Buon compleanno al mio amico @narendramodi, a cui auguro salute, energia e successo.
Italia e India continuano a rafforzare il loro profondo legame di amicizia, costruendo insieme un futuro di cooperazione e prosperità per le nostre Nazioni.
At least once every person in NCR would have visited Connaught Place. I need your advise:
1. Can we make inner circle of CP vehicle free?. People can walk around freely like on some mall roads or central areas in foreign cities.
2. Should we do it for full day or do it from 6 pm to midnight in summers and 11 am to 4 pm in winters?
3. Some different timing for weekends?
4. What kind of activities would you prefer in Central Park and inner circle during no vehicle slots.
Positive suggestions would be appreciated.
If the choice was between death or becoming a sex slave for conquerors and a concubine in their harems, several women chose former. Some women may choose latter. However, they used their agency- whether one agrees or disagrees with can be debated but it was a choice. A choice that a woman made.
Deal with it.
सुबह उठते ही विद्यालय की तैयारी में लगे बच्चे के पास इतना समय भी नहीं होता कि वह भगवान जी के समक्ष एक अगरबत्ती जलाकर खड़ा हो जाए। उसे
"कराग्रे वसते लक्ष्मीः,करमध्ये सरस्वती!
करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते करदर्शनम्॥"
श्लोक याद करा दो तो उसके पास समय नहीं कि वह इसे दोहरा ले। वह इसके प्रभाव को कभी अनुभूत न कर सकेगा। उसके पास सूर्य नमस्कार करने का समय नहीं है। व्यायाम करने का समय नहीं है। जो पाठ उसे सीखना है, उसे देखने का समय नहीं है। कोई खेल खेलता है तो उसके अभ्यास का समय नहीं है।
बच्चा उठता है और जल्दी जल्दी हॉर्लिक्स अथवा चौकोस मिला हुआ दूध पीता है। यही उसका नाश्ता है। पौने छह बजे बच्चा खाए भी तो क्या? जल्दी जल्दी उसका टिफिन रेडी होता है और वह लेकर विद्यालय चला जाता है।
जिन बच्चों को खिलाने में मां, दादी नखरे उठाती हैं और संतान सुख प्राप्त करती हैं, उन बच्चों को एक डिब्बे में रोटी/परांठा ठूंस कर थमाकर भेज दिया जाता है। वह जाने कैसे खाता है, जाने कैसे भोजन मंत्र करता है, किसी को नहीं पता!
इसलिए सुबह सुबह विद्यालय भेजने का यह तरीका अपसंस्कृति का परिचायक है। यह ऐसी पीढ़ी का निर्माण कर रही है जिसने जीवन जीने का सुसंस्कृत ढंग नहीं जाना।
मैं कहूंगा कि सुबह के शिफ्ट में 7:00-2:00 बजे तक के विद्यालय की टाइमिंग बंद करो! बच्चों से उनका बचपन और सीखने का समय न छीनो।
और हाँ, कोचिंग बंद करो।
#SchoolEducation
Situation of many Public Toilets / Community toilets in NDMC area is not satisfactory. It needs lots of improvements. Will take time to deal with this but will be done. Have already started working on this for putting a system in place. @tweetndmc
जो वकील अपने चैंबर में जज बनाने के लिए कुख्यात है, वो भोंसड़ीवाला भी मर्यादा पर ज्ञान चोद रहा है। लाल जंघिए में आर्गुमेंट करने वाले लोग, जिनके इनकम टैक्स के पेपर दीमक चर जाते हैं, वो साले मोरेलिटी का हमें ज्ञान देंगे?
साले सही पैसे दूँ तो रिरियाता हुआ ‘जी सर’ बोल कर तू मुझे डिफेंड करने आ जाएगा।
पुनः कहूँगा, जिन हराम के पिल्लों को लगता है कि मेरी (या किसी भी व्यक्ति की) माँ-बहन किसी अनपढ़-गँवार-जातिवादी कीड़े के डिजिटल भोग की विषयवस्तु है, मैं उनकी पिछवाड़े में बाँस डाल कर खड़ा कर दूँगा।
मेरे लिए मेरे परिजनों का सम्मान सर्वोपरि है, और उस पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं। चाहे वो भारत का प्रधानमंत्री हो या अमेरिका का राष्ट्रपति, मुझे झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारी पहचान क्या है।
मैं अपने प्रत्युत्तर में तीक्ष्ण, तीव्र और डिस्प्रपॉर्शनेट ही रहूँगा।
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
—
मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
ये लिखते हुए मेरी आंखों से आंसू बह रहे हैं..अभी आधी ही देख पाई हूं पर सबको #OperationSafedSagar देखनी चाहिए..हमारी पीढ़ी को तो करगिल युद्ध अच्छे से याद है..मुझे याद है हमने 1999 की दिवाली ये सोच कर नहीं मनाई थी कि हमारे शहीदों के परिवारों ने भी नहीं मनाई होगी..लेकिन हमको अपने GenZ Gen Alpha बच्चों को ये सीरीज़ ज़रूर दिखानी चाहिए..ताकि वो समझ सकें कि भारतीय फौज हमारी वजह से नहीं हम भारतीय फौज की वजह से हैं..
@NetflixIndia@jimmysheirgill@_AdilHussain@adgpi@IAF_MCC@indiannavy
सवर्ण होना क्या कोई अपराध है ? पुलिस लाठी मार रही...नेता मुंह मोड़ रहे या फिर गले न उतरने वाले तर्क दे रहे ? मेरा सवाल श्रीमन अखिलेश यादव जी, बहन कुमारी मायावती जी , श्रीमन चन्द्रशेखर जी, आदरणीय आनंदी बेन जी पटेल, आईएएस , आइपीएस, प्रमुख़ अभियंता के परिवारों को आरक्षण क्यों चाहिए ? आरक्षण तो उनको मिलना चाहिए जिनका जीवन 5 किलो अन्न से चल रहा ? आरक्षण समर्थक मेरे मित्र बताये कि क्या हम गलत कह रहे हैं ???
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
आरक्षण के मुद्दे पर जंतर मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे थे। अगर कॉकरोच जनता पार्टी को एक महीने तक प्रदर्शन करने की छूट दी गई, तो इन प्रदर्शनकारियों को एक ही दिन में पुलिस क्यों हटा रही है ?
जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण है तब तक इन्हें जबरन नहीं हटाया जाना चाहिए।
Many Groups including the Cockroach Janta Party got FULL permission to protest at Jantar Mantar. Infact the CJP rightfully got it the SECOND their boy landed at the airport.
So why the discrimination againt the General Category students & youth? Why are they DENIED permission even after applying properly, waiting, begging? One can agree or disagree with them but this is BS!
This is not democracy.
This is open discrimination.
One can absolutely disagree with the #21AugReservationHataoAndolan but they have a right to protest.
@neha_laldas@talk2anuradha@ajeetbharti