भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नज़र आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।
भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे जायज़ होंगे?
निंदनीय!
जिन भाजपाइयों ने भगवान को धोखा दे दिया, उनकी बातों-आरोपों का अब कोई विश्वास नहीं करता।
ध्यान से देखा जाए तो भाजपा और उनके संगी-साथियों के चेहरे अंदर से डरे हुए लग रहे हैं क्योंकि कोई कितना भी बड़ा पापी हो, धर्म-धन को चुरानेवाला हो, उसके मन में ये डर तो रहता ही है कि भगवान उसकी काली-करतूतों को देख रहा है और एक-न-एक दिन उसको, किस रूप में कुकर्मों का दंड भुगतना ही पड़ेगा। जो भगवान का नहीं हुआ वो इंसान का क्या होगा।
भाजपा नैतिक रूप से ख़त्म हो चुकी है।
#CC_to_CC
कभी ‘माँ गंगा के उद्धार के लिए’ अनशन पर बैठे श्री जी. डी. अग्रवाल जी ने निरंतर अपनी माँग बीजेपी सरकार के सामने रखी थी लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई थी और वो अपना जीवन खो बैठे थे।
श्री सोनम वांगचुक जी और केन-बेतवा के आदिवासी-किसान आंदोलनकारियों को भाजपा से किसी भी प्रकार की सहानुभूति और सहृदयता की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसीलिए आप अनशन के माध्यम से अपने बहुमूल्य जीवन को दाँव पर न लगाएं। आप सबके अदम्य संघर्ष और संकल्प की शक्ति जब भाजपा को हटाने के, हम सबके आंदोलन से जुड़ेगी, तो भाजपा हारेगी और हमेशा के लिए हट -मिट जाएगी।
जो भाजपाई और उनके संगी-साथी महात्मा गांधी जी में विश्वास नहीं करते हैं, वो उनके संघर्ष और विरोध के तरीकों में क्या विश्वास करेंगे।
भाजपा की उत्पीड़न की हैट्रिक :
- शंकराचार्य जी के अपमान व मंदिर की चोरी से सनातन समाज का उत्पीड़न।
- शिक्षा-परीक्षा धांधली से युवाओं का व मृतक की माँ के अपमान से महिलाओं का उत्पीड़न;
- सजातियों को छोड़कर पुलिस, बुलडोज़र व एनकाउंटर के अत्याचार से अन्य सभी पीडीए का उत्पीड़न।
#CC_to_CC
विश्व विख्यात श्री सोनम वांगचुक जी से फोन पर बात करके उनके स्वास्थ्य के बारे में जाना और उनसे अनशन तोड़ने की अपील की। उनके सत्याग्रह को हमारा खुला समर्थन है।
हमारा मानना है कि वो जनहित में इस आग्रह पर विचार करें। देश की संपूर्ण युवा शक्ति, उनके अभिभावकों, परिवार और परिजनों की आकांक्षा भी यही है क्योंकि उनके नैतिक बल की देश को बहुत आवश्यकता है अतः वो पूरी दुनिया से आ रहे निवेदनों को स्वीकार करते हुए अपना अनशन तोड़े दें, फिर कुछ दिनों का स्वास्थ्य लाभ लें और नई ऊर्जा का संचय करके पुनः नये आंदोलन में जुट जाएं। उनसे सविनय आग्रह है कि वो ‘नकारात्मक, भ्रष्ट, बेईमान, लोकतंत्र विरोधी सांप्रदायिक भाजपा’ के विरुध्द हो रहे आंदोलनों को पूरे देश में विस्तारित कर जन-एकजुटता की अखंड कड़ी बनें।
नीट की परीक्षा के घोटाले के बाद मंदिर में चोरी के महापाप का भंडाफोड़ भी एक गहरा दिव्य-संकेत है। डॉक्टर को धरती पर भगवान के रूप में ही देखा जाता है। हम सब तो मंदिर और मेडिकल दोनों के गहरे संबंध में विश्वास करते हैं। धर्म के मनोबल का और चिकित्सा का मनोवैज्ञानिक संबंध भी होता है।
जिस तरह संपूर्ण विश्व का मीडिया श्री सोनम वांगचुक जी के लिए चिंतित दिखाई दे रहा है, उसका एक दूसरा पक्ष ये भी है कि इससे भाजपा राज में दुनिया भर में हमारे देश की डेमोक्रेटिक इमेज बुरी तरह खंडित हो रही है।
हम श्री सोनम वांगचुक जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं।
@Wangchuk66
‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी खुलने के बाद भाजपा बदहवास हो गई है। वो जनता का ध्यान भटकाने के लिए बचकानी हरकतें कर रही है। इससे जनता में भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों के ख़िलाफ़ गुस्सा और बढ़ता जा रहा है। भाजपाइयों की नकारात्मक सोच का छोटापन दिन-पर-दिन बढ़ता जा रहा है। एक दल के रूप में भाजपा में अब कोई आत्मा नहीं बची है। शरीर पर ‘धर्म-धन चोरी’ के अनगिनत असाध्य ज़ख़्म उभर आए हैं। भाजपा राजनीतिक रूप से विक्षिप्तावस्था में चली गई है। सब अपने को बचाने में लगे हैं।
भाजपा ख़त्म!
#CC_to_CC
‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ की क्रोनोलॉजी नहीं; भाजपाई ‘क्रिमिनोलॉजी’ का कुचक्र समझिए:
⁃अपने संगी-साथियों से माध्यम से पूरी दुनिया के आस्थावानों से गुपचुप संपर्क साधो
⁃उनकी आस्था का भावनात्मक दोहन करो और बड़ा-बड़ा चंदा दान बहुमूल्य रत्नों, धातुओं या नक़द उगाहो
⁃रसीद देने के नाम पर धातुओं की गुणवत्ता की जाँच कराने का बहाना बनाकर टाल दो
⁃देश के अंदर लोगों को बड़े-बड़े समूहों में प्रायोजित तरीक़े से मंदिर ले जाओ
⁃फिर वहाँ ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ के रूप में वसूली करो
⁃साथ ही विभिन्न धार्मिक अवसरों व तिथियों के नाम पर नक़ली रसीद छपवाकर-कटवाकर घपला करो
⁃फिर न्यास के नाम पर, अपने लोगों को सेट करके ‘भ्रष्टाचार का व्यास’ बढ़ाओ
⁃फिर अपने विश्वसनीय लोगों को बैठाकर साँठगाँठ करके गलत-गिनती करने का गोरखधंधा चलाओ
⁃फिर ‘धर्म-धन’ में सेंधमारी करो
⁃सीसीटीवी व अन्य सबूत गायब कर दो
⁃अपने लोगों को स्थानीय ज़मीन सस्ते में खरीदवाओ और फिर न्यास के पैसों से वही ज़मीन बीसों गुने दाम में ख़रीद कर आपस में अधर्मी मुनाफ़ा बाँट लो
⁃फिर उस पैसे से अनरजिस्टर्ड कार्यालय बनाओ
⁃और फिर उन कार्यालयों के ज़रिए से अपना जाल और फैलाओ
⁃चोरी के धन का बहुमूल्य धातुओं के रूप में ‘ठोसीकरण’ करके बोरियों में भरकर दूसरे राज्यों में भेजकर नक़ली प्रचारकों व वोटरों का गिरोह बनाकर चुनावी-घोटाला करवाओ
⁃जब ये राज़ खुल जाए तो ‘दो नंबर के काम के लिए नंबर दो को आगे करके’ हाथ उठाकर, माइक-कैमरा हटाकर फुर्र हो जाओ
⁃उधर चुपके से ख़ुफ़िया साथियों को फ़ोन मिलाकर पता करो कि कहीं लूट के घपले में ही, बँटवारे का घपला तो नहीं हो रहा है, पूरा पहुँच भी रहा है या नहीं
⁃जब पकड़े जाओ तो 4-5 दिन में माल को वापस दिखाकर झूठी सफ़ाई दो और ये फैलाओ की धर्म के लिए दिये गये पैसों का हिसाब नहीं माँगना चाहिए
⁃या फिर अपने लोगों की औपचारिक जाँच उन लोगों से करवाओ, जो ख़ुद ही हेराफेरी - चार सौ बीसी की जाँच झेल रहे हों
⁃‘फुनगी को फाँसी, शाख को माफ़ी’ का फ़ार्मूला अपनाकर बड़ी मछलियों को बचाओ
⁃फिर मामला रफ़ा-दफ़ा करने के लिए झूठे समाचारों व आरोपों से ध्यान भटकाओ
⁃जब क़ानूनी कार्रवाई का डर हो तो बेशर्मों की तरह बेमन से माफ़ी माँगते हुए, डर से झूठमूठ थरथराओ
⁃और फिर मौक़ा पाते ही, निर्लज्ज होकर ‘धर्म, संस्कृति, देश, व्यक्ति और भावनाओं को ठगने के कुचक्र’ को बार-बार दोहराने की शताब्दी मनाओ!
लेकिन अब सच्चे देश प्रेमी भाजपा और उसके संगी-साथियों की इस क्रिमिनोलॉजी को देश के हर गाँव, पंचायत, गली, मोहल्ले, बस्ती, नगर के चौक-चौराहों पर पढ़कर सुनाएंगे, भाजपाई गिरोह का भंडाफोड़ करेंगे और उनका सामाजिक-राजनीतिक बहिष्कार भी।
#CC_to_CC
श्री सोनम वांगचुक जी से हमारा अति विनम्र आग्रह और सविनय अपील है कि वो अपना अनशन तोड़ दें। उनका जीवन समस्त विश्व के लिए अनमोल है क्योंकि उसमें मानवता और पर्यावरण के लिए उतनी ही प्रतिबद्धता है जितनी की लोकतंत्र के लिए।
जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वो आमरण अनशन पर हैं वो तो एक सिद्धांतहीन, भ्रष्ट तंत्र है, उसकी असंवेदनशीलता और हृदयहीनता में किसी के भी त्याग का कोई महत्व नहीं है अत: भाजपाइयों से सदाचार और हृदय-परिवर्तन की कोई भी अपेक्षा निरर्थक है। भाजपाइयों के लिए किसी के जीवन का कोई भी मोल नहीं है। उनके लिए धन ही प्रधान है। वो भ्रष्टाचार से कमाए पैसों के घमंड में चूर हैं। उनमें बदलाव की आशा करना ही व्यर्थ है। जिनमें अहंकार होता है उनमें परिष्कार नहीं होता। ‘सत्याग्रह’ का महत्व वो क्या जानें जो ‘सत्ताग्रह’ के लालच में मंदिर तक लूट ले रहे हैं। उन्हें न युवाओं के भविष्य से कुछ लेना-देना है, न उनके माता-पिता और अन्य परिजनों के सपनों से, वो तो ख़ुदगर्ज़ लोग हैं।
लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली महापापी-अधर्मी भाजपा और उसके भूमिगत अपंजीकृत संगी-साथियों के गिरोह को हराने और सदैव के लिए हटाने के लिए आपके मनोबल और नैतिकता की महाशक्ति हर सच्चे भारतीय की प्रेरणा बनती रहे और आप देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण के संघर्ष के लिए नकारात्मक ताक़तों के ख़िलाफ़ सदैव प्रकाश स्तंभ बने रहें, यही हम सबकी चाह है और प्रार्थना भी।
@Wangchuk66
लो अब वृक्षारोपण का ही एनकाउंटर कर दिया!
शुक्र तो ये मनाइये कि 1 पेड़ तो लगा, भले वो मंच पर लगा दिया है बाक़ी 34,99,99,999 तो काग़ज़ी फ़ाइल में लगेंगे।
ये वृक्षारोपण नहीं, भ्रष्टारोपण है जिसके बहाने चुनावी-फ़ंड की समानांतर व्यवस्था की जा रही है। इसके पीछे भी डबल इंजन की टकराहट ही मुख्य कारण है।
‘भाषण न सुनने के मूड’ वाले सार्वजनिक बयान के बाद जो 1-2% छवि बची भी थी, उस पर भी ऐसे दिखावटी कृत्यों से इन्होंने ख़ुद ही बुलडोज़र चला दिया है।