सितम है साहब…
कुंभ की दूसरी भगदड़ में मारे गए लोगों को मृतकों की लिस्ट में गिना तक नहीं जा रहा है, मुआवजा तो दूर कोई संवेदना व्यक्त करने तक नहीं आ रहा। सुध तो ले लीजिए। ऐसे नहीं आरोप लग रहा कि सरकार आँकड़े छिपा रही है!
ये 1.30 मिनट देखने के लिए साहस चाहिए
Full Report on Lallantop
भक्ति के रंग में रंगल गांव देखा
भगदड़ के संग में चपल गांव देखा
अगल में बगल में चढ़ल गांव देखा
अमौस��� पे लाशन मा बदल गांव देखा
एहू हाथे दबले, वोहू हाथे दबले
कान्ही से लेकर कपार लाय कुचले
संगम पर केहू, झूँसी पे केहू
घटवै पे केहू, अस्पताले में केहू
आजी गोड़ रंगाय के आई रहीं देखा
बब्बा हंसत बोलत बनाय रहें जोड़ देखा
घुंघटवे मा दबाय गई उनकै पतोहिया
गठरी हस मिली लाश का बताई रे भैया
बिखरा मिला लुग्गा और पूड़ी
रामायण के संगे रही जउन मँड़ुआ के डूंढ़ी.
चाउर आ चिउरा हस इंसान बिखरे चारों ओरी,
नयक��� चपलवा उठल बुलडोजर ओरी.
मचल रहले हल्ला, बचावा…बचावा
खचाखच केहू तो निकाला-निहारा
एहर गुर्री-गुर्रा, ओहर लुर्री-लुर्रा,
आ बीचे में हउवे प्रशासन के सुर्रा
चपायल रहले केहु, दबायल रहले केहू,
घंटन तक भगदड़ ��िपायल रहले केहू
सबै हक्का-बक्का, केहू लाल-पियर,
केहू फनफनात हउवे झूंसी के नियर.
बप्पा रे बप्पा, आ दईया रे दईया,
तनी हम्मे सच तो बताय देता भईया.
मगर ससुरे अफसर टसकले ना टसके,
टसकले ना टसके, मसकले ना मसके
छिड़ल है 144 साल वाली चरचा
नंबर कम बताय के दबाय वाली चरचा
साज़िश के एंगल बतावत है केहू
चरण वंदना मा सच छुपावत है केहू
अमौसा के मेला….अमौसा के मेला
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आओ इस लम्हः-ए-पुरनम में
हाथ बँट���ओ मेरे ग़म में
हम दीवाने बाज़ न आये
फिर जा उलझे पेचो-ख़म में
अब तो ज़ख़्म सुकूँ देते हैं
अब क्या रक्खा है मरहम में
उस ज़ाहिर को कम मत समझो
हम काफ़ी ज़्यादा थे कम में
अपने होने का रोना है
सारे शामिल हैं मातम में
इश्क़ इबादत वहशत नफ़रत
आम हैं ये क़िस्से आदम में
जाने वाले ख़ुद को ले जा
छूट गया पीछे तू हम में
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डॉ.पूनम यादव
बिहार के आरा से सुनीता देवी अपनी मां ललिता देवी को खोज रही हैं। दिन-रात पूरा मेला खोजा, हॉस्पिटल में खोजा कहीं नहीं मिलीं। अब बिना मां को लिए वापस आरा जा रही हैं। आप अगर सिसकियों में दर्द महसूस कर सकती हैं तो महसूस कर लीजिए।
कुंभ में यह नजारा हर 200 मीटर पर मिल रहा। हर कोई अपनों को खोज रहा। निराश है। हताश है।
इन दो कहानियों से हमें यह सीखने को मिलता है कि जीवन में हमारे रिश्तों में बहुत सारी जटिलताएं और विरोधाभास हो सकते हैं। हमें अपने रिश्तों में संवेदनशीलता, समझ और सहानुभूति के साथ व्यवहार करना चाहिए।
नमस्कार साथियों🙏
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देखिए अगर X पर आगे बढ़ना है तो क्वालिटी कंटेंट डालना होगा। स्वयं लिखना होगा। कॉपी पेस्ट नहीं बल्कि ओरिजनल कंटेंट डालना होगा। किसी के जैसा नहीं बल्कि खुद के जैसा बनना होगा।
तो बहुत से लोगों के मैसेज आते है कि मुझे लिखना नहीं आता है। समझ में ही नहीं आता है कि क्या लिखें? कैसे लिखें? किस टॉपिक पर लिखें?
मैं स्वयं तो बहुत अच्छा लेखक नहीं हूं किंतु थोड़ा बहुत लिखना आता है, और अपने उसी अनुभव के आधार पर मैं आप सबको लिखने के कुछ तरीके बता रहा हूं जिसे फॉलो करके आपकी लेखन कौशल में सुधार होगा।
👉 जिस विषय में आपको सबसे ज्यादा रुचि हो उस विषय का अच्छे से अध्यन करें और उसके बारे में कुछ लिखें।
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👉 आप जिस टॉपिक में अपने आपको सबसे ज्यादा सहज महसूस करें उस पर लिखिए लेकिन ध्यान रहे जो भी लिखें उस टॉपिक पर थोड़ी रिसर्च जरूर कर लें और प्रमाणिकता जांच लें।
👉 समय निकालकर अच्छी किताबें जैसे कि इतिहास, राजनीति, दर्शन, साहित्य, महत्वपूर्ण व्यक्तियों की जीवनी एवं आत्मकथाएं पढ़ने की आदत डालें।
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👉 अगर आप हिंदी में लिखना चाहते हैं तो देवनागरी लिपि का ही प्रयोग करें, लेकिन यदि आप अंग्रेजी भाषा में लिखा चाहते हैं तो रोमन लिपि का प्रयोग करें। ध्यान रहे कि हिंग्लिश में लिखने से बचें।
👉 लिखते समय आपकी भाषा औपचारिक हो, और वर्तनी की अशुद्धियां कम से कम हो।
👉 पहले छोटा छोटा लिखन�� शुरू करें, किताबों के रोचक प्रसंग इत्यादि कोट करने की कोशिश करें। बाद में आप स्वयं ही अच्छा, लंबा और बेहतरीन लेखन कर पाएंगे।
👉 अगर किसी विषय को कॉपी ही करना है तो पुस्तकों से कॉपी करें और अपने लेख के नीचे कॉपी का स्त्रोत जरूर लिखें।
👉 ये कभी न सोचें कि हम ज्यादा से ज्यादा पोस्ट करें। दिन में चाहे 2 पोस्ट कीजिए लेकिन रिसर्च करके, प्रमाणिक और औपचारिक भाषा में करें। अगर आप दिन में 2 ही अच्छी पोस्ट करते हैं तो आपको 10 अशुद्ध और अप्रमाणिक पोस्टों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा।
👉 अंत में सबसे बड़ी बात, लिखने के साथ ��ाथ दूसरों को पढ़ना भी सीखें, सुनना सीखें। कुछ लोग पोस्ट को बिना पढ़े ही कॉमेंट कर देते हैं और कुछ आदत से मजबूर लोग इस पोस्ट को भी बिना पढ़े कॉमेंट करेंगे। ऐसे लोगों से यही कहूंगा कि लिखना, पढ़ना, बोलना और सुनना सीखो खाली कॉमेंट कॉमेंट खेलने से कुछ नहीं होगा।
अगर आप इन बिंदुओं को फॉलो करेंगे तो यकीनन ही आपके लिखने के कौशल में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और आप लंबे समय तक X पर बने रहोगे, अपनी लेखन शैली से अपनी अलग पहचान बना पाओगे और अपनी बौद्धिकता को भी और अधिक बढ़ा पाओगे।
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