Demonetisation (2016) - 3 years before Elections
Farm law protest (2021) - 3 years before Elections
NEET Protest (2026) - 3 years before Elections
This govt is lucky to get the buffer time.
ये छात्रों का आंदोलन नहीं है. ये छात्र के भेष में भड़िए हैं.
- BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने ये बात कही है
पहले मोदी सरकार ने छात्रों को पिटवाया, अब BJP के सांसद छात्रों को गालियां दे रहे हैं.
युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता भी है और संकल्प भी। प्रधानमंत्री जी द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट्स के गठन से पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई और कठोर कार्रवाई का निर्णय इसी का प्रतिबिंब है।
पेपर लीक के कारण युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का यह महत्वपूर्ण कदम मील का पत्थर साबित होगा।
So now protests can be ended by claiming concern for protesters’ health and forcibly shifting them to hospitals? If they wanted to be in a hospital, they wouldn’t be protesting.
This weakens the very spirit of democracy. If the government believes protests can be silenced this way, it should remember what happened in 2014.
पिछले 14 दिन से आदिवासी समाज के लोग मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे थे.
वे उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे. फिर खबर आई कि PM ऑफिस ने इनका संज्ञान लिया.
जिसके बाद आज पुलिस ने आंदोलन ही खत्म करा दिया.
खास बात है कि दिल्ली से 600 किलोमीटर दूर हो रहे इस आंदोलन के लिए किसी सेलिब्रिटी ने ना पोस्ट किया, ना ही वीडियो बनाया. क्योंकि इनके पास उतने पैसे नहीं कि ये उनसे पोस्ट करवा सकें.
ऐसा ही हाल स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद का था, जो गंगा के लिए 111 दिन तक भूख हड़ताल किए और मर गए.
उनके पास भी पैसे नहीं थे कि वो सेलिब्रिटी लोगों से पोस्ट करवाकर दूसरे गांधी बन सकें.
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. इसे देश की नदियों को जोड़ने वाली पहली परियोजना बताया गया है. सरकार का कहना है कि इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 13 ज़िलों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ेगी. क़रीब 45 हज़ार करोड़ रुपये की इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी. वहीं प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवज़े की प्रक्रिया अब भी अधूरी और अपारदर्शी है. देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट.
रिपोर्ट-एडिट: विष्णुकांत तिवारी
शूट: लोचन माली
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