@Kanchanyadav000 अगर पार्टी प्रमुख अपने प्रवक्ताओं को कंट्रोल नहीं करेंगे तो आगे और नुकसान होगा। अब दुष्प्रचार से जन समर्थन जुटाना बहुत मुश्किल है। जनता जान चुकी है।
@_YogendraYadav ब्रिटिश हुकूमत और उनकी अदालते हमारी बात नहीं सुनते थे तो सड़क पर उतरना , आंदोलन करना हमारा मुख्य रास्ता था। आज हमारे पास संसद है, शिकायतों के निवारण हेतु व्यवस्था है, अदालत है, सरकार है। कही न कही समस्या का निदान होगा। सड़क पर जाना छोड़िये। जनता देख रही है।
@alok40569139@Kanchanyadav000@RahulGandhi सबूत नहीं है। कोई दूसरा रास्ता सुझाएं। बिना सबूत के कुछ हो सकता है तो बताएं। अब तो जनता भी जागरूक हो गई है, कुछ करते नहीं बनता। क्या करूं , कहां जाऊं। मैं विपक्ष हूँ।😂😂😂
@Kanchanyadav000 अति सर्वत्र वर्जयेत।आलोचना संतुलित हो। शर्म शर्म बोलने से आप सच नहीं हो जाएगा। आप के कहने से आरोप सच नहीं हो सकते। उनके नकारने से झूठ नहीं हो सकते। इसके लिए ठोस प्रक्रिया से आगे बढ़ें। दुष्प्रचार और भ्रम की राजनीति से आप जनता का समर्थन नहीं पा सकते।
@PratikVoiceObc जिस दिन निजी क्षेत्र में ये प्रावधान हो गया , उस दिन चाहकर भी देश आगे नहीं बढ़ पाएगा।बहुत जटिल परिस्थिति हो जाएगी।निजी क्षेत्र वाले का सहयोग भी नहीं मिलेगा।
@mktyaggi जातिसूचक बोर्ड दुकान पर क्यों लगाएगा।दुकान पर बोर्ड ऐसा होना चाहिए जिससे बेहतर बिक्री हो। मशलन उत्तम मिष्ठान्न भंडार, यहां देशी घी से बनी मिठाइयां मिलती हैं।ये नेता क्या समझाता रहता है।
@yati_Official1 कभी इनको भी सांप्रदायिक बोलकर राजनीतिक दल इनको राजनीतिक रूप से स्पर्श योग्य नहीं मानते थे। लेकिन किसी को बोलने से कुछ नहीं होता। जनता कुर्सी देती है और कुर्सी ले भी लेती है। मर्यादा से काम करते रहिए, जनता सर पे बैठाएगी ।
@Kanchanyadav000 साबित हो जाता है कि बिना होमवर्क किए आप एजेंडा चलाते हो। आँख बंद कर विरोध के लिए पूरी पार्टी का विरोध करना आपका मुख्य काम है। भाजपा का हर नेता वैसा नहीं जैसा आप कह रही हो। बहुत सारे अच्छे नेता हैं। आपकी पार्टी में भी हर नेता वैसा नहीं।
@neha_laldas आरक्षण इसीलिए है कि ये सही मायने में शिक्षित न हों और दहाड़े नहीं।आजादी के बाद से दहाड़नेवाले को राजनीतिक दलों ने जो किया है वह सबके सामने है।