Why national media going footage to these type of anarchists? This is what they are looking. ये लोग बदनाम हुए पर नाम तो हुआ वाली फिलसोफी वाले है। ignore them.
I do not believe those cockroaches are real leaders. Indians have very short memory. In India many Aandolankari leaders came and forgot. I hope these cockroaches run into same fate cuz they do not represent real GenZ. The crowd was filthy mouth anarchists.
जंतर मंतर के स्टूडेंट लीडर इंटरव्यू देने, पार्टी करने और अब अमित शाह का इंटरव्यू देने में व्यक्त हैं। उधर रांची में झारखंड के आदिवासी स्टूडेंट्स रुखा सूखा खाकर आज फिर रात भर धरने पर बैठेंगे।
छात्रों की हौसला अफजाई के लिए उन्हें पिज्जा बर्गर भेजने वाले कहां गए ?
CJP का एक प्रोटेस्ट ओर हो जाए
देखना है बकी बार PM और पुलिस को कौन गाली देता है
जो माफी मांग रहे है उनकी चूड़ी टाइट हुई है या नहीं है ....?
क्या लगता है कोई गाली देगा ..?🤔
कितना फर्क है नेपाल के हिन्दुओ और भारत के हिन्दुओ में कल नेपाल के 5% मुसलमानों ने नेपाली हिन्दुओ को नेपाल छोड़कर जाने के नारे लगाए ओर एक हिंदू को मार दिया और दोपहर को छोटी आँखों वाले नेपाली हिंदू भाई मुल्लों के घरों पर पत्थरबाजी कर उन्हें नेपाल से भगा रहे हैं ,, 😑😑
पता नही भारत के बड़ी आँखों वाले हिन्दू भाईयों की बड़े वाली आँखे कब खुलेंगी ?? 😳 😒😒
Leader of Cockroaches are affiliated with anarchist Kejriwal and the Jantar Mantar Angolan planned to turn into riot was sponsored by him and many anti national forces.
कॉकरोच Gen Z नहीं हैं।
और Gen Z कॉकरोच नहीं हैं।
50 दिनों तक,
भारत को एक सस्ता, अश्लील ड्रामा बेचा गया।
कुछ देश विरोधी लोग जंतर-मंतर पहुंचे।
उन्होंने प्रधानमंत्री को गाली दी।
उन्होंने भारतीय सेना का अपमान किया।
उन्होंने सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की।
उन्होंने अराजकता पैदा की।
फिर सोशल मीडिया ने घोषणा की:
"देखो। ये है Gen Z की आवाज़।"
सच में?
एक माइक्रोफोन, एक बैरिकेड और गंदी नाली से उधार ली हुई शब्दावली।
पूरी एक पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं करती।
जबकि आउटरेज इंडस्ट्री तीसरे दर्जे की अश्लीलता को फिल्माने में व्यस्त थी,
भारत का असली Gen Z काम कर रहा था।
ग्लासगो में:
शर्मिला धांकर ने गोल्ड जीता।
दिलीप महादु गावित ने गोल्ड जीता।
ज्ञानेश्वरी यादव ने सिल्वर जीता।
मुथुपांडी राजा ने सिल्वर जीता।
सर्वेश कुशारे ने सिल्वर जीता।
गुलवीर सिंह ने सिल्वर जीता।
मुरली श्रीशंकर ने सिल्वर जीता।
मोहम्मद बासिल ने सिल्वर जीता।
वल्लूरी अजय बाबू ने सिल्वर जीता।
बिंद्यारानी देवी ने ब्रॉन्ज जीता।
शिल्पा के. शाइला ने ब्रॉन्ज जीता।
उन्होंने भारत को गाली नहीं दी।
उन्होंने भारत का तिरंगा लहराया।
और उनके गर्व से भरे गालों पर आंसू की एक बूंद बह गई।
फिर आया इंटरनेशनल मैथमेटिकल ओलंपियाड।
एबेल जॉर्ज ने गोल्ड जीता।
आरव गुप्ता ने गोल्ड जीता।
कणव तलवार ने सिल्वर जीता।
संजना चाको ने सिल्वर जीता।
बैरव मुरुगन ने सिल्वर जीता।
श्रेया शांतनु ने सिल्वर जीता।
न कोई तोड़फोड़।
न कोई गाली-गलौज।
न कोई अश्लीलता।
सिर्फ कड़ी मेहनत।
सिर्फ अनुशासन।
सिर्फ माँ भारती के लिए।
फिर शतरंज को देखिए।
डी. गुकेश।
आर. प्रज्ञानानंद।
आर. वैशाली।
दिव्या देशमुख।
दूसरे खेलों को देखिए।
नीरज चोपड़ा।
लक्ष्य सेन।
अंतिम पंघाल।
पलक गुलिया।
सूर्यवंशी।
खेल से आगे देखिए।
युवा भारतीय सैटेलाइट बना रहे हैं।
AI सिस्टम डिज़ाइन कर रहे हैं।
रोबोटिक्स में काम कर रहे हैं।
रक्षा तकनीक में प्रवेश कर रहे हैं।
स्पेस स्टार्टअप बना रहे हैं।
सेमीकंडक्टर बना रहे हैं।
ऐसी समस्याओं को हल कर रहे हैं जिनका नाम तक कॉकरोच नहीं ले सकते।
ये है Gen Z।
न आलसी।
न सांस्कृतिक रूप से कंगाल।
न बौद्धिक रूप से खाली।
न हर बात पर अपमानित होने वाले।
वे मिलेनियल्स से ज्यादा समझदार हैं।
तकनीकी रूप से ज्यादा सक्षम हैं।
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं।
और उस कैरिकेचर से कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं जो हमें बेचा गया।
तो, मेरे प्यारे दोस्तों,
Gen Z के नाम को भीड़ के हवाले मत करो।
जिन लोगों ने देश को गाली दी, वे हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करते।
उन्हें गुंडा कहो।
उन्हें उपद्रवी कहो।
उन्हें परजीवी कहो।
उन्हें अराजकतावादी कहो।
लेकिन उन्हें भारत का भविष्य मत कहो।
असली Gen Z मेडल लेकर चल रहा है।
समीकरण लेकर चल रहा है।
रैकेट लेकर चल रहा है।
सैटेलाइट लेकर चल रहा है।
तिरंगा लेकर चल रहा है।
दूसरे लोग तीसरे दर्जे के पोस्टर लेकर चल रहे थे।
शोर को बुद्धिमत्ता समझ बैठे।
सिर्फ लाइक्स और फर्जी फॉलोअर्स के लिए।
वे Generation Z नहीं हैं।
वे Generation Zombie हैं।
उनका महिमामंडन मत करो।
उन्हें बेनकाब करो।
उनके आचरण को खारिज करो।
गाली-गलौज की उनकी राजनीति को अलग-थलग करो।
क्योंकि भारत में युवाओं की समस्या नहीं है।
भारत में कैमरे की समस्या है।
कैमरा बार-बार नाली की तरफ घूम जाता है।
जबकि एक पूरी पीढ़ी सितारों तक पहुंचने में व्यस्त है।
@ocjain4 Indian Hindus are now awake. They are slowly repeating the w mistake they made 1000 years ago when first time Muslims Muslim entered in india and since then we were under some non Hindu rulers.
@ajeetbharti@bhargaw_arun यह सब वही केजरीवाल वाला पुराना प्रयोग है, जिसे देश पहले भी देख चुका है। काठ की हांडी दोबारा नहीं चढती, चाहे मारीच हिरण बनकर आए या कौवा, देश की जनता अब केजरीवाल को पहचान चुकी है।
2013 में मनमोहन सिंह यानी कुख्यात अनर्थ शास्त्री प्रधानमंत्री थे
दुनिया में कोई युद्ध का माहौल नहीं था
क्रूड की सप्लाई चेन की गैस की सप्लाई चेन की कोई समस्या नहीं थी
फिर भी गांधी परिवार को देश को लूटने की ऐसी छूट दे दी गई देश का खजाना गांधी परिवार ने इतना खाली कर दिया कि उस वक्त वित्त मंत्री पी चिदंबरम को अपील करना पड़ा की देशवासियों सोना मत खरीदो कम से कम 6 महीने तक एक ग्राम सोना मत खरीदो
और पेट्रोलियम मंत्री को देश से अपील करनी पड़ी कि अगले 6 महीने तक आप लोग डीजल पेट्रोल बहुत कम इस्तेमाल करिए
सोचिए आज युद्ध के माहौल में जो मोदी जी के अपील पर कांग्रेसी चमचे और कांग्रेस के फेके टुकड़े पर पलने वाले इनफ्लुएंसर लहंगा और घाघरा उठाकर नाच रहे हैं वह मनमोहन सरकार के इस अपील पर चुप क्यों थे
पत्रकार :- अभी एक सरकारी रिपोर्ट में पता चला है कि हिंदुओं की जनसंख्या 8% घट गई है और मुसलमानो की जनसंख्या 43% बढ़ गई है इस पर आपका क्या कहना है ?
दादी की नाक वाली / पिंकी दीदी :- यह सवाल आपको पूछने के लिए किसने दिया है ??
पत्रकार:- यह सवाल मेरी ऑफिस से मुझे दिया गया।
दादी की नाक वाली :- फिर अपने ऑफिस वालों से पूछो कि उनको यह सवाल किसने दिया है ? और बेशर्मी से दांत चियारते हुए चली गई ।
हिंदुओं इस नीच फर्जी ईसाई परिवार की हकीकत देख लो हिंदुओं की घटती जनसंख्या से इनका कोई प्रॉब्लम नहीं है बल्कि यह दोगले चाह रहे हैं कि हिंदुओं को भारत का दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाए क्योंकि यह परिवार खुद गैर हिंदू है।
तमिलनाडु का ईसाईकरण होने से कोई नहीं रोक सकता अब...
तमिलनाडु में 88% हिंदू जनसंख्या होने के बावजूद भी एक ईसाई को मुख्यमंत्री बना दिया ,ये इस बात का सबूत है कि हिंदू इतने सालों तक गुलाम क्यों रहा...
हिंदू अपनी बरबादी का खुद ही कारण है...
2013 - कोई युद्ध नहीं, कोई वैश्विक संकट नहीं, फिर भी वित्त मंत्री ने भारतीयों से सोना न खरीदने का आग्रह किया। उन्हें सुधारवादी कहा गया।
2026 - वैश्विक युद्ध जैसी स्थिति। प्रधानमंत्री मोदी ने सोना न खरीदने का आग्रह किया। देश बेच दिया, उन्हें अक्षम बताया गया, वगैरह-वगैरह।