Disclaimer)
यह कोई सच्चाई नहीं, बस एक कल्पना की उड़ान है,
दिल दुखाना किसी का, न मेरा यह अरमान है।
इसके पात्र, घटनाएँ और प्रतीक हैं पूर्णतः काल्पनिक, पार्ट वन
चाहतों का ख़ामोश उफ़ुक
ख़ामोशियों में अपनी रूह को लपेट कर रखा,
हर एक गाम पे अब जीना दुश्वार हुआ।
गए थे महफ़िल में कि बहल जाएगा दिल,
वहाँ भी दर्द और पीड़ा का ही अहसास हुआ।
यह उफ़ुक-ए-तमन्ना दर्द से देखती रही मुझे,
चाहतों की ख़ामोशी में ख़ुद से बिछड़ना रास हुआ।
अरमानों का सिंहासन
ईएमआई के चक्कर में फँस गया तोता,
खेत-खलिहान खरीदने का ख्वाब था मोटा।
हर महीने किश्त भरते उड़े जाते हैं होश,
आशा और आत्मा की आस उड़ी खामोश।
✍️LA_AMD_2026
डिस्क्लेमर
यह मात्र कल्पना का सुंदर सा एक जाल है,
न किसी पर लांछन, न कोई यहाँ बवाल है।
व्यथा है कागजों की, न्याय का रूप है कलात्मक,
इसे सच न मान लेना, यह तो बस एक ख़्याल है।
— #LA_AMD_2026)
डिस्क्लेमर
यह मात्र कल्पना का सुंदर सा एक जाल है,
न किसी पर लांछन, न कोई यहाँ बवाल है।
व्यथा है कागजों की, न्याय का रूप है कलात्मक,
इसे सच न मान लेना, यह तो बस एक ख़्याल है।
— #LA_AMD_2026
@LegalAdvisour जनता भूखे मर रही है एटीएम मशीन सुख है चक्कर में यहां लूटने की गंगा बाती जा रही है एक शेर है चंद पैसे की रुपए के चक्कर में सोना पड़ा कफन मिला नहीं तो सुकून की द में सोना पड़ा
मुहावरा:
"दो सौ में सांस गिरवी रखना"
अर्थ: जीवन यापन की मज़बूरी में बहुत ही मामूली मज़दूरी पर जानलेवा मेहनत करना।
LA_AMD_2026
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@nehafolksinger मुहावरा
"कागज़ के 'टेक्स्ट' की चादर ओढ़कर सपनों को दफना दिया,
गले में क्यूआर कोड टांगकर हमें ई-रिक्शा का गुलाम बना दिया!"
LA_A_MD_2026
बाज़ार का सौदा 💧
सुकून खोजने निकले थे हम बाज़ार में,
लूटा गया हमें ठेकेदारी के गुबार में।
जिसका न था कोई मोल, उसे अनमोल बता दिया,
आँसू भी नीलाम हुए इस दौर-ए-व्यापार में।
बे-दाम बहने दो इन मोतियों को गालों पर,
क्यों बेचते हो रूह को इस झूठे इश्तहार में? LA_A_MD_2026
डिस्क्लेमर 🖋️
ज़माना समझ न ले इसे सिर्फ़ एक अफ़साना,
ये मेरी रूह का तराशा हुआ एक कलाम है।
किसी की नक़ल नहीं, न ये हुनर है मुफ़्त का,
मेरे ख़्यालों का इस पर मौलिक एहतराम है।
✍️LA_A_MD_2026
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