वैसे उस पीसी में Windows का कौन-सा वर्जन था?
Windows 95 रिलीज़ हो चुका था, लेकिन उसमें वेब ब्राउज़र बाद में आया।
ज़्यादातर लोग तो Windows 98 पर इंटरनेट चलाते थे। जो 1998 मे रिलाइस हुआ था
वैसे ये सारे Windows सॉफ़्टवेयर भारत की आम दुकानों पर तो 1999–2000 के आसपास मिलने शुरू हुए थे। तो क्या आप इन्हें अमेरिका से सीधे खरीदकर लाए थे?
अगर आपका कंप्यूटर DOS पर था, तो उस पर इंटरनेट कैसे चलता था?
वैसे मैं 7वीं क्लास में DOS पर lingo भाषा सीख रहा था। उसी दौर में मुझे कंप्यूटर से प्यार हो गया था।
पहले तो मैंने आपको नहीं कहा था।
मैं उन फर्जी आईडी वालों से बात कर रहा था जो फालतू कमेंट करते हैं,
भारत में जब ज्यादातर लोगों को गूगल के बारे में भी पता नहीं था, तब से मैं इंटरनेट इस्तेमाल कर रहा हूँ। बात लगभग 1999 की है
क्या पता, अपनी उम्र बताऊँ तो आप भी शायद मुझसे छोटे निकलें
इंटरनेट पर अपने आप को सर्वश्रेष्ठ नहीं समझना चाहिए।
मेरे दादाजी ने 1975 में पहला बौद्ध कार्यक्रम आयोजित किया था और चंबल का पहला बुद्ध विहार बनवाया था।
इसलिए मुझे अच्छी तरह पता है कि आंबेडकरवादी कार्यक्रम कैसे होते हैं। मैं अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हूँ, जो अंबेडकरवादी है
इतने बड़े और समझदार होकर भी आप सव��ल ठीक से नहीं पढ़ पाए, यह देखकर मुझे सच में आश्चर्य होता है
जिम जाने के दौरान मैंने बाबासाहेब आंबेडकर पर लिखी गई यह किताब पढ़ी
Daily Routine of Dr Ambedkar
इसमें बाबासाहेब आ��बेडकर कहते हैं-
“जब भी मैं किसी समस्या के बारे में सोचता हूँ, मेरा पूरा ध्यान उसी पर लग जाता है।
खाते-पीते, चलते-फिरते या बात करते समय भी मेरा दिमाग उसका हल ढूँढ़ने में लगा रहता है।
उस वक्त बाकी सारी चीज़ें मेरे लिए महत्वहीन हो जाती हैं।
शायद यही वजह है कि मैं समस्याओं का सही समाधान खोज पाता हूँ।”
इसी सोच के चलते मैंने भी अपना पूरा ध्यान अपने शरीर पर लगाया और खुद से पूछा— मेरा वजन 110 किलो क्यों है?
मैं फिट क्यों नहीं हूँ?
जवाब ढूँढ़ने शुरू किए, तो जवाब मिलते चल��� गए
जब मैंने शुरुआत की थी तब कैमरे के सामने वही लोग आते थे
जिनके पास सिक्स पैक थे,
बड़ी गाड़ियाँ थीं,
बड़े शहरों की लाइफ थी।
लेकिन आज Vloging सिर्फ looks या luxury की नहीं, knowledge और real personality की game बन चुकी है।
अगर आपके पास असली बात है, अनुभव है, सोच है…
तो कैमरे के सामने आने से मत शर्माइए।
लोग perfection नहीं, real इंसान देखना पसंद करते हैं।
आज एक पोस्ट देखी और सच में दिमाग घूम गया।
अमेरिका के ऑस्टिन शहर की एक 21 साल की कॉलेज स्टूडेंट ने AI से “Maya” नाम का OnlyFans अकाउंट बनाया… और पहले ही महीने में करीब ���36 लाख कमा लिए।
सबसे shocking बात?
जिस लड़की की photos लोग देख रहे हैं… वो असल में है ही नहीं।
“Maya” को 22 साल की psychology dropout दिखाया गया है। उसके 1,247 paid subscribers हैं… और एक fan ने अकेले 1 महीने में करीब ₹1.5 लाख खर्च कर दिए।
अब असली खेल सुनो —
ना कोई real model है,
ना कोई video shoot हो रहा है,
ना कोई इंसान replies कर रहा है।
Messages Claude लिख रहा है,
photos Flux generate कर रहा है,
voice ElevenLabs बना रहा है…
और पूरी “Maya” सिर्फ MacBook की 4 files पर चल रही है।
सबसे crazy चीज़ ये लगी कि पह��े ऐसे AI influencer बनाने में 6 महीने से 1 साल लग जाता था… अब वही चीज़ सिर्फ 4 हफ्तों में बन रही है।
अब इंटरनेट पर जो कुछ दिख रहा है, वो असली है या नकली — ये पहचानना ही मुश्किल होता जा रहा है।
अशोक दास भाई की मैगज़ीन ‘दलित दस्तक’ को मैं कई सालों से अपने घर पर देखता आ रहा था।
बीच में यह मैगज़ीन बंद हो गई थी, लेकिन इसे फिर से शुरू करके उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है।
चंद्रशेखर आज़ाद अमेरिका पहुंच गए हैं।
डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की जन्म उत्सव मनाने
हॉलीवुड स्टाइल में Cadillac Escalade जैसी लग्ज़री कार से एंट्री ली,
जिसकी कीमत लगभग 5–6 करोड़ रुपये बताई जा रही ह���।
अमेरिका ��ें जातिवाद नहीं है
वहां हर व्यक्ति को बराबरी से पढ़ने और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है
बाबासाहेब आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल को हुआ था।
आज 17 तारीख हो गई है।
ग्वालियर जाते समय राजस्थान की सड़कों पर लंबी कतारें नज़र आईं।
न जाने और कितने दिनों तक इसी तरह चलता रहेगा।
हारे का सहारा, बाबासाहेब हमारा
Chandrashekhar Azad Ravan ने बाबा साहब B. R. Ambedkar के संविधान को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे हर घर, हर हाथ और हर दिल तक पहुँचाने का काम किया है।
ये सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि हमार��� अधिकार, सम्मान और बराबरी की पहचान है।
जब-जब आवाज़ दबाने की कोशिश हुई, तब-तब संविधान ने हमें बोलने की ताकत दी है।
@AnjulBamhrolia
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