हालाँकि मैं मोदी जी को ज्यादा नहीं जानता लेकिन एक बात मैं जानता हूँ — जो कुछ भी ड���नाल्ड ट्रंप कर रहे हैं और जिस तरह से वो भारत का अपमान कर रहे हैं, नरेंद्र मोदी ज्यादा देर तक चुप नहीं बैठेंगे। बहुत जल्द वो अपनी चुप्पी तोड़ेंगे और इसका दोष नेहरू जी पर डाल देंगे।
If 5 Rs biscuit has all details, why not 100 Cr road?
'QR codes' should be added on all roads to show details like who built the road, cost involved, ministers, babus names, etc.
Time to #KnowYourRoad
5 Rs Parle G 100 Cr Road
कितनी अजीब और कायराना बात है - महाराष्ट्र में आपकी खुद यानी भाजपा की ही सरकार है फिर भी वहाँ जाकर क्यों नहीं इस पुण्य कार्य को अंजाम देने की हिम्मत हो रही? #languagecontroversy
जिस महाराष्ट्र में 68.8 % लोग मराठी बोलते हैं वहां MNS को 1.5% वोट मिले। ना 1 विधायक ना सांसद , बेटे तक हार गया।
सच यही है कि वो राज ठाकरे के पास ना राज है ना वो असली महाराष्ट्र को Represent करते। वो बस नफ़रत की राजनीति से अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
धर्म और जाति में बाटने के बाद
अब वे हमे भाषा से बांट रहे है !
आने वाले वर्षों के लिए मुद्दे बनाये जा रहे है
दशकों से धर्म जाति के बाद
अब दशकों तक भाषा के नाम पर
राजनीति का गंदा खेल ना हो
इसीलिए रोक दो ये सब
#LanguagePolitics#language
कितना ज़्यादा खतरनाक है ये🧐
गुजरात में वडोदरा और आणंद को जोड़ने वाला पुल ही बीच से टूटा. कई गाड़ियाँ नीचे गिर गईं. 9 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की ख़बर.
@CMOGuj ज़िम्मेदारी लीजिए और बताइए कौन कौन दोषी है इन मौतों के लिए?
लड़ाई तो हम साइबर सिक्योरिटी, AI डिफेंस सिस्टम,पॉलिसी& गवर्नेंस की ही लड़ना चाहते हैं।
लेकिन कुछ धूर्त लोगों की चिरकुटई से आज भी हमे सड़क बिजली और अस्पताल जैसी चीज़ों से जूझना पड़ रहा है।
ऑस्ट्रेलिया के शहर कानपुर में कचरे में खाना ढूंढते कंगारू ,
व��ां की प्रदेश सरकार कंगारुओं की देखभाल के लिए बहुत पैसा खर्च करती है लेकिन जानवरों के हिस्से का सारा खाना अधिकारी खा जा रहे ।
#YeThikKarkeDikhao
मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों के हाल देखिए!
70,000 शिक्षकों की भारी ��मी हैं और जो बचे हैं उनमें से 15,000 से ज़्यादा शिक्षक बाबूगिरी करने में व्यस्त हैं, तो पढ़ाई किसके भरोसे?
हिंदी के शिक्षक कॉमर्स पढ़ा रहे हैं, मिडिल स्कूल के मास्टर 12वीं की गणित पढ़ा रहे हैं।
न कोई पढ़ाई की तैयारी, न विषय के अनुसार शिक्षक! मानो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था 'काम चलाओ' नीति के तहत चल रही है।
शिक्षा मंत्री खुद दो महीने पहले 'अटैचमेंट खत्म करो' का आदेश दे चुके हैं, लेकिन फाइलें धूल खा रही हैं और लाखों विद्यार्थियों का भविष्य भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
भाजपा सरकार की प्राथमिकता में बच्चों की शिक्षा नहीं, बस दिखावे की घोषणाएं और आंकड़ों की जादूगरी है।
.
.
.
@DrMohanYadav51 @udaypratapmp @schooledump
सही डॉक्टर का चुनाव कैसे करें:-
1.अगर किसी भी क्लिनिक या अस्पताल का प्रचार कोई social media influencer कर रहा हो तो वहाँ कभी न जाएँ।
याद रखें, मार्केटिंग के एक-एक पैसे का बोझ मरीजों पर ही पड़ता है।
अगर किसी भी क्लिनिक को प्रचार के लिए influencer की ज़रूरत पड़ रही है तो वहाँ डॉक्टरों का स्तर न्यूनत�� होगा।
2.ज़्यादातर Google रिव्यू फेक रहते हैं। उस पर आँख बंद कर भरोसा न करें।
3.मरीज को क्या बीमारी है, वो बीमारी क्यों हुई, इलाज के क्या-क्या उपाय हैं, इलाज न कराने से क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं —
ये सारी जानकारी अगर डॉक्टर न दें या न दे पाएँ तो second opinion लीजिए।
4.किसी भी डॉक्टर का अगर अपना फार्मेसी है तो वो चाहेंगे कि आप वहाँ से दवाई लें।
ये चाहने में कोई दिक्कत नहीं।
लेकिन “दवाई यहीं मिलेगी” या “दवा यहीं से लेनी पड़ेगी” — अगर वो ये कहते हैं तो इसमें दिक्कत है।
फिर डॉक्टर बदल लीजिए।
इसी तरह अगर कोई डॉक्टर कहे कि बस उनके यहाँ की लैब की रिपोर्ट ही मान्य होगी तो ऐसे डॉक्टर से बचें।
5.इलाज की गारंटी देने वालों से दूर रहिए।
ज़्यादातर वे गड़बड़ निकलते हैं।
6.Second opinion लेने की बात पर अगर कोई डॉक्टर भड़क उठे तो वो डॉक्टर ठीक नहीं।
7.ज़्यादातर समय, ख़ासकर ICU में गंभीर मरीज के बारे में लोग अक्सर डॉक्टर से सवाल करते हैं कि मरीज़ कब तक ठीक हो जाएँगे।
इस सवाल का जवाब किसी डॉक्टर के पास नहीं होता। वो भविष्यवक्ता नहीं हैं कि भविष्यवाणी करें।
मरीज़ की स्थिति कैसी है और जो इलाज चल रहा है उससे स्थिति में क्या बदलाव आ रहा है —
अगर डॉक्टर ये अच्छे से बता रहे हैं तो ठीक है।
8.डॉक्टर की डिग्री ज़रूर देखें।
डिग्री अच्छे से उनके पर्चे पर लिखी होनी चाहिए।
9.इलाज के खर्च को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए।
10.अगर डॉक्टर कोई जाँच या दवा लिखते हैं तो ज़रूर पूछें कि वो जाँच किस लिए लिखी जा रही है।
अच्छे डॉक्टर ज़रूर बताएँगे कि किस जाँच या किस दवा का क्या उद्देश्य है।
ये सारी चीज़ें प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों पर लागू होती हैं।
सरकारी अस्पतालों में समय के अभाव के कारण डॉक्टर ज़्यादा समय नहीं दे पा��े,
लेकिन जो बुनियादी चीज़ें हैं वो उन्हें ��ी देनी चाहिए।