मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के Gen Z,
आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।
मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज़, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी ज़रूरी है।
नीचे दिए लिंक पर जाकर बताइए - आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं।
आपकी समस्याएं। आपके सुझाव। हम मिलकर उम्मीद फिर से लौटाएंगे।
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
ब्रिटेन ने अधिकृत वेस्ट बैंक में स्थित अवैध इज़राइली बस्तियों में उत्पादित वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला लिया है। यह कदम इज़राइली बस्तियों के लगातार विस्तार और फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ बढ़ते जा रहे बस्तीवासियों के हिंसक हमलों की वजह से है। 11 और देश भी ऐसा बैन लगाने वाले हैं। @narendramodi भारत सरकार को भी यह कदम जल्द से जल्द उठाना चाहिए। इसराइल के बढ़ते ज़ुल्म को रोकने के लिए यह एक अहम फ़ैसला होगा।
लखनऊ: हार के डर से बीजेपी यू पी का माहौल खराब करना चाहती है।
सहारनपुर की मस्जिद तोड़ना BJP की बौखलाहट है।
ये देश किसी मोदी योगी के फ़रमान से नहीं बाबा साहेब के संविधान से चलेगा।
सहारनपुर की मस्जिद तोड़ना संसद के क़ानून का खुला उल्लंघन है,दोषियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिये।
सहारनपुर - मस्जिद ध्वस्तीकरण पर सांसद इमरान मसूद का बयान, जिला प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल
आदेश और ध्वस्तीकरण दोनों गैर-संवैधानिक हैं। 2027 के चुनाव को लेकर ध्वस्त की गई मस्जिद,
प्रशासन ने मस्जिद गिराकर गैर-संवैधानिक काम किया, यह मामला देशभर में एक नज़ीर बनेगा।
मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने का किया बड़ा ऐलान।
#Saharanpur @Imranmasood_Inc
"BJP, मोदी और योगी को लफ़्ज़-ए-मस्जिद से नफ़रत है। मस्जिद को देखते ही इनके दिल-ओ-दिमाग़ में दर्द शुरू हो जाता है।"
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शहीद किए जाने पर Barrister @asadowaisi का उत्तर प्रदेश की @BJP4India सरकार पर निशाना।
The mosque in the Saharanpur Collectorate was demolished at 5 AM this morning.
Does the constitutional guarantee of freedom of religion no longer apply to Muslims? Why is it that our places of worship are constantly bulldozed on flimsy grounds?
The mosque committee produced records going back to 1911 to establish its existence. Prayers have been offered there continuously for more than a century. This is the very definition of waqf by user, which is still protected as waqf under law.
The Limitation Act does not ordinarily allow the Government an unlimited period to wake up one fine morning and assert possession over immovable property.
There was more than a century of open, continuous and public possession? The State cannot pretend that this possession began yesterday, hence the principle of adverse possession would apply even if we concede to the state’s arguments.
The mosque came first, the collectorate later.
For some people, perhaps the very sight of a masjid causes pain. That is their problem, not ours. Look away if you must. You cannot bulldoze our masjid just because you have an itch.
My religious freedom is not dependent on your mercy.
मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया-फिर हमारी मस्जिद क्यों ढहाई गई?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया।
क्या मुसलमानों के लिए अब मज़हबी आज़ादी का संवैधानिक हक़ भी नहीं बचा है? हमारी इबादतगाहों पर बार-बार कमज़ोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोज़र क्यों चलाया जाता है?
मस्जिद कमेटी ने 1911 के दस्तावेज़ अदालत में पेश करके यह साबित करने की कोशिश की कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी। एक सदी से भी ज़्यादा वक़्त से वहाँ लगातार नमाज़ होती रही है। यानी यह कोई आज खड़ी कर दी गई इमारत नहीं है, बल्कि लंबे अरसे से एक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है। यही वक़्फ़ बाय यूज़र की बुनियाद है, जिसे क़ानून में भी मान्यता मिली है।
मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।
कुछ लोगों को शायद मस्जिद दिख जाने पर भी तकलीफ़ होती है। लेकिन यह उनका मसला है, हमारा नहीं। नज़र फेरनी है तो फेर लो। लेकिन अपनी खुन्नस मिटाने के लिए हमारी मस्जिद पर बुलडोज़र नहीं चला सकते।
हमारी मज़हबी आज़ादी आपकी रहम-ओ-करम पर मबनी नहीं है।
#SaharanPur #Masjid
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित प्राचीन मस्जिद का ध्वस्तीकरण अत्यंत अफसोसजनक है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं तो उनके लागू करने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है? आज बुलडोजर न्याय की निशानी कम और बदले, भेदभाव और नफरत की राजनीति का हथियार बनता जा रहा है।
यह मामला केवल एक मस्जिद का नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका का सवाल है।
1991 का Places of Worship Act आज भी मौजूद है। इसी तरह नए वक्फ कानून में भी “वक्फ बाई यूजर” की धारा मौजूद है। यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है जिसका नंबर 451 है। जबकि जमीन के पुराने रिकॉर्ड में याकूब खान और वहीद खान के से जमीन दर्ज हैं। मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 से संबंधित दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करके यह पक्ष रखा था। ऐसे ऐतिहासिक और कानूनी साक्ष्यों को नजरअंदाज करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्याय की उसूलों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अगर अवैध कब्जा या अतिक्रमण ही कार्रवाई का मापदंड है तो यही मापदंड हर धर्म और हर वर्ग के लिए समान होना चाहिए। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी जमीनों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर दशकों से मौजूद दूसरी धार्मिक निर्माणों के खिलाफ भी क्या प्रशासन इसी जल्दबाजी, सख्ती और मापदंड से कार्रवाई करता है? अगर नहीं, तो किसी एक धार्मिक स्थल के खिलाफ असाधारण सख्ती समान न्याय के सिद्धांत के विपरीत महसूस होती है।
भारत किसी एक धर्म या वर्ग का नहीं, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी धर्मों को मानने वालों का साझा वतन है। संविधान ने किसी को पहले और किसी को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं बनाया है।
हम किसी विशेष रियायत के इच्छुक नहीं हैं, केवल समान न्याय चाहते हैं। हमारा सवाल सीधा है: जो कानून मस्जिद के लिए है, वही हर धार्मिक स्थल के लिए क्यों नहीं? जो मापदंड मुसलमान के लिए है, वही दूसरे नागरिक के लिए क्यों नहीं? संविधान और कानून अगर सभी के लिए हैं तो उनका संरक्षण और लागू करना भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
#ArshadMadani
#Jamiat_ulama_I_Hind
#SaharanpurMosque
#SaharanpurCollectorate
#SaharanpurDemolition
#PlacesOfWorshipAct1991
पूर्व राज्यसभा सांसद एवम पूर्व नगर विधायक डॉ. तज़ीन फ़ातिमा साहिबा की इस महत्वपूर्ण अपील को जरूर सुनें और उनकी बात को आगे बढ़ाएं।
आइए, डॉ. तज़ीन फ़ातिमा साहिबा की इस अपील को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाए
#AzamKhan#AkhileshYadav
प्रयागराज:इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
➡SC/ST एक्ट पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
➡केवल जातिसूचक शब्द बोलना अपने आप में अपराध नहीं
➡ठोस सबूत और स्पष्ट इरादा जरूरी- हाईकोर्ट
➡‘चमार’ शब्द का इस्तेमाल अपराध साबित नहीं करता’
➡‘यह साबित करना जरूरी जाति के आधार पर अपमानित करने का इरादा था’
➡‘अपराध के जरूरी तत्व प्रथम दृष्टया नहीं मिले’
➡‘ट्रायल का सामना कराने के लिए समन भेजना सही नहीं’
➡‘हाईकोर्ट ने निचली अदालत का समन आदेश रद्द कर दिया’
#Prayagraj #AllahabadHighCourt #UttarPradesh
मैडम मैं सुन्नी हूं सुनता ज़्यादा हूं बोलता कम लिहाजा आज तो बोलने दीजिए यह शब्द है आजमगढ़ की उस शख्सियत का बा
भारतीय पार्लियामेंट में जिसे मौलवी मसूद खान कहते हैं
जिसे आज का युवा सिर्फ नाम सुनता है
देश के लोगों को मुबारकबाद! आप अभी आज़ादी का जश्न मना रहे हैं इधर आज सुबह मोदी सरकार की ED आज़म ख़ान के करीबियों और जौहर यूनिवर्सिटी में छापे मार रही हैं।
आज सुबह सुबह ED आज़म ख़ान से जुड़े हुए लोगों के घरों में घुसी हुई है, जौहर यूनिवर्सिटी में भी छापेमारी चल रही हैं, दिल्ली, सहारनपुर, रामपुर में ED पहुंचकर आज़म ख़ान को नए केस में गिरफ्तार कर जेल में लंबे समय तक रखने के लिए सबूत तलाश रही हैं, 2017 से अब तक आज़म ख़ान 59 महीनों की जेल काट चुके हैं और वर्तमान में भी बंदी हैं उनके विरुद्ध मुर्गी, बकरी, भैंस, पाजेब, सफ़ाई मशीन, किताबें चोरी और शराब के ठेके के गल्ले से 16800₹ चोरी समेत 121 से FIR दर्ज हैं, पिछले 10 वर्षों से आज़म ख़ान और उनका परिवार निशाने पर है।
यानी कुल मिलाकर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति का शिकार आज़म ख़ान पूरी तरह निशाने पर है, सत्ता से शिकायत नहीं उमीद नहीं क्योंकि देश के PM @narendramodi सरकार की केंद्रीय एजेंसियां भी इसलिए हाथ धोकर पीछे पड़ी हुई हैं क्योंकि आज़म ख़ान जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर हैं और मोदी जी मुस्लिमों द्वारा बनाई गई यूनिवर्सिटी के विरोधी हैं।
आज़म ख़ान आखिकार कब तक यूंही निशाने पर रहेंगे? लोकसभा में विपक्ष के नेता @RahulGandhi और सांसद @priyankagandhi के पास क्या जौहर यूनिवर्सिटी के फाउंडर आज़म ख़ान के समर्थन में लिखने बोलने के लिए एक भी लफ्ज़ नहीं? ये हैं आपका इंडिया गठबंधन और मोहब्बत की दुकान? जब पूरे देश को पता है कि आज़म ख़ान यूनिवर्सिटी बनाने की वजह से पिछले 10 वर्षों से मोदी सरकार के ज़ुल्म का शिकार है तो अब तक चुप्पी क्यों? क्या इस देश में मुसलमान होना इतना बड़ा गुनाह हो गया है कि सरकार ज़ुल्म भी करेगी तो विपक्ष उसके मुसलमान होने की वजह से चुप रहेगा?
हम उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री @narendramodi लाल क़िले से अपने ख़िताब में ग़रीबों, मज़लूमों और मुस्लिम मुजाहिदीन-ए-आज़ादी का भी ज़िक्र करेंगे : Barrister @asadowaisi
राष्ट्रीय चेयरमैन, सांसद इमरान प्रतापगढ़ी जी ने देश की संसद में उठाया ज़िले में राजधानी ट्रेन के ठहराव का मुद्दा।
दिल्ली से चलकर डिब्रूगढ़ जाने वाली राजधानी 20503 और डिब्रूगढ़ से चलकर दिल्ली जाने वाली राजधानी 20504 प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन से होकर गुज़रती है लेकिन यहॉं उसका ठहराव ना होने से ज़िले के यात्रियों को कोई फायदा नहीं होता।
कई सालों से जनपदवासियों की मॉंग थी कि राजधानी का प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर ठहराव होना चाहिये, इस क्रम में कॉंग्रेस के महाराष्ट्र से राज्यसभा के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आज देश की संसद में स्पेशल मेंशन के ज़रिये ये मुद्दा उठाया कि राजधानी ट्रेन का ठहराव होना चाहिये।
इससे पूर्व इमरान प्रतापगढ़ी ने शून्यकाल में प्रतापगढ़ स् मुम्बई के लिये दैनिक ट्रेन चलाने की भी मॉंग की थी।
महाराष्ट्र से सांसद होने के बावजूद प्रतापगढ़ जनपदवासियों के लिये संसद में इमरान प्रतापगढ़ी समय समय पर आवाज़ उठाते रहते हैं।
झांसी
➡आबान अहमद के एक्सीडेंट का वीडियो
➡दूसरी गाड़ी के डैशकैम में वीडियो रिकॉर्ड
➡6 अगस्त को आबान की गाड़ी का एक्सीडेंट
➡तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकराई थी
➡सड़क हादसे का वीडियो अब वायरल हुआ
➡हादसे में आबान, सोनू की मौत हो गई थी
@jhansipolice@rangejhansi@Jhansi_DM@Uppolice@UPGovt
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में समस्याओं का अंबार है 👇
• यूनिवर्सिटी में 400% फीस वृद्धि हुई है
• यूनिवर्सिटी में हॉस्टल फीस की बढ़ोतरी कर दी गई
• लाइब्रेरी सिर्फ 8 घंटे खोली जाती है, जहां पानी भर जाता है
• 24 घंटे लाइब्रेरी खोलने की मांग पर यूनिवर्सिटी प्रशासन कहता है- ज्यादा पढ़कर क्या कलेक्टर बनोगे?
• छात्रों ने गंदे पानी की शिकायत की तो प्रशासन ने कहा- यूनिवर्सिटी पानी पीने की जगह नहीं है
आज मैं इस मंच पर बोलने आया हूं और ये तय है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन हम पर FIR करेगा।
📍 प्रयागराज