बीएमएचआरसी मे��� 3 मई को "रचनात्मक लेखन का विवेक एवं लेखन की दृष्टि 'और इन सब के बीच' के संदर्भ में" विषय पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार श्री राजेश जोशी ने रचनात्मक लेखन के विवेक पर विचार रखे, जबकि डॉ ��रुणाभ सौरभ ने लेखन की दृष्टि को समकालीन संदर्भों से जोड़ा।
श्री रामप्रकाश त्रिपाठी ने डॉ नेहल शाह के कविता संग्रह ‘और इन सब के बीच’ का समीक्षात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया, वहीं श्री अंशु कुमार चौधरी ने इसके समकालीन साहित्यिक महत्व पर चर्चा की। कार्यशाला की अध्यक्षता बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ मनीषा श्रीवास्तव ने की।
नई दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले (2025) में बीएमएचआरसी की फिजियोथैरेपिस्ट, डॉ. नेहल शाह के कविता संग्रह "और इन सब के बीच" का लोकार्पण हुआ। इस शुभ अवसर पर हिंदी के प्रतिष्ठित कवि और आलोचक उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. नेहल की रचनाओं की गहराई और संवेदनशीलता की सराहना की।
दोस्तो,
आगामी शनिवार, 7 तारीख को ��थाकार स्वयं प्रकाश जी की पाँचवीं पुण्यतिथि है।
इस दिन इस पुस्तक का लोकार्पण और परिचर्चा भी होगी, जिसमें Gopal ji, Nam Dev, और Pallav जी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
पहली दफ़ा यह बातचीत प्रभाकर प्रकाशन में कर रहे हैं। आइए, चाय के साथ बैठा जाए।
#WATCH | Drone visuals from the Singhu border in Delhi where security arrangements have been stepped up by police ahead of the farmers' call for march to Delhi on 13th February.
"भारत में साहित्यिक जीवन निराशाजनक है। पाठकगण परवाह ही नहीं करते। आप अपने दिल को फाड़कर रख दें, परन्तु पाठकगण के कानों पर जूँ नहीं रेंगती।...लचर किताबें तो एकदम बिक जाती हैं। मेरी किताबों की प्रशंसा तो होती है, परन्तु ये ख़रीदी नहीं जातीं।"
~प्रेमचंद, 1928
‘बहुत सारे लोग उस धन को खर्च करते हैं जो उनका कमाया नहीं होता, ऐसी चीजों को ख़रीदते हैं जिनकी उनको ज़रूरत नहीं होती, ऐसे लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं जिनको वे पसंद नहीं करते।’
-विल रोजर्स
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'कुछ किताबें हमें सपने देखना सिखाती हैं, कुछ यथार्थ से ��मारा सामना करवाती हैं, लेकिन जो बात सबसे अधिक मायने रखती है वह यह कि लेखक ने किताब किस ईमानदारी से लिखी है।'
-पाउलो कोएल्हो
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‘धीरे-धीरे'—
मुझे सख़्त नफ़रत है
इस शब्द से।
धीरे-धीरे ही घुन लगता है
अनाज मर जाता है,
धीरे-धीरे ही दीमकें सब-कुछ चाट जाती हैं
साहस डर जाता है।
धीरे-धीरे ही विश्वास खो जाता है
संकल्प सो जाता है।
~सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
Heartiest congratulations!
This book will shed light on Subhash Chandra Bose's life with a different perspective.
Wishing you all the best for your future endeavours!
Rise high, shine bright.