अगर मोदी की माँ को गाली देना गलत है,
तो फिर अखिलेश यादव की माँ को गाली देना सही कैसे हो सकता है ?
I hope Akhilesh team is keeping a note of all these people.
@Shubhamshuklamp इस वीडियो को ध्यान से देख कुचला जिसको तू फॉलो करता है वो क्या कर रहा इस वीडियो पर तेरी क्या प्रतिक्रिया है ?
उस बच्ची के वीडियो में तुझे तेरहवीं दिख रही है
इधर तो तेरा रिश्तेदार मोदी जी का पिंड दान कर रहा है
क्या इधर सवाल नहीं करेगा ?
मानसिक गुलाम कुचला
देश को ये मालूम होना चाहिए कि मीडिया हाउस में बैठी पब्लिक ज़्यादातर चुन कर लाई जाती है!
माइक किनके पास ले जाना है, वो भी तय रहता है ताकि सवाल पूछने पर मीडिया और सत्ता के मन मुताबिक़ जवाब मिले। नैरेटिव आसानी से बने!
बताइए, ऐसे आतंकी को किसने पाला-पोसा?
यह स्वतंत्र भारद्वाज है
शान से बता रहा है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट में प्रदर्शनकारी के पिता पर हमला किया - उन्हें 60 टांके लगे और वह मौत के कगार पर थे
307 के अंतर्गत हाफ मर्डर का मामला बनता था. लेकिन वह जेल नहीं गया - रात भर बेख़ौफ़ घूमता रहा
कपिल मिश्रा के एक फोन के बाद उसे राहत मिल गई
आगे बताता है कि कपिल मिश्रा, चिराग पासवान ही नहीं मोदी जी भी उसके “बड़े भाई” हैं, सबका समर्थन प्राप्त है
बात तो ऐसे कर रहा जैसे प्रधानमंत्री ने व्हाट्स एप किया हो। अब मोदी जी पर निर्भर करता है कि वे स्वतंत्र का कितना साथ देते हैं। इसी से पता चल जाएगा कि तीन बार के प्रधानमंत्री के पास कैसे लोग हैं। प्रधानमंत्री की ये हालत हो गई है कि वो ऐसे लोगों के साथ खड़े रहें तो उससे अच्छा है ये कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। जिस कुर्सी पर बैठ कर आप वैज्ञानिक से लेकर समाजसेवी, उद्योगपति से लेकर अपनी पार्टी के कार्यकर्ता की सोहबत पा सकते हैं अगर स्वतंत्र की सोहबत उनके लिए, गृहमंत्री के लिए, चिराग़ पासवान के लिए ज़रूरी बन जाए तो सबको अपना पद छोड़ देना चाहिए। संसद मार्ग थाने का नाम स्वतंत्र भारद्वाज थाना होना चाहिए। दिल्ली पुलिस का नाम स्वतंत्र भारद्वाज पुलिस होना चाहिए।