रेलवे को एक बार में बता देना चाहिए कि अब पहले जैसी भर्ती नहीं निकलेगी। इससे वोट कम नहीं होगा। वोट तो फिर भी धर्म के नाम पर ही मिलेगा लेकिन एक बार में बता देने से इतनी बड़ी संख्या में युवा भर्तियों का इंतज़ार नहीं करेंगे और कोचिंग के लिए खेत नहीं बेचेंगे और कर्ज़ नहीं लेंगे। भर्ती निकलेगी तभी तो आरक्षण भी मिलेगा।
अफ़सोस है कि युवाओं को यह सब झेलना पड़ता है। उनके जीवन में इतना तनाव हैं । इन युवाओं को ‘परीक्षा पर चर्चा’ में प्रधानमंत्री का प्रवचन सुनाना चाहिए। उसमें असफ़लताओं का सामना करने के उपाय बताए जाते हैं। जब भर्ती नहीं निकलेगी, परीक्षा नहीं होगी तो असफल भी नहीं होंगे। ज़ाहिर है तनाव नहीं होगा। परीक्षा नहीं होगी मगर परीक्षा पर चर्चा होगी।
#RailwayJobPeCharcha #alp
सभी के काम और भाव का सम्मान होना चाहिए
शाजापुर में ट्रक ड्राइवर्स से जुड़ी घटना में कलेक्टर को पद से हटाया गया है।
यह सरकार गरीबों की सरकार है। प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के नेतृत्व में हम गरीब कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। अधिकारियों को अपनी भाषा और व्यवहार का ध्यान रखना चाहिए।
यह वीडियो आज का है। भारतीय रिज़र्व बैंक, दिल्ली के बाहर लोग घंटों क़तार में खड़े हैं। तीन-तीन घंटे। दिल्ली के बाहर से भी लोग आए हैं। दो हज़ार का नोट बदलवाने। यहाँ से रोज़ पत्रकार गुजरते होंगे फिर भी दो हज़ार के नोट की लाइन मीडिया से ग़ायब है। तब भी ग़ायब कर दी गई और अब भी ग़ायब है।
https://t.co/iXVeC4V1ED
नामी कंस्ट्रक्शन के बेटे ईशांत अग्रवाल के अपहरण की कोशिश. आकाश यादव और आशीष यादव को पुलिस ने दबोचा. दोनों मैनपुरी के रहने वाले. कार की डिग्गी से बरामद हुआ बंधक था ईशांत. हाथ-पैर बांधकर मुंह में कपड़ा ठूँस कर ले जा थे थे आरोपी. आगरा पुलिस की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टला. कब्जे से एक तमंचा 315 बोर कारतूस बरामद. ईशांत के ड्राइवर आकाश यादव ने रची थी अपहरण की साजिश.
आप विकास दिव्यकीर्ति सर के कितने भी बड़े आलोचक क्यों ना हों लेकिन इनकी इस बात से आप भी सहमत ही होंगे. हिन्दी दिवस मनाने से भाषा के प्रति प्रेम नहीं दिखता उसे ज़मीन पर लागू करना होता है. शायद भारत इकलौता ऐसा देश होगा जहां न्यायालयों में अपने देश की भाषा ना होकर इंग्लिश है.
पंजाब के रहने वाले अमृतपाल सिंह अग्निवीर के तौर पर सेना में भर्ती हुए।
वो कश्मीर में तैनात थे, 10 अक्टूबर को गोली लगने से वे शहीद हो गए।
दुखद ये है कि देश के लिए शहीद होने वाले अमृतपाल जी को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई भी नहीं दी गई।
उनका पार्थिव शरीर एक आर्मी हवलदार और दो जवान लेकर आए। इसके अलावा आर्मी की कोई यूनिट तक नहीं आई।
यहां तक कि उनके पार्थिव शरीर को भी आर्मी वाहन के बजाए प्राइवेट एंबुलेंस से लाया गया।
ये देश के शहीदों का अपमान है।
डॉक्टर सुलेखा चौधरी, पीडियाट्रीसियन, CHC, आगरा।
बच्ची का जन्म हुआ लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं थी।
बच्ची को पहले ऑक्सिजन सपोर्ट दिया, लेकिन जब उससे भी लाभ नहीं हुआ तो लगभग 7 मिनट तक ‘माउथ टू माउथ रेस्पिरेशन’ दिया, बच्ची में साँस आ गई।👏🏼❤️
#Salute#Doctor#respect