ऐसा जुनून जज्बा मैंने कभी नहीं देखा था अपनी आंखों से देखकर मैं खुद घर गौरवान्वित हुआ अपने समाज पर, इतना यूनाइटेड है लोग।
#BSP_महारैली_सफल_रही#BSP_महारैली_सफल_रही
1.अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल दिनांक 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा, या फिर ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।
2.वैसे ख़ासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व ग़बन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही माँग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा ज़रूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नज़र है।
3.इतना ही नहीं बल्कि बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों से चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के साथ ही,
https://t.co/zbwuw6xrFA की अर्थव्यवस्था व यहाँ के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इज़राइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे ख़ास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहाँ और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
5.अतः देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् ज़रूरत के हिसाब से सभी की ज़िम्मेदारी भी बनती है।
6.साथ ही, इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास ज़रूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें।
7.इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना ज़रूरी है और इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स हेतु संसद का प्रभावी होना ज़रूरी। जय भीम, जय भारत।
2007 में बसपा ने सामाजिक संतुलन और सर्वसमाज को साथ लेकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। 2027 में वही सोशल इंजीनियरिंग का मॉडल फिर नई ताकत के साथ सामने है। बहनजी की राजनीति किसी एक वर्ग नहीं, बल्कि हर समाज के सम्मान, सुरक्षा और विकास की बात करती है।
नाम = पुष्पेंद्र
जन्म = 1999
पिता = इंद्रजीत सरोज
विधायक = 1995 में (4 बार विधायक)
मतलब बसपा ने इनके पिता को 1995 में ही विधायक बना दिया। बकायदा कई बार मंत्री रहे। बसपा ने उंगली पकड़कर राजनीति सिखाई व कई बार विधायक व मंत्री बनाया। अब सपा के विधायक है।।
लड़का कह रहा है कि उसने लंदन में वेटर का काम किया।
अनुसुचित जाति वर्ग की यह ही समस्या है। काहे फर्जी की गरीबी झाड़ते हो। वैसे इसका दूसरा पहलू यह भी है की यूरोपियन कल्चर में सभी पढाई के साथ साथ कोई न कोई कार्य करते है।।
बाबा साहब उस समय के धनी परिवार में जन्म लिए। उनके पिता के पास नौकर वग़ैरह तक थे क्योंकि भारतीय को सेना में मिलने वाले सबसे बड़ी रैंक अथार्त सूबेदार तक पहुच गए थे, रिटायर होने के बाद फाइनेंशियल संस्थान में नौकरी करी। इंहा तक की बाबा साहब के दादा तक सेना में थे। बाबा साहब के नाना तक सूबेदार रह चुके है। बाबा साहब ने वेटिंग फ़ॉर वीजा में लिखा भी है।
बाबा साहब ने एक बार भी नही कहा कि उनका शोषण गरीबी के कारण हुआ। बाबा साहब ने बल्कि बिजनेश भी किया। बाबा साहब की चार सीमेंट की फैक्ट्री थी। लेकिन समाजिक कार्यो व अछूत वर्गों को उनके मानव अधिकार दिलवाने की लड़ाई में अपना 100% समय देने के कारण चल नही सकी। बल्कि यह कहा कि;
"इतने सम्पन्न परिवार में जन्म के बाद भी उन्हें छुआछूत का सामना करना पड़ा"
गरीबी व दरिद्रता का एहसास करवाना "गाँधीवादी विचारधारा" है व "सूट बूट पहनकर" अपने समाज को मनोबल देना यह अम्बेडकरवाद है। अब कुछ नौशिखिया आकर कहेंगे फिर आरक्षण क्यो लेते हो। इसका जवाब है कि बाबा साहब साहब ने पूणा पैक्ट में आरक्षण "गरीबी हटाओ कायर्क्रम" से नही लिया बल्कि एक समाज की उंसके प्रतिशत के आधार पर संसाधनों पर हिस्सेदारी के लिए अथार्त प्रतिनिधित्व के तौर पर प्राप्त किया। इसलिए यह गरीबी अमीरी का कॉन्सेप्ट इंहा नही चलेगा।
इससे समझा जा सकता है कि एससी अंग्रेजी काल की वजह से अगर सामान्य वर्ग से अमीर भी हो जाते थे तब भी उन्हें एक फटीचर इसलिए नीच कह देता था क्योंकि उनके धर्म ग्रन्थों में उसे उच्च माना गया। इसलिए बाबा साहब ने अंत मे;.."
"इन्ही धर्म ग्रन्थों से अपना कनेक्शन पूरी तरह खत्म करके बौद्ध धर्म अपनाया.. जो सैद्धान्तिक भी है। अब आप एससी है, शहर के सबसे अमीर बन गए, लेकिन अगर उसी धर्मिकता को मान रहे है तो आप "if and but" नही कर सकते सीधा आपको मानना पड़ेगा कि एक बन्दा सर्वोच्च वर्ण में जन्म लिया जिसकी नाक बह रही है,, हाथ, मुँह गंदे है, कई दिन से नहाया नही है, उंसके सामने भी झुखकर, नमस्ते करके, उंसके पैर पकड़कर प्रणाम करना पड़ेगा ही। उसे उच्च मानना पड़ेगा ही"
इसलिए बाबा साहब अपनी जिंदगी का सबसे बेहतरीन निर्णय अपनी मृत्यु से पहले यह करके गए कि में इस वाली धर्मिकता को छोड़ता हूँ व समाज आगे यह न कहे कि हमे छुड़वा तो दिया, लेकिन बीच मझदार में काहे छोड़कर गए, इसलिए बौद्ध धर्म अपना लिया। इससे उनका सिद्धान्त व कार्य 100% कसौटी पर पूर्ण हुए.
विकास कुमार जाटव।
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूसरी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह करने आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत्व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., विरोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ख़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तरह से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. व बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित लोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सकता है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्टियों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछाड़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
जब मा० न्यायालय में न्याय 10 साल में मिलता है तो #संविधान पकड़े किस लिए घूमते हो?? न्याय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत् मिलता है? राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले लोगों से सावधान रहिए?? ये लोगों को उकसा रहा है?
चाहे सत्ता में कोई भी पार्टी आए या जाए, मेरी विचारधारा और मेरा विश्वास हमेशा बहुजन समाज पार्टी के साथ रहेगा।
मैं जीवनभर बहुजन समाज पार्टी का समर्पित और कट्टर समर्थक रहूँगा।
जय भीम! जय संविधान! 💙🐘
#BahujanSamajParty#BSP#JaiBhim@Mayawati
जब मा० न्यायालय में न्याय 10 साल में मिलता है तो #संविधान पकड़े किस लिए घूमते हो?? न्याय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत् मिलता है? राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले लोगों से सावधान रहिए?? ये लोगों को उकसा रहा है?
जो मान्यवर कांशीराम साहब के शब्द थे वही बहनजी बोल रही हैं, बाकी भड़काने वाले कल भी भड़का के चले जाएंगे उन्हें सिर्फ अपनी राजनीति चमकानी है, याद रखना,बहनजी जैसा नेतृत्व कभी नही मिलेगा।
जब बसपा सुप्रीमो @Mayawati जी औचक निरीक्षण के लिए अचानक स्कूलों में पहुँच जाती थीं, तो उनके सख्त प्रशासन के डर से शिक्षक समय पर ड्यूटी करने लगते थे और स्कूल की पूरी व्यवस्था एकदम दुरुस्त हो जाती थी। उनके इस कड़े रुख की वजह से कक्षाओं में अनुशासन लौट आता था
1. यू.पी. के अयोध्या में श्री राम मन्दिर के बाद अब उत्तराखण्ड स्टेट में भी बद्रीनाथ धाम चढ़ावा में चोरी व ग़बन आदि होने का मामला काफी सुर्ख़ियों में हैं। इन दोनों विख्यात धार्मिक स्थलों में इनके ट्रस्ट से जुड़े मुख्य प्रबन्धकों की भी सही से जाँच होनी चाहिये वरना फिर आगे चलकर इनकी आड़ में इनके स्थान पर दूसरे बने मुख्य प्रबन्धक भी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। क्योंकि ऐसी आम चर्चा है कि निचले स्तर पर जो भी गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए या तो मुख्य प्रबन्धकों की मिलीभगत है या फिर उनकी लापरवाही की वजह से यह सब कुछ हुआ है। अतः इस प्रकरण की अब सही से जाँच होनी बहुत ज़रूरी है तथा इस मामले में सरकार व एस.आई.टी. को भी विशेष ध्यान देना है।
2. साथ ही सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी आदि के जिन वरिष्ठ नेताओं द्वारा यहाँ (श्री राम मन्दिर) चढ़ावे में काफी मोटी रकम की चोरी व ग़बन आदि होने की बात कही जा रही है तो उनसे भी इसके पुख़्ता सबूत लेने चाहिये, ताकि कोई भी चोरी व ग़बनकर्ता बच ना सके, वरना इसकी आड़ में इसे कोरी राजनीति ही माना जायेगा अर्थात् श्रद्धा नहीं, जो जनहित के मुद्दों को दरकिनार करके, अब इस मुद्दे की आड़ में ये पार्टियाँ चुनाव में जाना चाहती हैं, ऐसी भी आम चर्चा है।
यूपी के जिला मऊ की विधानसभा मुहम्मदाबाद में बीएसपी के टिकट घोषणा कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब।
जनसैलाब ने साफ-साफ सन्देश दे दिया है कि सन 2027 में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनेगी।
आदरणीया बहन जी आ रही हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
कल सहारनपुर मे बसपा 💙
बसपा का सहारनपुर में अच्छा खासा प्रभाव है वहां का दलित वोटर बसपा को एक मुश्त होकर वोट करता है और यहाँ बसपा ने मेडिकल कॉलेज मल्टीस्पेलिटी हॉस्पिटल आदि बनाकर बहुत विकास किया हैं अगर इस बार मुस्लिम वोटर बसपा की तरफ़ गया तो बसपा की सहारनपुर में बड़ी वापसी होगी
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
2027 में बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी एक बार दोबारा बनने जा रही है इस अंधी को अब कोई नहीं रोक सकता पूरा रूख बदल चुका है उत्तर प्रदेश का सभी बहन जी के कार्यकाल को याद कर रहे हैं | जय भीम जय बसपा मान्यवर काशीराम साहब अमर रहें बहन कुमारी मायावती जी ज़िंदाबाद