मजबूत बनिए क्योंकि इस धरती पर कमजोर लोगों के लिए कोई जगह नहीं है
युद्ध हर कालखंड में हुए हैं और होंगे
राम ने भी युद्ध लड़ा
कृष्ण ने भी युद्ध लड़ा
पोरस ने भी युद्ध लड़ा
बप्पा रावल ने भी युद्ध लड़ा
राणा प्रताप ने भी युद्ध लड़ा
जो मजबूत होगा वहीं जीतेगा
~ब्रिगेडियर शेखावत
"ठीक हूँ" बीमारी का पहला लक्षण है।जो जितना ज़्यादा “ठीक हूँ” कहता है, वो अंदर से उतना ही ठिकाने लगा हुआ होता है।उसे पता होता है कि अगर इसे अपना दुख बताऊं —तो बोलेगा, "पॉज़िटिव रहो,पानी पियो, दादी को याद करो।"इसलिए वो मन में सोचता, "क्या ही बताऊं इस बेवकूफ को?"इसलिए "मैं ठीक हूँ!"
@shri_kys कोई इस मार्ग से अभी गुजरा है और यह भी बताएंगे कि उन लोगों के चलने का दावा मिथ्या है, जिनसे कभी अनुवर्ती को कोई प्रेरणा ही नहीं मिलती। उन महान साधकों की कहानी कुदरत अपनी ही कलम से लिखती है। और ईश्वर स्वयं शिक्षक के रूप में उन लोगों को यह कहानी पढ़ाता है नमन श्री को👏
@shri_kys हर पथिक का यह दावा होता है कि वह चलता है। यात्रा के लिए कष्ट सहन और साधना के लिए उसकी तत्परता भी उसका प्रमाण है परंतु पथिक का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण उसकी राह के पीछे रहे वे पद चिन्ह है, जो समय की बालू रेत पर अनायास ही उभर आते है। वे पद चिन्ह नए आने वालों को बताएंगे, की उनसे पहले
कोई दुःख अथवा शिकायत नहीं है बस ऐसे ही कि मैं कभी किसी के ज़िंदगी में प्राथमिकता नहीं बन पाया। हमेशा विकल्प ही रहा शायद इसलिए क्योंकि जब मैं किसी को अपना समझने लगता हूँ तो उनके लिए आवश्यकता से अधिक उपलब्ध रहता हूँ...इसके परिणामवश मैं उनके जीवन में खास से आम व्यक्ति बन जाता हूँ।