कई बेरोजगार एवं अयोग्य युवा संघ के कार्यालय नागपुर में हाजिरी लगाते लगाते कॉलेजियम के माध्यम से बिना परीक्षा दिए देश के उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में न्यायधीश बने बैठे है..
#BanCollegium
Respected sir maybe there was a communication issue but the way I remmeber the last 3 questions of my cross examination this evening -
Do you feel remorse - No
Are you sorry about what you said- No
If you tender an unconditional apology this matter will be looked at differently - No I can’t as the apology would not be sincere. Also it would set a terrible precedent for other artists & their freedom.
प्रधानमंत्री को इस पर जवाब देना चाहिए ।विपक्ष को पूछना चाहिए। विश्व गुरु के बारे में यह कैसे बात कर रहे हैं? अफसोस। ट्रंप को खुश किया जा रहा है? भारत को इसकी निंदा करनी ही चाहिए।
भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं।
इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है।
सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है।किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है।
यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है।
सवाल उठते है— पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है?
मुख्यमंत्री @myogiadityanath को याद दिलाना ज़रूरी है—
1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं।
2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है।
3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा।
इसका साफ़ मतलब है—संविधान सर्वोच्च है—कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता।
जय भीम,जय भारत,जय संविधान,जय विज्ञान
@UPGovt@CMOfficeUP@dgpup
ये है SIR का खेल 👇
जयपुर में BLO न वोटर के घर गईं, न फॉर्म दिया, फिर भी वोटर और उसके परिवार का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया।
SIR में टारगेट कर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। कारण पूछने पर झूठ बोला जा रहा है।
वोट का अधिकार छीनना संविधान पर हमला है- ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हर संघर्ष में साथ रहने वाले, शानदार शख्सियत एवं बृहद व्यक्तित्व के धनी समाजवादी लोहिया वाहिनी के प्रमुख महासचिव अधिवक्ता अमरेंद्र आर्य जी को जन्मदिन की मुबारकबाद...
उत्तर प्रदेश में जंगलराज : बेटियां घरों में भी सुरक्षित नहीं
देवरिया की शालू चौरसिया के रूम के दरवाजे को जबरदस्ती तोड़ कर घुस गये और शालू और उसके भाई को मारने पीटने लगे. गंदी गंदी गालिया दी. पिछले 4 दिनों से थाना मड़ियांव लखनऊ पर शालू चौरसिया रोज FIR लिखवाने जाती है, पर पुलिस FIR तक नहीं लिख रही है. क्या शालू चौरसिया को न्याय मिलेगा? PDA परिवार पर ये अत्याचार अब नहीं सहा जाएगा.
इनसे इससे ज्यादा समझदारी की उम्मीद कोई करता है क्या?
मूर्ख से तर्क करना, अपने चेहरे पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है. मच्छर मरे या न मरे, खुद को चांटा लगने की आंशका हमेशा रहती है.