As part of Karnataka's ongoing efforts to strengthen its digital governance infrastructure, two major technology upgrades will be undertaken over the coming weekend. These include maintenance and infrastructure upgrades at the State Data Centre beginning on the night of 25 June 2026 and the migration of the Karnataka Secretariat e-Office system to a newer platform over 27-28 June 2026.
The State Data Centre supports a wide range of government websites, digital platforms and citizen services. During the maintenance window, some online government services may experience temporary disruption. The work has been scheduled over the holidays to minimise inconvenience while improving system reliability, security and performance.
The Secretariat e-Office system will also undergo a planned upgrade to enhance security and operational efficiency. During this period, only the Secretariat e-Office instance will be unavailable. All other e-Office systems across the state will continue to function normally.
Request citizens to bear with this temporary inconvenience. These upgrades are essential to building a stronger, more secure and efficient digital governance ecosystem and will help us deliver better public services in the years ahead.
@CMofKarnataka
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में बंधुआ मज़दूरी का ऐसा दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
खबरों के मुताबिक, मज़दूरों को बंधक बनाकर रखा गया था। उन्हें मेहनताना देने की जगह भयानक यातनाएं दी जाती थीं। सूखी रोटी और मवेशियों का चारा खिलाया जाता था। धारदार हथियारों और कोड़े से मारा जाता था। कुत्तों से कटवाया जाता था।
यह सिर्फ़ कुछ व्यक्तियों पर क्रूरता नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा पर और हमारे संविधान पर हमला है। मामले में सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जो नज़ीर बने।
आज पीसीसी में जयपुर प्रदेश कांग्रेस द्वारा नेता विपक्ष राहुल गांधी जी के ऐतिहासिक संवाद अभियान #छात्रों_की_गूंज के जन-प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम में शामिल हुआ।
कार्यक्रम में @RahulGandhi जी के संदेश और छात्रों द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण सवालों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया एवं युवाओं के भविष्य, पेपर लीक व परीक्षा प्रणाली जैसी चुनौतियों पर चर्चा की गई।
"छात्रों की गूंज" अब पूरे देश में सुनाई देगी, युवाओं की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
अगर किरोड़ी लाल जी में रत्ती भर भी ईमानदारी होती...
तो किरोड़ी जी कृषि विभाग में उनके नाम से हुई करोड़ों की डकैती और भ्रष्टाचार की जांच के लिए मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखते।
उम्र के इस पड़ाव पर आकर पूरी तरह बेनकाब हो गए। ईमानदारी तब साबित होती है, जब खाद-बीज घोटाले की निष्पक्ष ED से जांच कराई जाती।
ये राम सहाय जायसवाल है - 'साइको किलर'
इसने 4 महीने में 8 लोगों को जहर देकर मार डाला. लोगों को मारने के बाद ये उनके अंतिम संस्कार में जाता और घर वालों से दुख भी जताता.
इंसानों को मारने से पहले राम सहाय ने वो जहर कुत्ते को दिया और उसे मरते हुए देखता रहा. जब कुत्ते पर प्रयोग सफल रहा फिर इंसानों को मारने लगा.
राम सहाय ने बहुत मामूली वजहों से लोगों की हत्या की, जैसे- पुराने चुनावी झगड़े, लोगों के ताने, गाली-गलौज, पत्नी को लेकर शक, जादू-टोने का शक, जमीन का विवाद, कर्ज चुकाने से बचने के लिए. मतलब जो भी अखर रहा था, राम सहाय उसे मार रहा था.
राम सहाय ने चूहे मारने की बात कहकर बोरेक्स पाउडर (सुहागा) खरीदा, फिर ये खूनी खेल शुरू किया.
वो लोगों को शराब पिलाने के लिए बुलाता, फिर शराब में जहर देकर उन्हें मार देता.
कब-कब लोगों की हत्या की👇
• 6 फरवरी: गाली गलौज करने वाला बद्री
• 20 फरवरी: चुनाव में झगड़ा करने वाला बुठालू
• 12 मार्च: पत्नी पर बुरी नजर रखने वाला छत्तु राम
• 20 मार्च: जमीनी रंजिश रखने वाला बुधराम
• 31 मार्च: गाली गलौज करने वाला विनोद
• 28 अप्रैल: जादू टोना करने के शक में गजानंद
• 29 अप्रैल: कर्ज से छुटकारा पाने को चैतुराम
• 14 मई: ताने मारने की वाला महेतरू राम
जब एक ही गांव में इतने लोगों की अचानक मौत होने लगी तो पुलिस को अजीब लगा.
हर मौत में एक पैटर्न बन रहा था कि सभी के साथ आखिरी बार राम सहाय ही था.
पुलिस ने राम सहाय को उठाया और पूछताछ की. पहले तो वो उन्हें गुमराह करता रहा. जब कड़ाई से पूछताछ हुई तो राम सहाय ने सब उगल दिया.
📍छत्तीसगढ़
Israel Deliberately Killed Palestinian Children & Destroyed Their Childhood, Committed War Crimes : UN Inquiry Commission.
As per the report, more than 20,000 Palestinian children have been killed and over 44,000 injured since Oct 7, 2023.
The Commission is chaired by Dr. S Muralidhar, former High Court Chief Justice who is presently a Senior Advocate at the Supreme Court of India.
https://t.co/OcYXirSSYy
BJP is trying so so hard to please the RSS.
People are asking for the accounts of the Ram Mandir in Ayodhya, but the BJP is working overtime to demand the accountability of Lord Buddha in Kalaburagi.
You had five BJP Chief Ministers in Karnataka. Why did none of them act?
Modi Sarkar has been in power for 12 years. If there was wrongdoing, why am I still roaming free and not in jail?
My papers are publicly available and ready to discuss it on any platform.
Now tell us, when will your political masters in the RSS show theirs?
किरोड़ी लाल जी के द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह फर्जी एवं निराधार साबित हो चुके हैं। फिर भी अगर सरकार को लगता है कि किसी ने भी गलत प्रमाणपत्र से नौकरी प्राप्त की है, तो पुन: निष्पक्ष जांच कराए, मुझे किसी जांच से कोई आपत्ति नहीं है।
1999 से आज तक OBC के वही नियम लागू हैं, जो सरकार द्वारा निर्धारित किए गए हैं। जिस 2019 के परिपत्र का हवाला देकर भ्रम फैलाया गया, वो कोई परिपत्र नहीं था बल्कि एक गलत चिट्ठी थी, जिसका 2021 में सरकार द्वारा स्पष्टीकरण देकर RPSC को अवगत करा दिया गया।
लेकिन सवाल ये है कि क्या किरोड़ी जी ने फर्जी आरोप इसलिए लगाए क्योंकि मैं कृषि मंत्री के नाम पर हुई करोड़ों की वसूली का मुद्दा उठा रहा हूं? क्या कृषि विभाग में हुए घोटाले के जवाब में ये फर्जी आरोप मढ़े गए हैं? कृषि विभाग में मंत्री जी के नाम पर चल रहे वसूली के खेल में ACB ने 2.43 करोड़ की बरामदगी की है। मंत्री जी के करीबी पकड़े गए हैं, 1200 छापों की पूरी जांच और इस्तीफा की बात नहीं करते।
आरोप लगाने का अधिकार उसी को है, जो खुद जांच से भागे नहीं। राजनीति की शुचिता तभी बचेगी, जब हर आरोप का जवाब तथ्यों और निष्पक्ष जांच से दिया जाएगा, न कि ध्यान भटकाने के लिए पुराने कागजों की धूल झाड़कर फर्जी आरोप लगाए जाएंगे।
मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी है कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है।
पत्रकार का सवाल: अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य योजनाओं की वर्तमान स्थिति पर आपका क्या कहना है?
जवाब: जैसा कि अभी आप सबके सामने आया है, न तो दवाइयाँ आ रही हैं और न ही कोई सप्लाई हो रही है। आज जनता बेहद दुखी और परेशान है, और योजनाएँ सिर्फ कागज़ों तक सिमट कर रह गई हैं। यह बहुत गंभीर और चिंताजनक मामला है। हमारी सरकार की यह इतनी शानदार स्वास्थ्य योजना थी जिसकी तारीफ़ आज भी पूरे हिंदुस्तान और हर राज्य में हो रही है। शायद दुनिया के किसी भी कोने में ₹25 लाख तक का मुफ़्त इलाज नहीं मिलता, जहाँ एमआरआई, सीटी स्कैन, दवाइयाँ और डायलिसिस सब कुछ मुफ़्त था।
अब आप बताइए कि उसके बाद आज ऐसी बदतर स्थिति क्यों बन रही है? हम जहाँ भी जाते हैं, लोग हमसे शिकायत करते हैं कि अस्पताल वाले इलाज के बदले पैसे माँग रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वर्तमान सरकार से निजी और सरकारी अस्पतालों को समय पर भुगतान (Payment) नहीं मिल रहा है, और इस लापरवाही का हर्जाना वे आम जनता से वसूल रहे हैं। यह भला कौन सा तरीका हुआ? योजना अभी भी लागू है, इसे बंद नहीं किया गया है, लेकिन सरकार से बजट न मिलने के कारण दवाइयाँ मिल नहीं रही हैं और ऑपरेशन ठप पड़े हैं। जब अस्पतालों को सरकार से पैसा नहीं मिल रहा है, तो वे जनता से पैसे माँग रहे हैं। इसमें भला उस गरीब और बेकसूर जनता का क्या दोष है? यह आज का सबसे महत्वपूर्ण और विचारणीय बिंदु है।
पत्रकार का सवाल: कल यमुना जल समझौते को लेकर मुख्यमंत्री जी एक बार फिर दिल्ली गए थे और वहाँ कोई मीटिंग हुई है, इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: यह अच्छी बात है, मैं तो इसका स्वागत करता हूँ। मैंने पहले भी कहा था और आज फिर दोहराता हूँ कि जिस दिन आप राजस्थान में यमुना का पानी ले आएँगे, मैं खुद मुख्यमंत्री निवास पर आकर आपको माला पहनाऊँगा। मैंने नीमकाथाना में भी यही घोषणा की थी कि 'मुख्यमंत्री जी, अगर आप जनता का यह सपना पूरा कर दें, तो मैं खुद आपके घर आकर आपका अभिनंदन करूँगा।' मैं अपने इस वादे पर आज भी पूरी तरह कायम हूँ। लेकिन बात सिर्फ दिल्ली या चंडीगढ़ जाकर बार-बार बैठकें करने से नहीं बनेगी, हमारा सीधा सरोकार ज़मीन पर पानी आने से है, मीटिंगों से नहीं।
पत्रकार का सवाल: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा है कि गहलोत साहब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनके खुद के राज में ज़बरदस्त भ्रष्टाचार हुआ था?
जवाब: नहीं, मैंने आज सुबह अखबारों में उनका बयान पढ़ा, जो कि बेहद अजीब और समझ से परे था। उन्होंने आपत्ति जताई कि मैंने चुने हुए जनप्रतिनिधियों को 'घोड़े और गधे' क्यों कहा। मैं स्पष्ट कर दूँ कि मैंने आम जनप्रतिनिधियों को ऐसा नहीं कहा; मैंने यह शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किए हैं जो बिक चुके हैं या बिक रहे हैं। जो विधायक (MLA) और सांसद (MP) जनता का भरोसा तोड़कर 10 करोड़, 25 करोड़ या 50 करोड़ रुपये में अपनी निष्ठा बेच रहे हैं, उनके लिए मैंने 'बिकने वाले घोड़े, गधे, भैंस और बकरी' जैसे चार शब्दों का प्रयोग किया था।
इसमें भला गलत क्या है? जनता जिन पर भरोसा करके, अपना कीमती वोट देकर उन्हें सदन में भेजती है, वे पैसों के लालच में आकर बिक जाते हैं। आज बंगाल और महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है, वह सबके सामने है। महाराष्ट्र में शिवसेना के 28 में से 20 सांसद चले गए, 80 में से 60 विधायक पाला बदल गए और अभी कल ही 8 में से 6 सांसद और चले गए। ऐसे बिकने वाले लोगों की पूजा तो की नहीं जा सकती! मदन राठौड़ जी दरअसल सिर्फ अपने दिल्ली बैठे वरिष्ठ नेताओं (Seniors) को खुश करने और अपनी नंबरिंग बढ़ाने के लिए इस तरह की बयानबाज़ी का प्रयास कर रहे हैं।
पत्रकार का सवाल: सर, चर्चा है कि केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी मंत्रिमंडल का विस्तार या बदलाव होने वाला है?
मेरा जवाब: देखिए, यह हमारा काम नहीं है, यह पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। लेकिन मैं व्यक्तिगत तौर पर यही चाहता हूँ कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी ही अपने पद पर बने रहें। आजकल मीडिया में लगातार यह चलने लगा है कि 'ये हट रहे हैं, वो हट रहे हैं।' मैं चाहता हूँ कि वे बने रहें; वे एक भले आदमी हैं, व्यवहार कुशल हैं और सभी से बेहद सम्मान के साथ बात करते हैं। ऐसे शालीन व्यक्ति को ही मुख्यमंत्री का पद शोभा देता है और वे विपक्ष के नाते हमें भी सूट करते हैं। 1/2
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के बारे में इतना बड़ा ज़मीन घोटाले और भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ
कितने चैनल पर डिबेट हुआ? 0
कितने चैनल पर हैडलाइन बना? 0
कितने कमांडो वारियर एंकर ने चीख चीख कर जवाबदेही माँगी? 0
किसी मीडिया ने इस बड़े खुलासे का फॉलो किया ? 0
CM मोहन यादव ने अपने परिवार के साथ मिलकर उज्जैन में सैकड़ों एकड़ जमीन खरीद ली।
• वहीं, मुख्यमंत्री बनने के बाद खरीदी गई 168 एकड़ में से 111 एकड़ जमीन उस क्षेत्र में खरीदी जहां सिंहस्थ कुंभ आने वाला है।
• उज्जैन के जिस क्षेत्र में 2035 के मास्टर प्लान के ऊपर काम होना है, मोहन यादव के परिवार ने वहां जमीनें खरीदी हैं।
इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक्शन लेने की उम्मीद नहीं है।
वो विदेश में मेलोडी और देश में झालमु़ड़ी खाएंगे, उनके मुख्यमंत्री जमीनें और दान का सोना-चांदी निगल जाएंगे।
: AICC मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera जी
📍 दिल्ली