आर्य समाज को ये बहुत पहले समझ में आ गय�� था। आर्य समाजी इस ग्रंथ को हाथ नहीं लगाते क्योंकि आर्य समाज का प्रोजेक्ट सभी जातियों को इकट्ठा करके राजनीतिक हिंदू बनाना था। रामचरितमानस उनके लिए अनुपयोगी था। तब तक तय हो चुका था कि आने वाले दिनों में वोट से सरकारें बनेंगी।
"जात कुटो, चमार पीटो। हर हर महादेव!"
जातिगत नफरत की इंतहा देखिए। मिर्जापुर, यूपी में कुछ गुंडे SC समुदाय को पीटने की धमकी दे रहे हैं। 'हर हर महादेव' कहते हुए इसका महिमामंडन कर रहे हैं। यहां पुलिस भी मौजूद है पर इन्हें कोई डर नहीं।
क्या आपकी अपनी @bspindia की सरकार में,आदरणीय @mayawati जी के शासन में हमारे समाज को ऐसे सुरक्षा की ज़रूरत पड़ी थी?क्या तब खौफ में रहना पड़त�� था?नहीं,क्योंकि तब आप हुक्मरान थे।लेकिन आज जातिवादी राजनीति हमारे समाज को ज़ुल्म और शोषण के अंधकार में धकेल रही है,जो अब बर्दाश्त नहीं होगा
नारी सशक्तिकरण की आदर्श प्रतीक,त्याग, बलिदान और तपस्या की प्रतिमूर्ति,
बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी के संघर्ष की साथी, माता रमाबाई भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन
कोई मुझे बताए कि राम चरित मानस से कुछ पंक्तियां हटा देने से हमारे ऊपर हुए अत्याचार, शोषण को स्वीकार लिया जाएगा?
समतामूलक समाज के लिए
हमारे नेताओं ने कहा है संविधान हमारा ग्रंथ और ह��ें संविधान से छेड़छाड़ मंजूर नहीं।
2. शासक वर्ग भी संतगुरु रविदास जी को अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की ख़ातिर केवल उनको म���था टेकने का कार्य न करे, बल्कि साथ ही, उनके गरीब व दुःखी-पीड़ित अनुयाइयों के हित, कल्याण एवं उनकी भावनाओं का भी ख़ास ख़्याल रखे, यही उनको सच्ची श्रद्धांजलि। 2/2
1. सभी लोगों को ’मन चं��ा तो कठौती में गंगा’ का अमर अध्यात्मिक संदेश देने वाले महान संतगुरु रविदास जी की जयन्ती पर उन्हें शत्-शत् नमन व श्रद्धा सुमन अर्पित तथा देश एवं दुनिया में रहने वाले उनके समस्त अनुयाइयों को मे��ी व बी.एस.पी की ओर से भी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। 1/2
समरसता और आपसी भाईचारे को ही स��्चा धर्म मानने वाले महान समाज सुधारक और कवि, संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
संत रविदास जी ने सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में एक नई चेतना जगाई।
गुरु रविदास जयंती की सभी देशवासियों को शुभकामनाएं। श्रम को ही ईश्वर मानने वाले संत रविदास ने सबके उत्थान तथा जाति-धर्म के भेदभाव से मुक्त समतामूलक समाज की कल्पना की थी। सभी देशवासी उनकी सामाजिक समरसता की शिक्षाओं को अपने जीवन में ढालें, यह मेरी कामना है।
4. वैसे भी यह जगज़ाहिर है कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि के आत्म-सम्मान एवं स्वाभिमान की क़द्र बीएसपी में ही हमेशा से निहित व सुरक्षित है, जबकि बाकी पार्टियाँ इनके वोटों के स्वार्थ की खातिर किस्म-किस्म की नाटकबाजी ही ज्यादा करती रहती हैं।
3. साथ ही, सपा प्रमुख द्वारा इनकी वकालत करने से पहले उन्हें लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस के दिनांक 2 जून सन् 1995 की घटना को भी याद कर अपने गिरेबान में जरूर झाँककर देखना चाहिए, जब सीएम बनने जा रही एक दलित की बेटी पर सपा सरकार में जानलेवा हमला कराया गया था।
2. इतना ही नहीं, देश के अन्य राज्यों की तरह यूपी में भी दलितों, आदिवासियों व ओबीसी समाज के शोषण, अन्याय, नाइन्साफी तथा इन वर्गों में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों आदि की उपेक्षा एवं तिरस्कार के मामले में कांग्रेस, भाजपा व समाजवादी पार्टी भी कोई किसी से कम नहीं।
1. देश में कमजोर व उपेक्षित वर्गों का रामचरितमानस व मनुस्मृति आदि ग्रंथ नहीं बल्कि भा���तीय संविधान है जिसमें बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनको शूद्रों की नहीं बल्कि एससी, एसटी व ओबीसी की संज्ञा दी है। अतः इन्हें शूद्र कहकर सपा इनका अपमान न करे तथा न ही संविधान की अवहेलना करे।
3. शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक व पंजाब के पूर्व सीएम श्री प्रकाश सिंह बादल जी की अच्छी सेहत के साथ उनकी लम्बी उम्र की कुदरत से कामना। शिअद-बीएसपी गठबंधन को बनाने तथा उसे मजबूती प्रदान करने में उनका योगदान सराहनीय। गठबंधन को उनका आशीर्वाद पहले की तरह ही पूरी मजबूती से बरकरार।
2. श���अद व बीएसपी गठबंधन भरोसेमन्द, जिसकी ओर जनता की नज़र। लोकसभा में इसके अच्छे रिज़ल्ट से देश की राजनीति में बेहतर तब्दीली संभव। पहले कांग्रेस व अब आप पार्टी सरकार के कार्यकलापों व वादाख़िलाफी आदि से जनता दुःखी। भाजपा की ज���गाड़ वाली निगेटिव राजनीति भी लोगों को नापसन्द।