे'
👉🏾 हद है अमेरिका हमारे घर में ऐलान कर रहा है कि हमको आगे बढ़ने नहीं देगा. इतनी हिम्मत कैसे हुई इसकी? वैसे क्या ये मान रहा है कि चीन ने इनको पछाड़ दिया है?
विदेश मंत्रालय भी इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन में शामिल.
दूसरा, अमेरिकी आर्थिक सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका भारत को 30 दिनों के लिए अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की 'अनुमति' दे रहा है. ये ��ूट सिर्फ़ समुद्र में फंसे रूसी जहाजों पर लागू होगी जो 5 मार्च तक लोड किए गए और भारतीय रिफाइनर को 3 अप्रैल, 2026 तक डिलीवरी लेने की अनुमति देती है.
👉🏾 हैं कौन ये? शर्त के साथ, ये हमें देंगे अनुमति. भाषा देखें, वो कैसे General License दे रहे हैं? हम अमेरिका के ग़ुलाम हैं क्या? फोटो देखें, पढ़कर आँखें लाल हो जाएंगी. हमारी संप्रभुता कहां गई और क्यों?
तीसरी, भारतीय जलक्षेत्र के पास ईरान के निहत्थे युद्धपोत को अमेरि��ी पनडुब्बी ने डुबो दिया. उसने भारत को इसकी सूचना तक नहीं दी, जो इस क्षेत्र में उसका 'net security partner' है. जहाज भारतीय नौसेना के अभ्यास में हिस्सा लेकर अपने देश लौट रहा था.
👉🏾 ये तो बेहद शर्मनाक है. अमेरिका को मालूम था वो हमारे मेहमान हैं फिर भी उसने किया हमला. Geneva Convention के मुताबिक़ naval conflict में शामिल पक्षों को, ये देखे बिना कि वो किस तरफ़ हैं, घायलों, बीमारों और जहाज़ दुर्घटना में फंसे लोगों की तुरंत खोज और देखभाल करनी चाहिए. यहां अमेरिकी भाग लिए.
क्या है उन फ़ाइलों जिसकी वजह से ये गत हो गई है हमारी? ऐसा क्या है?
👉🏾 Trump पर जो ताज़ा जानकारी आई है उसको तो लिखना मुश्किल होगा. बच्चियों का बलात्कारी है वो.
अमेरिका ने भारत पर कृपा कर दी है।
अमेरिका ने कहा है कि,हम भारत को एक महीने के लिए रूस से तेल ख़रीदने की अनुमति देते है।उनके कहने का तात्पर्य है कि हम भारत पर टैरिफ़ नहीं लगाएँगे क्योंकि अनुमति हमने दी है।बहुत शुक्रिया ट्रंप अंकल 🙏
पूरे भारत में करीब 93,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं और उसमें से 31,000 स्कूल तो मध्य प्रदेश में ही बंद किए गए हैं.
जब पढ़ेगा ही नहीं ��ंडिया तो सवाल कैसे पूछेगा इंडिया?
जब सवाल ही नहीं पूछेगा इंडिया, तो दब्बू बन के बैठा रहेगा इंडिया !
मोदी सरकार शांति बिल लाई। इसमें कहा गया कि अब परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर भी काम करेंगे।
इधर बिल आया, उधर अडानी एटॉमिक ���नर्जी लिमिटेड कंपनी बनकर तैयार है।
कानून और संविधान बदल बदल कर नए नए क्षेत्र अडानी को सौंपे जा रहे हैं।
मोदी सरकार में प्राइवेट का भी मतलब अडानी होता है और विकास का भी मतलब अडानी ही होता है ।
PRIVATE SCHOOL FEES LOOT
दुखद सच्चाई है कि सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाना लोगों के लिए एक मजबूरी जैसा है। स्कूलों की हालत ख़राब है। इसी बात का फ़ायदा ज़्यादातर प्राइवेट स्कूल उठाते हैं।
ये स्कूल मनमर्ज़ी की फ़ीस लेते हैं। हर साल फ़ीस बढ़ाते हैं, अनाप-शनाप फंड के पैसे फ़ीस में जोड़े जाते हैं। किताबें-कॉपी-जूते-ड्रेस सब स्कूल ब���चता है। माँ-बाप ज़मीन-गहने बेचकर बच्चों को पढ़ाते हैं
हमें सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मज़बूत बनाना होगा और ये प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगानी होगी।
बहुत सिंपल लॉजिक है,
इंडिया और बांग्लादेश अपना टेक्सटाइल अमेरिका में बेचते हैं,
टैरिफ के अनुसार,
अगर इंडिया का टेक्सटाइल शिपिंग चार्ज मिलाकर 100 रुपए क��� पड़ता है तो,
अमेरिका के लोगों को वो 118 रुपए में पड़ेगा (18% टैरिफ की वजह से)।
लेकिन बांग्लादेश पर टैरिफ 0% होने के कारण अमेरिका के लोगों को 100 रुपए में ही पड़ेगा।
इस तरह से अमेरिकी लोग सस्ता खरीदने की तरफ जाएंगे,
और फिर इंडिया का टेक्सटाइल कम बिकेगा,
कम बिकेगा तो कम बनेगा,
कम बनेगा तो नौकरियां जाएंगी।
In Parliament, I explained why India must put land & property records on BLOCKCHAIN.
Land records in India are in utter chaos. Ordinary citizens are made to run from pillar to post at registrar offices, while dalals and middlemen capture the system. Circle rates are exploited to fuel cash deals, property tax leakages continue, fake documents and encroachments multiply, and disputes over title never end.
The numbers tell the story:
• 66% of all India’s civil disputes are land disputes.
• 45% of properties lack a clear title.
• 48% are already under dispute.
• India ranks 133 out of 190 in property registration efficiency.
• Even a simple property sale can take 2 to 6 months. When disputes arise, civil courts take 7 years on average to resolve them.
• And 6.2 crore property documents are still pending digitisation.
That is why I argued in Parliament for a National Blockchain Property Register. Time stamped, tamper proof, fully transparent. It can make title verification instant, and ensure every sale, mutation and inheritance is recorded cleanly and traceably in realtime.
Countries like Sweden, Georgia and the UAE have shown what is possible. Transactions can finish in minutes, and dispute rates fall sharply.
India must move from chaos to clarity. From a land record system that creates obstacles to one that prevents them.
India needs to move towards One Nation, One Medical Treatment, where access to best medical care is available to all, regardless of income or influence.
That is exactly why I questioned the low health allocation in this Budget and demanded a relook in Parliament. In this Budget, health gets around 2% of total government expenditure, roughly ₹1 lakh crore. But the real gap is bigger.
Under the National Health Policy 2017, India committed to spending 2.5% of GDP on public health. In 2026, we are still at around 0.5% of GDP.We are nowhere near our own target.
Other countries understand the value of health spending. Kyonki jaan hai toh jahaan hai. The US spends around 18% of GDP on healthcare, the UK around 12%, Germany around 13%, and countries like Sweden, Netherlands, Denmark, Japan and Spain spend around 10%.
The consequences are visible. Government hospitals are understaffed and under-equipped. Overworked doctors, too few beds, shortages of machines and medicines, and waiting dates that delay treatment.
When families cannot wait, they are pushed to excruciatingly expensive private hospitals. One health emergency then becomes a debt emergency.