मौजूदा सरकार और हमारी विद्वान वित्त मंत्री ने टैक्स वसूलने के इतने तरीके ढूंढ रखे हैं कि आदमी पैदा होने से लेकर मरने तक, हर साँस और हर निवाले पर टैक्स चुकाने के लिए मजबूर है।
अमृतकाल के नाम पर जेबें ऐसे साफ़ की जा रही हैं ...👇
1 - Income Tax
2 - Surcharge on Income Tax
3 - Health & Education Cess
4 - Short-Term Capital Gains Tax (STCG)
5 - Long-Term Capital Gains Tax (LTCG)
6 - Tax on Dividend Income
7 - Tax on Interest Income
8 - Tax on Rental Income
9 - Tax on Business / Professional Income
10 - Securities Transaction Tax (STT)
11 - Stamp Duty on Securities Transactions
12 - GST
13 - CGST
14 - SGST
15 - UTGST
16 - IGST
17 - GST Compensation Cess
18 - Customs Duty
19 - Basic Customs Duty (BCD)
20 - Social Welfare Surcharge on Customs
21 - Agriculture Infrastructure and Development Cess (AIDC)
22 - Central Excise Duty
23 - Special Additional Excise Duty (SAED)
24 - Additional Excise Duty
25 - Road & Infrastructure Cess
26 - Agriculture Infrastructure Cess
27 - State Excise Duty
28 - Property Tax
29 - Municipal Tax
30 - Professional Tax
31 - Vehicle / Motor Vehicle Tax
32 - Road Tax
33 - Electricity Duty
34 - Stamp Duty
35 - Property Registration Charges
36 - Land Revenue / Land Tax
37 - Entertainment Tax (where applicable)
38 - Luxury Tax (where applicable)
39 - Betting/Gambling Tax or State Levies (where applicable)
40 - Agricultural Produce Market Committee (APMC) Levies
41 - Market Cess / Market Fee
42 - Entry Tax / Local Body Tax (where applicable)
43 - Infrastructure Cess / Local Cess (state/local specific)
44 - Water Cess / Water-related Levies (where applicable)
45 - Green Tax / Environmental Cess (where applicable)
46 - Fuel Cess / State Fuel Levies
47 - TDS (Tax Deducted at Source)
48 - TCS (Tax Collected at Source)
49 - Equalisation Levy (where applicable)
50 - Dividend Distribution Tax (historical – abolished)
51 - Wealth Tax (abolished)
52 - Gift Tax (abolished as a separate tax; gifts are now covered under Income Tax rules)
इतनी लंबी टैक्स सूची के बावजूद जनता को बुनियादी सुविधाएं तक नसीब नहीं होतीं।
सड़कों पर गड्ढे या ग��्ढों में सड़कें जहाँ हर सफ़र जान का जोखिम बन जाता है। सरकारी स्कूलों की टूटी छतें और जर्जर इमारतें, जहाँ शि��्षा के नाम पर सिर्फ़ खानापूर्ति होती है, और बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं।
अगर कोई जज समय पर न्याय न दे पाये और उसकी वजह से पीड़ित को संघर्ष करना पड़े तो,
प्रतिदिन 3,000 रुपए जज के बिजली के बिल में जोड़ दिए जाने चाहिए।
क्योंकि देरी से मिला न्याय— "न्याय न मिलने के बराबर होता है"......... वैसे भी देश के न्यायालयों में अभी 5.19 करोड़ केस पेंडिंग हैं।
अगर किसी का ट्रैफिक चालान पेंडिंग है तो उसको वसूलने के लिए उस रकम को उसके बिजली बिल में जोड़ दो
- CJI सूर्या कांत जी कहिन.
अरे वाह ये तो बड़ा ही मज़ेदार रास्ता बताया आपने
तो कुछ सुझाव मेरे भी हैँ.
1- कोई MLA अगर जनता से किया वादा पूरा ना करे तो उसकी सारी विधायक निधि वापिस ली जाये
2- अगर कोई सांसद अपने फण्ड का इस्तेमाल 5 साल में ना करे तो उससे डबल वसूला जाये
3-अगर कोई मंत्री अपने बनाये क़ानून का पालन खुद ना करे तो उसको जेल होनी चाहिए
4 - अगर कोई पार्षद अपने एरिया में काम ना कराये तो उसके घर पर बुलडोजर चलना चाहिए
5- अगर ट्रैफिक पुलिस 100 रूपये की भी रिश्वत लेता पकड़ा जाये तो उसकी सारी ��ंम्पति जब्त की जानी चाहिए
6- अगर किसी पार्टी का सांसद करप्शन में लिप्त पाया जाये तो पूरी पार्टी को ही अयोग्य करार देना चाहिए
7 - अगर कोई जज किसी केस का फैसला 1 साल के अंदर ना सुनाये तो उसका इस्तीफा होना चाहिए
बोलो न्यायधीश जी कैसे लगे सुझाव???
मेरी सुप्रीम कोर्ट से एक और उम्मीद है जिस तरह जनता से हर गलती का हिसाब लिया जा रहा है, उसी तरह जनता के नुकसान का हिसाब भी तय हो।
सड़क में गड्ढा मिले, खराब सड़क की वजह से accident हो, घंटों traffic में फँसकर fuel जले, घटिया construction कुछ महीनों में टूट जाए तो इसका जिम्मेदार कौन? उसकी भी वसूली क्या ठेकेदार और Company के बिजली बिल या Payment से काटेंगे?
माननीय Court से एक और अनुरोध है इतने सारे लंबित Case है कई लोग न्याय के इंतजार में है उसका भी कोई सुझाव का इंतजार रहेगा सालों से न्याय के लिए दबी file और Case का क्या होगा ?
अ��र लोग ट्रैफिक चालान नहीं भर रहे हैं तो उसे उनके बिजली के बिल में जोड़ दो तब तो उन्हें भरना ही पड़ेगा।
~ भारत के मुख्य न्यायाधीश का बयान🤔🤔
इनके इस बयान से किसी को कोई आपत्ति नहीं है अगर👇
> न्यायपालिका पर भी यही नियम लागू हो तो 1 साल से ज्यादा पेंडिंग केस पर हर साल ₹50,000 का जुर्माना लगाया जाय।
> जज समय पर केस का निपटारा नहीं कर रहा है तब हर महीने जज की सैलरी का कुछ हिस्सा पीड़ित परिवार को जाना चाहि���।
ये 2 शर्ते न्यायपालिका पर लागू कर दी जाय तो किसी भारतीय को किसी भी तरह का जुर्माना भरने में कोई दिक्कत नहीं होगीं
@BJP4India अबे चूतिये, दुकानदार अपनी जेब से तो देगा नहीं वो ग्राहक से ही वसूलेगा, जैसे क्रेडिट कार्ड से स्वाइप करने पर ट्रांजैक्शन चार्ज वसूलता है।
अब तुम लोगों का हो चुका ।
"बहुत हुआ मोदी सरकार अबकी बार नो बीजेपी सरकार "
मुझे याद है कि कोरोना में मोगली ने मोमबत्ती जलाने कहा था । मैंने जलाया नहीं था । रात को पापा ने कहा - देखो हर घर में जल रहा, तुम भी जला दो , वरना ये देख लेंगे तो घर पर पत्थर वगैरा चलवाने लगेंगे ।
कट टू - आज । घी का दिया जलाने की पोस्ट डालते ही हर जगह से गाली पड़ रही ।
कोई सरकार लोकप्रियता के शिखर से अलोकप्रियता के पाताल का सफर कितनी जल्दी तय कर लेती है …
भारतीय UPI पेमेंट मार्केट का तकरीबन 86% हिस्सा दो अमेरिकी कंपनियों के पास है।
फोनपे की मुख्य पेरेंट कंपनी Walmart है जिसकी फोनपे में सबसे बड़ी 71.77% की हिस्सेदारी है। यानी मालिकाना उसी के पास है।
गूगल पे का मालिकाना हक गूगल और इसकी मूल कंपनी अल्फाबेट इंक के पास है।
ट्रेड डील के स्टेटमेंट में कहा गया कि भारत ट���रेड बैरियर हटाने पर काम करेगा। इसके एक महीने बाद अमेरिका ने कहा कि UPI पर जीरो चार्ज ट्रेड बैरियर है, जिसे हम स्वीकार नहीं करते। इसके तीन हफ्ते बाद UPI पर चार्ज लगाने का बिल पास हो गया।
अब सोचिए कि भारत सरकार किसके दबाव में UPI पर चार्ज लगा रही है?
राहुल गांधी का आरोप सही है। नरेंदर एक बार फिर सरेंडर बोल गए।
बड��ी ख़बर-
योगी आदित्यनाथ की प्रेस कांफ्रेंस में ‘लोकतांत्रिक’ बवाल हो गया।
एक महिला पत्रकार ने योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछ लिया।
योगी आदित्यनाथ अवाक रह गए।
अगले प्रधानमंत्री बनने की धुन में उनकी बिना कोई सवाल लिए प्रेस कॉंफ्रेंस करने की आदत हो गई थी।
��हिला पत्रकार के सवाल से हतप्रभ योगी आदित्यनाथ तुरंत चलते बने।
इस बीच महिला पत्रकार चीखती रही,
"मुख्यमंत्री जी, प्रेस वार्ता के लिए बुलाया है तो सवाल तो लेते जाइए।
ये प्रेस वार्ता है। मुख्यमंत्री जी!
प्रेस का जवाब नहीं दे पा रहे हैं आप। फिर बुलाया किसलिए था?"
सूचना के 'विशाल' तंत्र के होश फाख्ता हो गए।
लखनऊ ने एक नई सुबह देखी।
बिना कोई सवाल लिए, बिना किसी जवाबदेही के,
सिर्फ पुलिस की ल��ठी के दम पर राज करने वाले तंत्र का ऐतिहासिक पर्दाफाश हुआ।
कलम बधाई की पात्र है।
राहुल गांधी का यह बयान इस वक्त पूरे देश के राजनीतिक माहौल में तूफान मचा रहा है।
पूरे 15 साल तक मोदी सरकार के राज को देखने और परखने के बाद, अब मुल्क के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है
कि क्या वाकई अब वक्त बदल चुका है? जब कोई नेता क��र्सी की भूख भूलकर सीधे अपने देश की मिट्टी की कसम खाता है और भारत को तरक्की में 100 साल आगे ले जाने का दावा करता है,
तो हर आम इंसान का खून खौलना तय है।
एक तरफ 15 साल का पुराना हिसाब-किताब है, तो दूसरी तरफ नए कल का सबसे बड़ा दांव। अब फैसला पूरी तरह आपके हाथ में है कि आप पुरानी बातों से ही संतोष करेंगे या इस बार जोर से बदलाव का बिगुल बजाएंगे!
@RahulGandhi
रिटायरमेंट के ���गले दिन अडानी बोर्ड में बैठ जाना – ये संयोग नहीं, भ्रष्टाचार की संस्थागत डिजाइन है। पावर, पोर्ट, होम, फाइनेंस और SEBI जैसी संवेदनशील कुर्सियाँ संभालने वाले नौकरशाह आज "इंडिपेंडेंट डायरेक्टर" बन मोटी फीस बटोर रहे हैं। क्या सरकारी कुर्सी पर बैठकर अडानी को दी गईं लैंड-क्लियरेंस, पॉलिसी-सौगातें, भविष्य के पैकेज की अग्रिम किश्त नहीं थीं? कूलिंग-ऑफ पीरियड सिर्फ कागजों में है। VRS इनके लिए एंट्री-टिकट है। जहाँ आम आदमी 60 पर ठिठुर जाता है, वहीं ये रिटायर होकर करोड़ों कमा रहे हैं।
ये कोई एक-दो नाम नहीं, स्क्रीनशॉट में दो पेज की लंबी फेहरिस्त है। जब सिस्टम के संरक्षक ही सिस्टम लूटें, तो आम आदमी की सुनवाई कौन करेगा? "इंडिपेंडेंट" का टैग लगाकर अपने पुराने सिस्टम के सबसे बड़े लाभार्थी का हि��� करना निष्पक्षता नहीं, नौकरशाही का नैतिक दिवालियापन है। सवाल – क्या ये नौकरशाह सेवाकाल में निष्पक्ष थे, या रिटायरमेंट की सुनहरी जॉब के लिए पहले से पुल बना रहे थे? ये गठजोड़ देश की संस्थाओं की गरिमा को खोखला कर रहा है। ये रिवॉल्विंग डोर नहीं, लूट का खुला दरवाजा है।
जिनके खुद औलाद नहीं है, वो औलाद खोने का दर्द नहीं समझ सकेंगे. पोस्ट लिखते वक़्त आँखे दो बार नम हुई हैँ 😪
ये अक्षत यादव और अर्पित जाज हैँ. अक्षत कटनी और अर्पित देवास,MP के रहने वाले थे
रक्षाबंधन पर बहनों से राखी बंधवाकर 3 सितम्बर को सत्य नितेकन वाले PG पहुंचे थे.
हादसे वाले दिन से एक दिन दोनों ने घर पर वीडियो कॉल करी थी, तब पर���वार वालों को क्या पता था ये उनके आख़री दर्शन होंगे. 😪
दोनों के शव इतने छत विशत हो गए थे कि परिजनों को उनकी पहचान करनी बहुत मुश्किल थी.
दोनों के हाथों में बँधी रखियों से पहचान हुई.
क्या यही दिन देखने के लिए अपनी इकलौती सन्तानो को माँ बाप ने सिस्टम को सौंपा था?
पैसे खर्च किये, ��ेहनत करी होगी. ये हादसा नहीं, लापरवाही नहीं, ये हत्या है सिस्टम द्वारा इन मासूमों की, जिन्होंने कितने सपने सजाये होंगे.
अर्पित की बहन कलाई से मिली राखी को देख देख कर रोते नहीं थकती. माँ गुमसुम हो गयी है 😔
अगर नहीं संभाल सकते तो छोड़ दो गद्दी, मासूमों की मौत का पाप कहाँ भरोगे साहब? 😭😭