जो अकेले कमरे में आँसू बहाना जानता है वो अपने आँसू पोछना भी जानता है जैसे कुछ हुआ ही नहीं.. लगता है कभी बाहर ही ना आऊ इस कमरे से.. एक समय के बाद मन निराश हो जाता है ये कमरे के भीतर और बाहर की दुनिया के बीच नाटक से
बे-क़रारी सी बे-क़रारी है
वस्ल है और फ़िराक़ तारी है
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
बिन तुम्हारे कभी नहीं आई
क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है
उस से कहियो कि दिल की गलियों में
रात दिन तेरी इंतिज़ारी है
- जौन एलिया 🌸
@cmohry@NayabSainiBJP 2016 से इंतजार से computer scince pgt की भर्ती निकली है hkrn में,उसी में htet 2016 वाले शामिल नहीं किया,cm महोदय 2016 htet वाले स्टूडेंट को शामिल करने का कष्ट करें। और 8 साल के इंतजार के बाद ये सिला मिला है सरकार से।9813491912
बाबूजी के बाहर जाने पर
मां कभी किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती
खुली छोड़ देती हैं सांकल
कभी कभी बाबूजी
कुछ दूर जाकर लौट आते हैं
कहते हुए कि कुछ भूल गया हूं
और मुस्कुरा देते हैं दोनों
मां ने सिखाया
किवाड़ की खुली सांकल
किसी के लौटने की एक उम्मीद होती है!
• प्रियांशी @priyanshi599
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स्वार्थी बन जाओ ,
अपने सुख की तरह
अपना दुःख भी किसी को मत दो
उसे सहो ,
जैसे चेहरे पर जेठ की धूप सहते हो
चिलचिलाती धूप में बार बार बंद होती पलकों
और उन्हें खुला रखने के प्रयास में देखो
अंधकार और प्रकाश , कितने पास पास हैं.....
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पायल
२-३-२०२२
@sarita_dangi1 कुल धरती पर न ..
71%खारे पानी से भरे समंदर है
तुम्हें फिर भी क्यों लगता है
तुम्हारे आंसुओ के लिए
कहीं कोई जगह बाकी है..!!
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मुस्कुराओ कि ,..रौशनी की जरूरत है
@SaritaTrivediR1
सुंदर तो तुम हो
बिल्कुल उत्तरकाशी की तरह
जिसे देखने के बाद
मुझे कुछ और सुंदर नहीं दिखा
तुम्हे देखकर मैंने अपनी आंखों को
सुंदरता का मतलब भी बताया
ओर तुम्हारी सुंदरता से मैंने
खुद को थोड़ा सा सुंदर भी बनाया।
- प्रियांशी सिंह
@Priyanshi9935