सोशल मीडिया की दुनिया में खोता युवा:- ए.पी. सिंह
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं को आवाज तो दी, लेकिन क्या वास्तविक रिश्ते कमजोर हो रहे हैं?
आज का युवा जिस दुनिया में जी रहा है, उसमें मोबाइल और सोशल मीडिया केवल मनोरंजन के साधन नहीं रह गए हैं। पढ़ाई, नौकरी की जानकारी, समाचार, व्यापार, दोस्ती और अपनी प्रतिभा दिखाने तक—सोशल मीडिया जीवन के लगभग हर क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है।
उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों और गांवों में भी स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच ने युवाओं की दुनिया बदल दी है। अब किसी बड़े शहर में बैठे व्यक्ति से संवाद करना या देश-दुनिया की जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में बहुत आसान है। सोशल मीडिया ने युवाओं को अपनी बात रखने और अपनी प्रतिभा दुनिया तक पहुंचाने का मंच भी दिया है।
लेकिन इस बदलाव का दूसरा पहलू भी है।
लाइक्स और फॉलोअर्स की दौड़
सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी अक्सर वास्तविक जिंदगी से अलग होती है। लोग अपनी उपलब्धियों, यात्राओं और खुशियों को साझा करते हैं, लेकिन संघर्ष और असफलताओं को कम ही दिखाते हैं।
ऐसे में युवा जब लगातार दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करने लगता है तो उसके मन में यह भावना पैदा हो सकती है कि बाकी सभी लोग उससे बेहतर जीवन जी रहे हैं। धीरे-धीरे लाइक्स, कमेंट और फॉलोअर्स आत्मविश्वास और सामाजिक स्वीकृति का पैमाना बनने लगते हैं।
ऑनलाइन दोस्ती, ऑफलाइन दूरी
सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ने का काम किया है, लेकिन कई बार यही जुड़ाव वास्तविक रिश्तों से दूरी का कारण भी बन जाता है।
एक ही घर में बैठे परिवार के सदस्य कई बार एक-दूसरे से बातचीत करने के बजाय अपने-अपने मोबाइल में व्यस्त दिखाई देते हैं। दोस्तों के बीच आमने-सामने बातचीत का समय कम हो सकता है और ऑनलाइन बातचीत उसकी जगह लेने लगती है।
तकनीक समस्या नहीं है; समस्या तब शुरू होती है जब तकनीक हमारे समय और व्यवहार को नियंत्रित करने लगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए सोशल मीडिया उपयोगी भी है और चुनौती भी। ऑनलाइन कक्षाएं, अध्ययन सामग्री, सरकारी नौकरी की जानकारी और शैक्षणिक वीडियो पढ़ाई में मदद कर सकते हैं।
लेकिन लगातार आने वाले नोटिफिकेशन, शॉर्ट वीडियो और मनोरंजन संबंधी सामग्री पढ़ाई के दौरान ध्यान भटका सकती है। कुछ मिनट के लिए खोला गया मोबाइल कई बार काफी लंबा समय ले लेता है।
इसलिए युवाओं के सामने चुनौती सोशल मीडिया छोड़ने की नहीं, बल्कि उसका सही उपयोग सीखने की है।
सोशल मीडिया पर हर जानकारी सही नहीं होती। अफवाह, अधूरी जानकारी और भ्रामक सामग्री तेजी से फैल सकती है। युवाओं के लिए किसी भी खबर को बिना जांचे आगे बढ़ाने के बजाय उसके स्रोत और सत्यता को समझना जरूरी है।
इसके अलावा ऑनलाइन अपमान, ट्रोलिंग और साइबर-बुलिंग भी युवाओं के सामाजिक अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए डिजिटल दुनिया में जिम्मेदार व्यवहार और साइबर सुरक्षा की समझ जरूरी है।
सोशल मीडिया को पूरी तरह छोड़ देना व्यावहारिक समाधान नहीं है। जरूरत डिजिटल अनुशासन की है।
युवाओं को यह तय करना होगा कि सोशल मीडिया का उपयोग वे जानकारी और अवसर के लिए कर रहे हैं या केवल समय बिताने के लिए। पढ़ाई और काम के समय अनावश्यक नोटिफिकेशन बंद करना, सोने से पहले मोबाइल से दूरी रखना और परिवार तथा दोस्तों के साथ प्रत्यक्ष बातचीत के लिए समय निकालना छोटी लेकिन प्रभावी आदतें हो सकती हैं।
माता-पिता को भी केवल मोबाइल छीनने के बजाय बच्चों और युवाओं से संवाद करना चाहिए। स्कूल और कॉलेजों में डिजिटल साक्षरता तथा जिम्मेदार सोशल मीडिया उपयोग पर चर्चा होनी चाहिए।
सोशल मीडिया न तो पूरी तरह वरदान है और न ही अभिशाप। यह एक ऐसा माध्यम है जिसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि हम उसका इस्तेमाल कैसे करते हैं।
उत्तर प्रदेश का युवा सोशल मीडिया का केवल उपभोक्ता बनने के बजाय इसका रचनात्मक उपयोग कर सकता है नई चीजें सीखने, रोजगार के अवसर खोजने, अपनी प्रतिभा दिखाने और समाज की सकारात्मक आवाज बनने के लिए।
जरूरत सोशल मीडिया से दूरी बनाने की नहीं, बल्कि इतनी समझ विकसित करने की है कि हम डिजिटल दुनिया से जुड़े रहें, लेकिन अपनी वास्तविक दुनिया से न कटें।
ब्रेकिंग फतेहपुर। मामूली विवाद में महिला को युवक ने मारी गोली। महिला की हालत गंभीर अस्पताल में भर्ती। पति-पत्नी के बीच हो रहा था विवाद।
महिला के चेहरे पर लगी गोली, मामले की जांच में जुटी पुलिस। मौके पर भारी मात्रा में पुलिस बल मौजूद।चांदपुर थाना क्षेत्र के शिकरी गांव का मामला।
चार लोग लगेंगे मेरी लाश उठाने में
तू एक ही औरत काफी है मुझे ज़िंदा लाश बनाने में।
खुद के ही आँसुओं में खुद को ही भिगो दिया
आज फिर तेरी याद आई तो रो दिया।
भारत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला युवक — गिरफ्तारी तक Repost रुकना नहीं चाहिए।
नाम :— Arsh Khan
पता :— जिला कन्नौज, उत्तर प्रदेश 🚨
यह युवक खुलेआम भारत विरोधी और आपत्ति+जनक बयान दे रहा है। #kannojpolice तुरंत संज्ञान ले और कड़ी कार्रवाई करे। 🇮🇳
हिंदु राजा और मु स्लिम रानी...
अक्सर हिंदू राजाओ को नीचा दिखाने के लिए जोधा अकबर का झूठा वैवाहिक संबंध इतिहास बता दिया जाता है..
तो आज हम बताते हैं हिन्दू राजा और मु स्लिम लड़कियो के वैवाहिक संबंध बनाने का इतिहास..
1-अकबर की बेटी शहज़ादी खानूम से महाराजा अमर सिंह जी का विवाह।
2-कुँवर जगत सिंह ने उड़ीसा के अफगान नवाब कुतुल खा कि बेटी मरियम से विवाह।
3-महाराणा सांगा मु स्लिम सेनापति की बेटी मेरूनीसा से ओर तीन मुस्लिम लड़किया से विवाह
4 -विजयनगर के सम्राट कृष्ण देव राय का गुजरात के नवाब सुल्तान महमूदशाह की बेटी मिहिरिमा सुल्तान से विवाह।
5-महाराणा कुंभा (अपराजित योद्धा) का जागीरदार वजीर खा की बेटी से विवाह।
6-बप्पा रावल (फादर ऑफ रावलपिंडी) गजनी के मुस्लिम शासक की पुत्री से और 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारीयो से विवाह
7-विक्रमजीत सिंह गोतम का आज़मगढ़ की मुस्लिम लड़की से विवाह।
8-जोधपुर के राजा राजा हनुमंत सिंह का मुस्लिम लड़की ज़ुबेदा से विवाह।
9-चंद्रगुप्त मौर्य का सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर की बेटी हेलेना से विवाह।
10- कश्मीर के राजा सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ का तुर्की के खालीफा मुहम्मद बिन क़ासिम की बेटी जैनम से विवाह इसके अलावा उनकी 8 मुस्लिम बीबीया भी थी
11-महाराणा उदय सिंह ने एक मुस्लिम लड़की लाला बाई से विवाह
12-राजा मान सिंह मुस्लिम लड़की मुबारक से विवाह।
13-अमरकोट के राजा वीरसाल का हामिदा बानो से विवाह।
14-राजा छत्रसाल का हैदराबाद के निजाम की बेटी रूहानी बाई से विवाह।
15-मीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन का राजपूत राजा बिन्दुसार से विवाह।
ये तो वैवाहिक संबंध की बात हुई अब हिंदू राजाओ की मुस्लिम प्रेमिकाओ पर बात करते हैं
1-अल्लाउदीन खिलजी की बेटी "फिरोजा"" जो जालोर के राजकुमार विरमदेव की दीवानी थी वीरमदेव की युद्ध मै वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा सती हो गयी थी
2-औरंगजेब की एक बेटी ज़ेबुनिशा जो कुँवर छत्रसाल के पीछे दीवानी थी ओर प्रेम पत्र लिखा करती थी ओर छत्रसाल के अलावा किसी ओर से शादी करने से इंकार कर दिया था
3-औरंगजेब की पोती ओर मोहम्मद अकबर की बेटी सफियत्नीशा जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम की दीवानी थी
4-इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान जो राजपूत जागीरदार कर्म चंद्र से प्रेम करती थी
5-औरंगजेब की बहन भी छत्रपति शिवाजी की दीवानी थी शिवाजी से मिलने आया करती थी।
हिन्दू राजाओ की और भी बहुत सी मुस्लिम बीवीया थी लेकिन वो राज परिवार और कुलीन वर्ग से नहीं थी।
लेकिन उस समय की किताबो में ब्रिटिश और उस समय के कवियों के रचनाओ मैं जिक्र स्पष्ट है
और ब्रिटिश रिकॉर्ड में भी औऱ ज्यादातर हिन्दू राजाओ की एक से ज्यादा मु स्लिम बी वीया थी लेकिन रक्त शुध्दता की वजह से इनके बच्चो को अपनाया नहीं जाता ओर उन बच्चों को वर्णशंकर मान के जागिर दे दी जाती थी
तो ये ऐतिहासिक प्रक्षेप जबाब जरुर दे जो हिन्दुओ को जोधा अकबर जैसे झूठे ऐतिहासिक तथ्यों पर बहस करते हैं
कभी इनपर भी "बॉलीवुड" फिल्म बनाए
रिपोस्ट रुकना नहीं चाहिए हर सेक्युलर हिन्दू लड़कियों तक यह वीडियो पहुंचनी चाहिए
"जो इसे बेआबरू करेगा, वही असली ग़ाज़ी है।
#TheBengalFiles में @vivekagnihotri जी ने वो सच दिखाया है जिससे हमें सालों से छिपाया गया।
हर हिन्दू को अपने परिवार के साथ यह फ़िल्म देखनी चाहिए।