प्राइवेट जॉब मे इंसान की कोई Value नहीं
होती है🥲
एक कंपनी में 8,9 से साल काम कर रहा हूँ लेकिन
जो मेरी Salary है उतनी ही जो Fresher आते हैं उनको मिलती है कहीको तो मुझे से भी ज्यादा
ना कोई उनको काम का Experience ना काम आता है फिर भी ज्यादा Salary उन्हें मिलती है ये देखके दुख होता है
और Manager से बात करे वो तो साफ़ केहता है मेरे हाथ मे कुछ नहीं है जो भी हो रहा है वो Sir कर रहे हैं
अब ऐसे मे इंसान करे तो क्या करें अगर Job छोड़ दे तो कब वापिस Job कब मिलेगी इस्का कोई पता नहीं
घर संभाल ना है Emi बरना है ये सब देखके इंसान मजबूरी में भी काम करता है
मुझे पता है ऐसा बहुत लोगो के साथ होता होगा
क्या आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है ?
जब चारों तरफ़ नफ़रती ज़हरीले कंटेन्ट की बाढ़ है तो ग़ाज़ियाबाद का बताया जा रहा यह वीडियो सुकून देता है जिसमें हज के लिए जा रहे लोगों का उनके हिन्दू पड़ोसी माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं।
थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है।
माननीय जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ने इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेकिन हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और साहसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अधिकारों को जानता और इस्तेमाल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
~ साभार: @NCIBHQ
उत्तम नगर में ईद के दिन माहौल ख़राब करने की कोशिश की गई पुलिस के सामने कुछ लोगों ने जय श्री राम के नारे लगाये जिन्हें पुलिस ने तुरंत हिरासत में ले लिया..
#uttamnagar
कोई नारेबाजी नहीं,
कोई लफड़ा नहीं,
कोई DJ नहीं,
कोई उकसावा नहीं,
कोई हुड़दंग नहीं,
केवल भारत में ही करोड़ों मुस्लिम ईदगाह/मस्जिद में इकट्ठा हुए 2 रकअत नमाज पढ़े और खुशबू बिखरते हुए घर को चल दिए, इसे कहते हैं पर्व! सभी को ईद मुबारक ❤️
Dammam – the first city in the Kingdom where the crescent moon of Eid al-Fitr is sighted.
Tabuk – the last city in the Kingdom where the sighting ends.
Until now:
Cloudy conditions continue at most observation sites across the Kingdom.
Rain is currently heading toward observation sites across the Kingdom.
@ranvijaylive हो सकता है अमेरिका के दबाव और Epstein file के डर से भारत के कुछ बेशर्मों ने ख़ुद ही सूचना दी हो।
क्योंकि ईरान का इतना एहसान होने के बाद भी भारत की सरकार और उसकी मूर्ख जनता इजरायल के साथ खड़ी है।
UP के अलीगढ से पिछले वर्ष होने वाले दामाद संग घर बसाने वाली अनीता ने अब 'ठिकाना' बदल दिया है। अब अनीता ने बेटी के मंगेतर को छोड़ पूर्व पति के जीजा संग रहने का फैसला कर लिया है। बेटी के मंगेतर संग वह लगभग 10 माह रही।
क्या था मामला...
अलीगढ़ में जितेंद्र कुमार ने अपनी बेटी शिवानी की शादी नगला मछरिया गांव के रहने वाले राहुल से तय की थी। शादी पिछले साल 16 अप्रैल को होनी थी। शादी की तैयारी हो रही थी। कार्ड बांटे जा रहे थे।
इसी बीच शादी के नौ दिन पहले शिवानी की मां अनीता देवी अपने होने वाले दामाद राहुल के साथ भाग गई थी। यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था। कई बार पंचायत हुई, लेकिन दोनों अलग होने को राजी नहीं हुए।
अब नया मामला...
पिछले 10 महीने से दोनों साथ रह रहे थे। इस बीच अनीता का संपर्क अपने पिछले पति जितेंद्र के जीजा से हुआ। वह कपड़ा बेचता है। दोनों में अफेयर हुआ। दोनों फरार हो गए। अब राहुल भी परेशान है।
#Aligarh #AffairTheSeries