मात्र चार मिनट में मुल्ला जी ने कॉकरोचों की हैसियत को बयां कर दिया |
जिनको लग रहा हो। कि कॉकरोच भारत को नेपाल बना देंगे वह ज्यादा नहीं तो इस वीडियो को देख लेना |
और रही बात भीड़ के दम पर उपद्रव करने की तो जिस दिन राष्ट्रवादी सड़कों पर ���तर आए उस दिन सड़कें छोटी पड़ जाएंगी |
ध्रुव राठी के लंदन विरोध प्रदर्शन में एक बांग्लादेशी व्यक्ति की चौंकाने वाली मांगें:🤯
**प्रश्न:** आप बांग्लादेश से होने के बावजूद भारतीय विरोध प्रदर्शन में क्यों आए?
**व्यक्ति:** हाँ, मैं बांग्लादेश से हूँ, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल में रह रहा था। हालांकि, ज्ञाने�� कुमार के तहत किए गए SIR के कारण मुझे निर्वासित कर दिया गया।
**प्रश्न:** ��ो आपकी मांगें क्या हैं, और क्या आप CJP का समर्थन करते हैं?
**व्यक्ति:** मैं CJP का समर्थन करता हूँ, और मैं भारत में शासन परिवर्तन चाहता हूँ ताकि मैं पश्चिम बंगाल लौट सकूँ, जहाँ मैं ममता दीदी की सरकार के तहत रहता था।🥲
धन्यवाद, ध्रुव राठी, इस लंदन विरोध प्रदर्शन के लिए। अब मुझे पता चल गया कि मुझे BJP को वोट क्यों देना चाहिए और ज्ञानेश कुमार का समर्थन करना चाहिए।🙏
महुआ मोइत्रा बंगाल के चीफ इलेक्टोरल ऑफ़िसर को वोट चोर बता रही थीं।
उन्होंने महुआ पर मानहानि का केस ठोक दिया।
महुआ कोर्ट को एक सबूत नहीं दे पायीं वोट चोरी का।अब सारे ट्वीट डिलीट करने का आदेश दिया गया है।
सबूत ढेले भर का है नहीं लेकिन आरोप फुल लगाकर माहौल बनाना है बस।
गजबे है।
74 रुपए की दवा 4981 रुपए में बिक रही
56 रुपए का इंजेक्शन 3 हजार से ज़्यादा में मिल रहा
210 रुपए का एंटीबायोटिक 9702रुपए का
ये रिपोर्ट देखकर दंग रह जाएँगे।
लंबी लिस्ट है कि कैसे दवा के नाम पर आम आदमी को भयंकर लूटा जा रहा है।
PM @narendramodi जी कुछ कीजिए। इस डकैती को रोकिए
तीस्ता शीतलवाड़ में ऐसी क्या खास बात थी, जिसे जमानत देने के लिए छुट्टी के दिन दो बार बेंच गठित कर दिया गया था।
दो न्यायाधीश की बेंच ने अलग-अलग फैसला दिया और जमानत नहीं हो पाई।
तुरंत 3 जजों की बेंच गठित की गई।
रात को 10:00 बजे तीस्ता शीतलवाड़ को जमानत दे दी गई।
हाई कोर्ट में नियमित मुकदमा कब शुरू होगा? भगवान ही जाने।
कौन कहता है कानून की न���र में सब बराबर है?
ये वीडियो देखकर आपका खून खोल उठेगा
कांग्रेसी पुलिस की लात मार रहे..😡
अमित शाह जी पुलिस क्या विपक्षियों का मार
खाने के लिए हे क्या इसी लिए उन्हें वर्दी दी हे..?
आपने एक्शन नहीं लिया तो
इतिहास में लिखा जाएगा कांग्रेसी पुलिस को मार रहे थे और मोदी शाह डर के मारे कुछ न कर सके
हिंदुस्तानके सबसे छोटी उम्रके नए IAS और IPS ऑफिसर का नाम जानकर आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे...⁉️⁉️
IAS: अंसार शैख, उम्र 21 वर्ष,
IPS: सफीन हसन, उम्र 21 वर्ष.
ना ना चौंकिए मत:
👇👇
जिस रफ्तारसे शांतिप्रिय कौम IAS और IPS बन रहे है, तो वह दिन दूर नही जब आपके यहांके DM, SDM, पुलिस अधिकारी सब यही होंगे...!!
और इस गलतफहमी में भी न रहे कि ने���ा और Politicial Parties देश चलाते है.
देश चलाते है ये IAS और IPS ऑफिसर.
नेता और पॉलिटिकल पार्टी तो केवल कटपुतली होती है. जो हर पांच साल में बदलते रहते हैं और ये सरकारी कर्मचारी केवल रिटायरमेंट के बाद ही जाते है।
3 मि.09 से.का संलग्न व्हिडिओ देखे. ये आपको अंदर तक झंझोर देगा.
इसका राज छुपा है.....
UPSC के उर्दू वाले प्रश्नपत्त्रों में !
🙏🙏
इंडियन एक्सप्रेस का शर्मनाक यू-टर्न!
एजेंडा चलाने वाले अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने, जिसने 22 सितंबर के अपने संस्करण में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विवाद खड़ा करके ज्ञानेश कुमार को बदनाम करने की कोशिश की थी, मात्र चार दिनों के भीतर एक शर्मनाक यू-टर्न ले लिया है।
आज—यानी 26 सितंबर, 2026—के संस्करण में एक्सप्रेस ने अपने 'एक्सप्लेन्ड' सेक्शन में एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें संकेत दिया गया है कि पहले जो कुछ कहा गया था वह गलत था और एक त्रुटिपूर्ण निष्कर्ष की ओर ले गया।
यह लेख दामिनी नाथ ने लिखा है, जो नियमित रूप से चुनाव आयोग को कवर करने वाली रिपोर्टर हैं।
'एक्सप्रेस' का स्पष्टीकरण
इस लेख में, दामिनी नाथ ने कहा कि 'जब से दो अतिरिक्त आयुक्तों को शामिल किया गया ���ै—यानी 1993 से—तीनों आयुक्तों के बीच लगातार मतभेद उत्पन्न होते रहे हैं। हालांकि, चर्चा के माध्यम से मामलों को सुलझाना और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करना हर बार अपनाई जाने वाली मानक प्रक्रिया रही है।' उन्होंने यह दिखाने के लिए शेषन, गोपालस्वामी, लवासा और अन्य लोगों जैसे उदाहरण भी दिए कि ये मतभेद कभी-कभी सार्वजनिक हो गए थे।
उनके अनुसार, एसआईआर से संबंधित सभी प्रस्तावों को तीनों आयुक्तों के हस्ताक्षर के साथ सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी। इसलिए, इस मामले पर अब विवाद का कोई कारण नहीं है।
एक तरह से, यह राहुल गांधी जैसे सतही, अज्ञानी नेताओं के लिए एक करारा तमाचा है।
यहां यह भी ध्यान देने योग्य है कि 22-09-2026 को आयोग पर कीचड़ उछालने वाला लेख लिखने वाली रितिका चोपड़ा ने इससे पहले कभी भी आयोग की खबरें कवर नहीं की थीं।
इससे साफ पता चलता है कि द इंडियन एक्सप्रेस ने जानबूझकर पहले यह एजेंडा-प्रेरित लेख प्रकाशित किया और बाद में प्रतिक्रिया से खुद को बचाने के लिए आज का यह स्पष्टीकरण छापा।
क्या सीईसी को गाली देने वाले सभी लंपट तत्व अब माफी मांगेंगे?
इन राष्ट्रविरोधी तत्वों और इस दो कौड़ी के, उपद्रव-भर की कीमत वाले अखबार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों �� शुरू की जाए?
पप्पू चरसी यानी राहुल गांधी कांग्रेसी कुत्तों के बीच में शेर की खाल ओढ़ कर हुए कहता है कि मैं राहुल गांधी हूं राहुल सावरकर नहीं हूं मैं माफी नहीं मांगूंगा
लेकिन कल चुपचाप इस पप्पू चरसी ने दूम हिलाते हुए पिछवाड़ा रगड़ते हुए शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान से माफी मांग लिया
और यह राहुल गांधी की अब तक की आठवीं माफी है
झाबुआ की रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि पन��मा पेपर में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम है
कार्तिकेय चौहान सीधे कोर्ट में गए मानहानि का केस किया पहले तो राहुल गांधी ने पैसे देकर मामला खत्म करने की कोशिश की
लेकिन कार्तिकेय चौहान अड़ गए बोले मुझे पैसा नहीं चाहिए या तो तुम सबूत दो कि मेरा नाम पनामा पेपर में है या लिखित में मुझसे माफी मांगो
और अंत में कल राहुल गांधी ने कोर्ट में लिखित में यह कहा कि वह कार्तिकेय चौहान से माफी मांगते हैं उन्होंने झाबुआ में जो कुछ कहा वह गलतफहमी में कहा इस पर उन्हें अफसोस है और वह चाहते हैं कि कार्तिकेय चौहान मेरी माफी को स्वीकार करके मामला खत्म कर दें और कार्तिकेय चौहान ने राहुल गांधी की लिखित माफी नाम�� स्वीकार कर ली
तो कांग्रेसी कुत्तों तुम्हारा मालिक भी तुम ही लोगों के बीच का ही अल्सेशियन नस्ल का है
यह कभी कोई शेर की खाल ओढ़ कर तुम लोगों के सामने दहाड़ने लगता है और तुम लोग इसको शेर समझ लेते हो
जापान पश्चिमी देशों की नीतिपर नहीं चलेगा।
हम मुस्लिम माइग्रेंट्स को स्वीकार नहीं करेंगे।
अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को बाहर निकालने का काम करेंगे। जिनका वीजा समाप्त हो गया है, वापस नहीं गए, वे हमारे लिए घुसपैठिए हैं।
; जापानी प्राइम मिनिस्टर
सर्वोच्च न्यायालय के मुख���य नयाधीश माननीय सूर्यकान्त साहब ने यूजीसी, आरक्षण, और sc st act क़ो एक लाइन में निपटा दिया,
धन्यवाद सर
बंदे में है दम #CJI की #UGC मामले पर सुनवाई के दौरान पूरी टिप्प��ी पढ़िए / जिसे पढ़कर कंचना, निर्देश, प्रियंका, राजकुमार भाटी, नीले टाटी इत्यादि की आँखे फट के बाहर आ गईं :-
CGI की टिप्पणी - हम जातिविहीन समाज चाहते हैँ, आप क्या देश को भूतकाल में ले जाना चाहते हैँ ? गाइडलाइन्स एक ही पक्ष को ध्यान में रखकर बनाई गई हैँ #सूर्यकान्त जी
वकील के जिरह पर :- जाति की पूरी व्यवस्था आपने ब्राह्मणों पर मढ़ कर समाज में नफरत घोल दी है, क्या मुस्लिमों की जातियां भी ब्राह्मणों ने बन���ई है? ईसाई में जातियां भी ब्राह्मणों की दें है? बौद्ध, सिख, जैन क्या सभी की जातियां ब्राह्मणों ने बनाई है? अगर ब्राह्मणों की जातियों से इतनी दिक्कत है तो आज ही अपने नाम से जाती हटा लीजिये ( #suprimeCaurt ) कौन आपको रोकेगा? कौन आपको अपने नाम के आगे जाति लगाने के लिए विवश कर रहा है?
स्टे देते समय :- अगर एक समाज खुद को IAS, IPS, CJI, President, PM बनकर भी खुद को शोषित ही रखना चाहता है तो इसमें गलती ब्राह्मणों की नहीं बल्कि उसकी अपनी मानसिकता की है ।
अद्भुत दृश्य था कोर्ट में , दलील और समर्थन पक्ष के लोगो के चेहरे से हवाईया उड़ी थी ।
✍️ भगवान सिंह
भारत में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद और मेरिट की लड़ाई के बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।
अब देश के मशहूर इनवेस्टर अक्षय श्रीवास्तव ने देश के लाखों जनरल कैटेगरी के छात्रों को सलाह दी है कि उनमें काबिलियत है और दुनिया के कई ऐसे देश हैं जहां उन्हें बेहतरीन नौकरियां मिल सकती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि 'अगर आपको देश से बाहर जाने का मौका मि��े तो बिना सोचे चले जाएं।'
अक्षय श्रीवास्तव ने तर्क दिया है कि कोई भी राजनीतिक दल सत्ता में आए भारत में आरक्षण खत्म नहीं ह��ने वाला है। ऐसे में मेरिट पर भरोसा करने वाले छात्रों को UAE, थाईलैंड और जापान जैसे देशों में अपने लिए वित्तीय आजादी की राह तलाशनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया है कि कई देशों में नौकरी करने वाले लोग ही नहीं मिल रहे हैं और उन्हें हूनरमंद और काबिल लोनों की जरूरत है तो जनरल कैटोगिरी के छात्र उन देशों की तरफ रूख कर सकते हैं। अक्षय श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है 'अगर आपको कभी विदेश जाने का मौका मिले तो जरूर जाएं। बिना सोचे-समझे जाएं। यह बात खासकर उन जनरल कैटेगरी के छात्रों के लिए सही है जो मेरिट के आधार पर मुकाबला करते हैं।' उन्होंने आगे लिखा है 'देखिए कोई भी राजनीतिक पार्टी सत्ता में आए आरक्षण जैसी चीजें खत्म नहीं होने वाली हैं। जैसे-जैसे रिसोर्स कम होंगे मुफ़्त की चीजें यानि फ्रीबीज बढ़ेंगी। इसलिए राजनीति पर उम्मीदें न रखें।'
अक्षय श्रीवास्तव ने आगे लिखा है 'आपका ए��मात्र असली सहारा आपकी मेहनत और आपकी कमाई है। आपको अपने लिए मौके खुद बनाने होंगे। सरकार आपके लिए ऐसा नहीं करेगी। सबसे पहले आर्थिक रूप से मजबूत बनें। विदेश में रहने से आपको बहुत तेजी से आर्थिक आजादी मिल सकती है। एक बार जब आप ऐसा कर लें तो जब चाहें भारत वापस आ सकते हैं।।
अक्षय श्रीवास्तव का यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। क्या आप अक्षय श्रीवास्तव जी से सहमत है??
जाह्नवी कपूर ने IIT बॉम्बे मुद्दे पर उन्होंने स्टोरी डालकर प्रोफेसर का साथ दिया और Gen Z की सोच पर सवाल उठाया।
उनका कहना ��ै — “Gen Z इतनी ब्रेनवॉश्ड हो गई है।”
कुछ दिन पहले यही लोग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे, कह रहे थे कि पेपर लीक से छात्रों को नकल करने दिया गया।
अब एक प्रोफेसर की गिरफ्तारी मांग रहे हैं क्योंकि उन्होंने एक छात्र को ChatGPT से नकल नहीं करने दी। यह पीढ़ी खुद को खो रही है।”
सच यही है। खुद Gen Z होकर भी IIT बॉम्बे में प्रोफेसर के साथ जो हो रहा है, उसे देखकर शर्म आती है।
🚨 IIT बॉम्बे के निदेशक ने इस्तीफा दिया, लेकिन यह बातचीत पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर गई।
छात्रा: "सर, आपको अंदाज़ा भी नहीं है कि छात्रों पर कितना दबाव होता है।"
प्रो. शिरीष केदारे: "ठीक है, तो क्या हम तुम्हारे लिए नकल को कानूनी बना दें ताकि दबाव न रहे? हमें ऐसे छात्रों के लिए प्रश्नपत्र बनाने को कहा जाता है जिनमें पढ़ाई करने की क्षमता है। कुछ छात्र 80 परसेंटाइल के आधार पर आए हैं। सिर्फ इसलिए कि कुछ छात्र 30 परसेंटाइल के साथ आए हैं, हम बाकी छात्रों के लिए पेपर आसान नहीं बना सकते।"
छात्रा: "फिर भी सर, आप बेशर्मी दिखा रहे हैं। यह सब आपकी गलती थी।"
प्रो. शिरीष केदारे: "मैं इस्तीफा दे रहा हूँ क्योंकि इसमें कहीं न कहीं मेरी भी कुछ गलती रही होगी। लेकिन जिन छात्रों ने कभी नकल की है, उन्हें भी IIT छोड़ देनी चाहिए। मैं चौकीदार से भी इस्तीफा माँगूँगा क्योंकि वह किसी की पैंट में मोबाइल फोन होने की जाँच नहीं कर पाया। अगर माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित नहीं कर पाते, तो क्या उन्हें भी अपनी जिम्मेदारियों से इस्तीफा दे देना चाहिए? उस छात्र को हमसे नहीं, बल्कि अपने कर्मों से डरना चाहिए था। जिन छात्रों में IIT की परीक्षा पास करने की क्षमता तक नहीं है, उन्हें IIT भेजने पर उनके माता-पिता को शर्म आनी चाहिए।
IIT बॉम्बे की टॉपर प्रिया मिश्रा का बयान चर्चा में है।
तीसरे साल की छात्रा प्रिया मिश्रा ने कहा —
“छात्र के परिवार के लिए दुख है। लेकिन सूर्यनाराय��� सर को सजा क्यों मिल रही है? अगर नकल नहीं होती, तो सर कोई कार्रवाई नहीं करते।
30-40 पर्सेंटाइल लेकर IIT में आ जाते हो, और फिर परीक्षा में मोबाइल से नकल करना चाहते हो क्योंकि दबाव नहीं झेल सकते। मैं 90 प्रतिशत ला सकती हूँ, लेकिन मेरे पास आईफोन खरीदने के पैसे नहीं हैं।
विशेषाधिकार मुझे मिलना चाहिए, ऐसे बच्चों को नहीं।
केस उनके माता-पिता पर होना चाहिए। केस उस सिस्टम पर होना चाहिए जिसने एक कमजोर और अनपढ़ बच्चे को इतने बड़े संस्थान में भेज दिया, जहाँ दिमाग, IQ और दबाव झेलने की हिम्मत चाहिए।
अगर दबाव नहीं झेल सकते तो घर बैठो। सीट बर्बाद मत करो। सूर्यनारायण सर का इस्तीफा इस देश के हर ईमानदार शिक्षक का अंत है, और अब नकल शर्मनाक काम भी नहीं रहेगी।”
हरियाणा के होडल गाँव में भारी पंचायत हो रही है।
एक तरफ गाँव वाले कह रहे हैं कि घर में घुसे चोर को पकड़ने पर उल्टा ग्रामीणों पर चोर और उसके कुछ दोस्तों ने SC /ST Act लगा दिया। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसे भाईचारा बिगाड़ने वाला कदम बताय�� है, जबकि पुलिस की एकतरफ़ा SCST कार्रवाई के आरोपों से ग्रामीण नाराज़ हैं।
Chat GPT से EXAM में नक़ल करते पकड़ो या घर में चोरी करते पकड़ो तो भी इनका शोषण हो जाता है।