@Murphy529388@aajtak अपनी भाषा पर ध्यान दें यह आपके संस्कार प्रदर्शित कर रही है। कांग्रेस ने सार्वजनिक क्षेत्रों को बड़े पैमाने में प्रोत्साहित कर काफ़ी सराहनीय कार्य किया था जिसकी कमी वर्तमान में है।
@gauravbhatiabjp जी बहुत अच्छा, क्या आप यह भी बताएंगे कि आप तब भी यही करेंगे या सहयोग करेंगे जब आप द्वारा बनाए स्मारकों के जमीन के नीचे उत्खनन कर बौद्ध अवशेष मिलेंगे।
@agentsaaho@basicshikcha_4U@CJP_for_India आपको एक तथ्य और समझना होगा कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों में अधिकतर ऐसे होते हैं जिनकी पहली प्राथमिकता शिक्षा ग्रहण नहीं बल्कि परिवार की खेती-बाड़ी, अपने से छोटे भाई बहनों की देखभाल व खाना बनाना आदि होता है जिससे उनके मां-बाप जीवनयापन के लिए दो जून की रोटी का इंतजाम कर सकें।
@AnjulBamhrolia पुलिस को पहले ही अनैतिक व हिंसात्मक कृत के खिलाफ कार्यवाही कर देनी चाहिए थी। ऐसा न होने से लोगों का विश्वास पुलिस पर से हट जाएगा। आशा है इस पर संज्ञान अवश्य लिया जाएगा।
@highcourtadvo क्या तुझे सामाजिक कुरीतियां जैसे सार्वजनिक स्थलों से पानी न पी सकना, दूसरों को अछूत समझना, स्तन टैक्स प्रथा, जातिगत भेद-भाव आदि भी इसी देश में था? यदि मानव है तो एक बार उनके दर्द को भी महसूस कर। वैसे आजादी में सभी का योगदान था पर तुझ जैसे धर्मांधों को कुछ नहीं दिखेगा।
@kalisenachief आपको क्या लगता है सम्पूर्ण भारत व विश्व कूप में है जिन्हें ना तो कुछ दिखेगा और ना कुछ समझ में आएगा। राम और अम्बेडकर की तुलना न करें दोनों अलग-अलग विषय हैं। अम्बेडकर जी इतिहास में दर्ज़ ऐतिहासिक तथ्य है जिसे हम सभी पढ़ते हैं चाहे उन्हें माने या ना माने।
@kalisenachief क्या आप पूना पैक्ट व उसकी भूमिका पर भी अपने विचार दे सकते हैं? संविधान निर्माण में डॉ. बी. आर. अम्बेडकर जी की भूमिका उनकी विद्वता, कानूनी विशेषज्ञता और सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता पर आधारित थी इसलिए उन्हें "भारतीय संविधान के पिता" या "मुख्य वास्तुकार" के रूप में जाना जाता हैं।
@highcourtadvo अम्बेडकर नाम तो सत्य ही है कोई काल्पनिक चरित्र नहीं है। ज़्यादातर हिन्दू अम्बेडकरवादी ही हैं इसके लिए आप तनिक भी चिंता न करें वे जो भी फैसला लेते हैं सही ही लेते हैं।
@highcourtadvo आप सर्वविदित विश्वरत्न संविधान निर्माता डॉ बी आर अम्बेडकर जी की छवि को अस्थिर करने हेतु भ्रामकता फ़ैलाने में काफ़ी मेहनत कर रहे हैं जिसमें आपको निराशा के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा।