@khuchrep पेट के बल लिटाकर घुटने से पीठ को दबाकरके गिरफ्तारी की जाती है और पुरुष पुलिस भी महिलाओं को भी इसी तरीके से गिरफ्तार करते हैं वहां सारा अच्छा कानून अच्छे लोगों के लिए है अपराधी के साथ पूरी सख्ती होती है यहां तो दुर्व्यवहार याद आ जाएगा
@khuchrep आप तुलना करते हैं पश्चिम के देशों की पश्चिम के देशों में कभी सार्वजनिक स्थल पर गिरफ्तारी का वीडियो देखे तब आपको समझ में आएगा कि मानवाधिकारों का कितना अनुपालन होता है पश्चिम के देशों में पुलिस के पास कितने सारे संसाधन हैं पश्चिम के देशों में मानवाधिकार सिर्फ अच्छे लोगों के लिए है
@khuchrep सड़क पर एक्सीडेंट हो जाता है लोग वीडियो बनाते रहते हैं उसकी सहायता तक नहीं करते कोई, और याद करते हैं पुलिस को, समाज ने भी तो अपनी मानवीयता अपनी संवेदना को खो दिया है और आप पुलिस से सारे मानवीयता और संवेदना की उम्मीद रखते हैं बतौर एक बौद्धिक विचारक क्या यह संभव है
@khuchrep सारे डिपार्टमेंट का काम पुलिस को सौंप दिया है जमीनी विवाद हो पुलिस, रोड पर गड्ढा में तो पुलिस, परिवहन विभाग का काम पुलिस, फायर डिपार्टमेंट का काम पुलिस, पुलिस अपना मूल काम कहां कर पा रही है पुलिस का मूल काम सिर्फ अपराध नियंत्रण और अपराधों की जांच है
@khuchrep एक चीज और भी है जब कोई चीज पुलिस से आसान पुष्टि में होती है तो वह सार्वजनिक पटल पर आती है जो लोग पुलिस से अपना काम करवा लेते हैं संतुष्ट जब कोई चीज पुलिस से आसान पुष्टि में होती है तो वह सार्वजनिक पटल पर आती है जो लोग पुलिस से अपना काम करवा लेते हैं संतुष्ट रहते हैं
@khuchrep और सबसे मूल बात अगर आप पुलिस की व्यवस्था से असंतुष्ट हैं तो पुलिस में परिवर्तन कराये वह करना है नेताओं को इस देश की संसद को विधायिका को उसके लिए आप लोग काहे नहीं प्रयास करते
@khuchrep अपना मामला फंसता है तो लोग सोचते हैं कि सामने वाले को तत्काल बीच चौराहे पर सूली पर लटका दिया जाए अपने खिलाफ कोई बात होती है तो कोर्ट कचहरी नियम कानून मानवाधिकार सबूत और पुलिस का दुर्व्यवहार सब कुछ याद आता है
@khuchrep अभी लखनऊ में पुलिस में परिवर्तन को लेकर एक कांस्टेबल ने आवाज उठाई थी आपके हैंडल से एक भी ट्वीट उसके लिए नहीं होगा तो समस्या यह भी तो है हमारा विरोध और समर्थन सब सिलेक्टिव है अपना काम बने तो समर्थन अपने खिलाफ कार्यवाही हो जाए तो विरोध
@khuchrep समाज में कुछ लोग बहुत अच्छे हैं कुछ बहुत बुरे हैं कुछ लोग मध्य में हैं वही स्थिति पुलिस में भी है शासन की व्यवस्था से बधने के बाद नियम कानून से चलना पड़ता है और रिफॉर्म के लिए आप ही लोग कहां आवाज उठाते हैं आपका पर्सनल मामला कानपुर में फंसा तो आपने बहुत सारे ट्वीट किया
@khuchrep जैसा समाज है वैसी पुलिस है हो सकता है पुलिस में 10% 20% लोग गलत हो समाज में भी यही रेशियो है यदि सारे लोग अच्छे होते तो पुलिस कोर्ट कचहरी की जरूरत ना पड़ती और हत्या लूट डकैती बलात्कार चोरी पारिवारिक संबंधों में अश्लीलता जमीन के लिए भाई-भाई का गला काटना इसी समाज का काम है
@khuchrep इसलिए पुलिस मोहरा है जैसा आदेश मिलता है वैसी कार्यवाही करनी पड़ती है ना करने पर पुलिस के खिलाफ भी लाइन हाजिर सस्पेंशन बर्खास्त की मुकदमा सारी कार्यवाही हो रही हैं फिर उत्तर प्रदेश में ही करीब 4 लाख पुलिसकर्मी हैं यह लोग मंगल ग्रह से नहीं आए हैं इसी समाज का हिस्सा है
@khuchrep पुलिस के पास पीड़ित और शोषक आते हैं यदि पुलिस पूर्ण ईमानदारी से भी अपना काम करेगी तब भी एक ही पक्ष संतुष्ट होगा यानी की 50% ही संतुष्टि होगी सब को संतुष्ट करना संभव है दूसरी बात पुलिस की कार्यप्रणाली अंग्रेजी कानून से संचालित होती है पुलिस की बागडोर शासन तंत्र के हाथ में है
@khuchrep पुलिस से सहमति असहमति, पुलिस के खिलाफ होना एक बात है जितने काम पुलिस करती है इसी काम को कोई अन्य कपड़ा पहनकर किसी अन्य डिपार्टमेंट से कराया जाएगा लोग उसको भी उतनी ही गाली देंगे क्योंकि पुलिस का जनता से डायरेक्ट टच है और पुलिस से अच्छे आदमी का साबका नहीं पड़ता
@khuchrep पुलिस में आए बिना पुलिस की कार्यप्रणाली को समझा नहीं जा सकता बाहर से पुलिस का ढांचा जैसा दिखता है अंदर से वैसा बिलकुल नहीं है पुलिस रिफॉर्म करना नेताओं के हाथ में है पुलिस के हाथ में नहीं है पुलिस में रिफॉर्म क्यों नहीं हो रहा है यह बात लोगों को अपने सांसद विधायक से पूछनी चाहिए
@ramji3789@dbabuadvocate जो दरोगा विवेचना कर रहा है उससे पूछिए एक कांस्टेबल को एक सब इंस्पेक्टर के बारे में क्या जानकारी होगी कि उसके द्वारा कौन से मुकदमे की विवेचना में क्या किया जा रहा है जिससे संबंधित है उसे मिलिए या थाना प्रभारी से मिलिए हर जगह वीडियो बना कर तुर्रम खां बनना है चिल्ला खुद रही है
@mohitgu33014453@jeetusp तुम तो गाली गलौज पर उतर आये अभी पोस्ट का यू.आर.एल. लेकर कंप्लेंट दर्ज करूं तो माफी मांगते नजर आओगे.....वैसे तैयार रहो.....अपशब्द स्वीकार नहीं है.....