राहुल गांधी मेक इन इंडिया का मजाक उड़ाते हैं
और खुद उनके पार्टी अध्यक्ष खड़गे जी देश के
युवाओं की स्वदेशी उपलब्धि के गुण गाते हैं
कांग्रेस में विरोधाभास और झूठ का यह दोहरा चरित्र
पूरी तरह उजागर हो गया है जो पार्टी खुद अपने ही बयानों पर टिकी नहीं रह सकती वह देश क्या चलाएगी
इस बार जितने लोग सड़कों पर आए थे वो मोदी जी को ठोकने आए थे - अरविंद केजरीवाल
देश के प्रधानमंत्री जी के लिए कैसी भाषा है ये ????
Crude भाषा में अगर भाजपा बोलना शुरू करेगी तो फिर ख़ुद कहाँ भागोगे ???
आखिर क्यो बुरे लोगो की जिंदगी इस दुनिया मे अच्छे से चलती है ..? 🤔
अगर भगवान ने इसानो को बनाया है,
तो भगवान कभी भी नही चाहेंगे की इंसान शैतान की तरफ चला जाए
यानी इंसान की आत्मा (God's Devine light) शैतान हासिल कर ले .. 🤓
तो अगर इंसान की जिंदगी मे कभी कोई दुख-दर्द ना हो
तो वह भगवान को क्यो याद करेगा .. 💀
इसलिए शैतान बुरे लोगो की जिंदगी की सभी तकलीफे दूर कर देता है,
जिससे जिंदगीभर वह कभी भगवान को याद ना करे,
लेकिन जब उस इंसान को इस बात का अह्सास होता है,
तब तक बहुत देर हो चुकी होती है .. 💀
मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं प्रैक्टिस कर पाती और टूर्नामेंट में भाग ले पाती उस समय विराट कोहली ने ही मेरी मदद की।
उन्होंने 3 साल तक मुझे आर्थिक सहयोग प्रदान किया उनकी वजह से मैं आज कॉमनवेल्थ गेम्स में "गोल्ड मेडल" जीत पाई।
~ साक्षी चौधरी, गोल्डमेडल विनर 🔥❣️
वाह!
CJP party, 56 साल के युवा नेता और वे सभी जो कथित तौर पर "छात्रों के अधिकारों" के लिए खड़े होने का दावा करते हैं, वे इसे देखकर जल-भुन जाएंगे 🔥🔥😂😂
IIT दिल्ली के छात्र मोदी जी की जय-जयकार कर रहे हैं
"IIT में ऐसे नारे लगाने वाले पहले छात्र?" 😂😂
इस बीच, मोदी जी का अंदाज़ - जलवा है हमारा 🔥🔥
#NarendraModi जी
सपा की छात्रों और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर मौजूदा नीतियों पर उसके समर्थकों में भी भारी रोष दिखाई दे रहा है।
सपा के ढुलमुल रवैये से नाराज़ समर्थक अब खुलकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं और पार्टी नेतृत्व को लगातार सुझाव दे रहे हैं कि छात्रों के मुद्दों पर सिर्फ बयान नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर ठोस और निर्णायक कदम उठाए जाएं।
@samajwadiparty@mediacellsp@yadavakhilesh@UDhakre@DrLaxman_Yadav
राहुल गांधी की प्रयागराज वाली ‘छात्रों की गूंज’
पूरी तरह फ्लॉप।
3 लाख भीड़ का दावा किया, करोड़ों उड़ाए… और मैदान में खाली कुर्सियाँ, भीगे गंदे मैदान और उदासीन चेहरे।
स्थानीय युवा ने साफ संदेश दे दिया—तुम्हारे खोखले भाषण और फोटो-शॉट अब नहीं चलेंगे।दिशाहीन रटंत, झूठे वादे और नाटक। नौकरी, पेपर लीक और असली समस्याएँ हल करने की जगह सिर्फ जुमलेबाज़ी।
जनता समझ चुकी है कि तुम सिर्फ शोर मचाते हो, समाधान नहीं देते।2027 में भी यही फैसला रहेगा—विकास चाहिए, फ्लॉप शो नहीं।
🇮🇳 तिरंगा हमारी शान है, भारत की पहचान है! 🇮🇳
हर घर पर लहराता तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारी निष्ठा, एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है।
#HarGharTiranga#हर_घर_तिरंगा
आइए, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़कर अपने घर, प्रतिष्ठान और कार्यस्थल पर तिरंगा फहराएं
हो तो सब सकता है, बस कांग्रेस ने कभी करने की कोशिश की ही नहीं, मोदी जी ने कोशिश की और देश ने उनका साथ दिया
यही कोशिश कांग्रेस शुरू से करती तो भारत आज विश्वगुरु होता, जो कि कांग्रेस पार्टी हरगिज़ नहीं चाहती थी
तुम्हें धर्मग्रंथ लगे, दुनिया को विज्ञान मिला -
अब तो शर्म छोड़ो और पढ़ लो अपना इतिहास
🔸🔸🔸
तुम्हें बताया गया था कि तुम्हारे ग्रंथ सिर्फ पूजा-पाठ की किताबें हैं। तुम्हें पढ़ाया गया था कि विज्ञान का मतलब सिर्फ न्यूटन, आइंस्टीन और गैलीलियो है। तुम्हें इतना हीन-भावना से भर दिया गया कि तुम खुद अपने शास्त्रों को मिथक कहने लगे। और इसी हीनता का फायदा उठाकर कुछ लोग आज भी हँसते हैं जब हम कहते हैं कि हमारे यहाँ परमाणु और गुरुत्वाकर्षण की बात हजारों साल पहले हो चुकी थी। तो आज उन हँसने वालों के लिए ही ये लेख है, तथ्य के साथ, श्लोक के साथ, ग्रंथ के नाम के साथ। हँसी रोक सको तो रोक लेना, क्योंकि अब तुम्हारी दुनिया के विश्वविद्यालय ही वही पढ़ा रहे हैं जिसे तुम अंधविश्वास कहते थे। और हंसना, कॉमेंट में हंसना। देखती हूं कितना दम है हँसने की।
भारतीय ज्ञान परम्परा कभी धर्म और विज्ञान को अलग नहीं करती थी। हमारे यहाँ ऋषि ही वैज्ञानिक था। प्रयोगशाला मंदिर थी और मंत्र ही फॉर्मूला। पश्चिम ने जिसे बाद में खोजा, हमने उसे पहले देखा, सोचा और लिखा। फर्क सिर्फ इतना है कि हमने उसे दर्शन में लिखा और उन्होंने उसे गणितीय सूत्र में बदल कर पेटेंट करा लिया। हमें इसका दुख नहीं, गर्व है कि बीज हमारे यहाँ का था।
इसकी शुरुआत होती है महर्षि कणाद से। जिन कणाद का वैशेषिक सूत्र आज भारत के साथ-साथ विदेशों के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में भारतीय दर्शन और History of Science के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है, वो दुनिया के पहले परमाणुवादी थे। ग्रीस के डेमोक्रिटस से भी सदियों पहले। उनका वैशेषिक दर्शन केवल अध्यात्म नहीं, शुद्ध भौतिकी है। उन्होंने कहा कि यदि पदार्थ को तोड़ते जाओ तो एक ऐसी अवस्था आएगी जहाँ उसे और नहीं तोड़ा जा सकता, वही 'परमाणु' है। और ये परमाणु नित्य हैं, इनके संयोग से ही सृष्टि बनती है। उन्होंने गति को भी परिभाषित किया और पांच प्रकार बताए - उत्क्षेपण, अवक्षेपण, आकुंचन, प्रसारण और गमन। और सबसे बड़ी बात, उन्होंने 'गुरुत्व' को पदार्थ का स्वाभाविक गुण बताया। उनका वो सूत्र आज भी वैशेषिक सूत्र में दर्ज है -
'संयोगाभावे गुरुत्वात् पतनम्' [वैशेषिक सूत्र ५.१.७]
अर्थात किसी वस्तु के किसी आधार से संयोग के अभाव में वह गुरुत्व के कारण नीचे गिरती है। बताओ, इसमें धर्म कहाँ है? ये शुद्ध फिजिक्स है। इसे धार्मिक किताब कहने वालों को पहले वैशेषिक सूत्र पढ़ना चाहिए।
कणाद ने नींव रखी तो आर्यभट ने उस पर इमारत खड़ी कर दी। 476 ईस्वी में, जब यूरोप में कहा जाता था कि पृथ्वी चपटी है और सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, तब आर्यभट ने आर्यभटीय में लिख दिया -
'अनुलोमगतिनौस्थः पश्यत्यचलं विलोमगं यद्वत्।
अचलानि भानि तद्वत् समपश्चिमगानि लंकायाम्॥'
अर्थात नाव में बैठा व्यक्ति जैसे किनारे के पेड़ों को पीछे भागते देखता है, वैसे ही लंका (लंका का अर्थ जानने के लिए मेरा आगामी लेख पढ़ें) में खड़े व्यक्ति को स्थिर तारे पश्चिम की ओर भागते दिखते हैं, क्योंकि पृथ्वी खुद घूम रही है। उन्होंने पृथ्वी को गोल बताया, उसके व्यास की गणना की, ग्रहण का वैज्ञानिक कारण बताया कि ये राहु-केतु नहीं, चंद्रमा और पृथ्वी की छाया है। जिस सौर-वर्ष को आप आज नासा से 365.2422 दिन मानते हो, आर्यभट ने बिना टेलीस्कोप के 365.2586 दिन बता दिया था। ये कोई मंत्र-तंत्र था या खगोलीय प्रेक्षण?
और फिर आते हैं वो जिनके नाम से ही कुछ लोगों को एलर्जी है - भास्कराचार्य द्वितीय। 12वीं सदी में जब न्यूटन के दादा के दादा भी पैदा नहीं हुए थे, तब भास्कराचार्य ने सिद्धांत शिरोमणि में गुरुत्वाकर्षण को इतना स्पष्ट लिखा कि उसे पढ़कर आंखें खुल जाती हैं। उन्होंने लिखा -
'आकृष्टिशक्तिश्च मही तया यत् खस्थं गुरु स्वाभिमुखं स्वशक्त्या। आकृष्यते तत्पततीति भाति समे समन्तात् क्व पतत्वियं खे॥'
[सिद्धांत शिरोमणि, गोलाध्याय]
अर्थात पृथ्वी में आकर्षण शक्ति है, जिससे वह आकाश में स्थित भारी वस्तु को अपनी शक्ति से अपनी ओर खींच लेती है और वह नीचे गिरती हुई प्रतीत होती है। बताओ, न्यूटन से 500 साल पहले पृथ्वी की आकर्षण शक्ति की बात करना विज्ञान नहीं तो क्या है? और भास्कराचार्य यहीं नहीं रुके, उन्होंने 'तात्कालिक गति' का सिद्धांत दिया। उन्होंने ग्रहों की गति पल-पल कैसे बदलती है, उसकी गणना के लिए जो गणित लगाया, उसे आज की दुनिया Differential Calculus कहती है, जिसका श्रेय न्यूटन और लाइबनिज को दिया जाता है। भास्कराचार्य ने उसे 500 साल पहले ही 'तात्क्षणिक' कह दिया था।
नेपाली मुस्लिम हवा में उड़ रहे थे
औकात भुल गए थे
अतिउत्साह में कांवड़ लेकर बोल बम जा रहे हिंदुओं पर हमला करके 2-3 शिवभक्तों को जान से मार दिया
फिर क्या था, शिवभक्तों का तांडव शुरू
अब नेपाली मुस्लिम देश छोड़कर भाग रहें हैं
मुसलमानो के घरों से इस्लामिक झंडा उतारा जा रहा है, उन्हें साफ साफ चेतावनी दिया गया है गि यदि नेपाल में रहना है तो सनातन संस्कृति का सम्मान करों
अब कट्टरपंथी मुस्लिम प्रेम की बातें कर रहें हैं
उन्हें भाईचारा याद आ रहा है।