सोनिया जी विदेश से भारत ब्याह कर आईं और जब भारत आईं यहीं की मिट्टी की हो गईं।
इटली से आई महिला ने भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर लिया। उनसे उनका पति छिना, माँ समान सास छिनी, उन पर भद्दी टिप्पणियाँ हुईं, उन्हें जर्सी गाय कहा गया, जानवर से तुलना हुई, फिर भी वो भारत में टिकी रहीं और मरते दम तक रहेंगी।
देशप्रेम इस बात से तय नहीं होता कि आप पैदा कहाँ हुए, बल्कि इस बात से होता है कि उस देश में आपका सब कुछ छीन जाने के बाद भी आप बने रहे और उसके बेहतरी के लिए लड़ते रहे। नफ़रती ताक़तों के आगे घुटने नहीं टेके।
जब-जब इन भाजपाइयों और संघियों ने सोनिया जी पर भद्दी टिप्पणियाँ कीं, लालूजी हमेशा सोनिया जी के साथ मज़बूती से खड़े रहे और कहते रहे, “सोनिया जी देश की बहू हैं।”
देश माने घर होता है और घर की बहू की इज़्ज़त उछालोगे तो इस बात को याद रखना कि इस इज़्ज़त के लिए किस हद तक लड़ा जाएगा।
मेरे प्यारे छात्रों, युवाओं और भारत के Gen Z,
आपके साथ सारा देश देख रहा है कि आज एक टूटी हुई शिक्षा व्यवस्था ने आपकी उम्मीदों की लौ को बुझा कर आपके भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है।
‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से मैं अलग-अलग शहरों में आपसे मिलकर आपकी चुनौतियां समझ रहा हूं। इसी मुहिम के साथ 19 सितंबर को मैं फिर आपके बीच, इंदौर में रहूंगा।
मगर इस सिस्टम को बदलने के लिए पूरे देश के हर छात्र की आवाज़, उनका दर्द और उनकी राय सुनी जानी ज़रूरी है।
नीचे दिए लिंक पर जाकर बताइए - आपको अपने सपने पूरे करने से क्या रोक रहा है? आप वीडियो बनाकर भी अपनी बात हम तक पहुंचा सकते हैं।
आपकी समस्याएं। आपके सुझाव। हम मिलकर उम्मीद फिर से लौटाएंगे।
https://t.co/LJKkkNMrGM
#ChhatronKiGoonj
Why is @Meta cracking down on CJP’s Instagram posts?
Several of our posts are being taken down despite not violating any Community Guidelines. These posts simply question the govt, raise issues of public interest and demand accountability.
Is questioning those in power become a violation of Instagram’s guidelines?
भारत की सबसे भ्रष्ट सरकार वाले राज्य मध्यप्रदेश में शासन नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं।
जहरीली शराब ने प्रदेश के सागर में अनेक लोगों की जान लेकर उन सभी घरों में मातम पहुंचा दिया है। मगर पूरे मध्यप्रदेश को पता है आगे क्या होगा - कुछ गिरफ्तारियां होंगी, कुछ अधिकारी सस्पेंड होंगे, जांच के आदेश होंगे, क्योंकि ये पहली बार नहीं है।
कुछ ही वक्त पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई। पिछले साल जहरीली cough syrup से जाने कितने छोटे बच्चों की जान चली गई।
दवा ज़हरीली। शराब ज़हरीली। पानी ज़हरीला। नए कानून बना दिए जाते हैं, लेकिन उन्हें किसी तहखाने में डाल दिया जाता है - अगले हादसे तक।
20 साल से ज्यादा समय से BJP की सरकार मध्यप्रदेश में है। हादसे की कोई रोकथाम नहीं, उसके बाद नाम की कार्रवाई - कहां है जवाबदेही? आखिर कब तक लोगों की जान की कीमत सिर्फ हादसे के बाद की कार्रवाई होगी?
निष्पक्ष जांच हो, इन मौतों की पूरी सच्चाई सामने आए और सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं - जिसकी भी लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जवाबदेही तय हो।
अगर विपक्ष की सरकार होती तो मीडिया चलाता- बच्चों की मौत हो रही है और मुख्यमंत्री कपड़े बदलने में व्यस्त हैं.
लेकिन यहां मामला घर का है, इसलिए सब चलता है.
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की खबर बेहद दर्दनाक और चिंताजनक है। कई लोगों के मलबे में दबे होने की खबर है, जिनमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र भी शामिल हैं।
मेरी अपील है कि NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और सभी बचाव दल हर संभव प्रयास करके हर एक छात्र तक पहुँचें, घायलों को तुरंत सर्वोत्तम संभव इलाज मिले, ताकि किसी को भी बचाने में कोई कसर न छोड़ी जाए।
कांग्रेस और NSUI कार्यकर्ता मौके पर मौजूद हैं और हर संभव मदद के लिए तैयार हैं। इस मुश्किल घड़ी में हम सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ खड़े हैं।
छात्रों का जीवन पहले ही संघर्षों से भरा था - अब हालात जानलेवा हैं। कॉलेज या विश्वविद्यालय में अच्छे हॉस्टल न होने के कारण छात्र PG में एक छत के नीचे 40-40 की संख्या में, अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
हर छात्र की जान कीमती है और उसकी रक्षा हर हाल में होनी चाहिए।
रात के साढ़े ग्यारह बजे, सत्तारूढ़ पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष @NitinNabin को इस बात फिक्र नहीं है कि कितने बच्चे मलबे के नीचे अभी भी दबे हुए हैं।
इन्हें नाराज़गी है देश में फैल रहे जायज़ ग़ुस्से से।
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi ने मोदी सरकार से शिक्षा, रोजगार और जवाबदेही मांग रहे उन छात्रों से मुलाकात की जिनके सपनों को गोलियों से भून दिया गया।
एक छात्र के पैर की हड्डी AK 47 की गोली से टूट गई। सेना में जाकर देश की सेवा करने का उसका सपना भी उसी के साथ चला गया। दो और छात्रों के कंधों को गोली चीरती हुई निकल गई।
ये अपराधी नहीं थे। ये ग़रीब घरों के वो बच्चे थे जो अपने परिवार के सपने लेकर पढ़ने निकले थे - किसी को अच्छी नौकरी चाहिए थी, किसी को अपने घर के हालात बदलने थे।
प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी - इनकी टूटी हड्डी तो जुड़ जाएगी। क्या इनका टूटा हुआ सपना आप लौटा सकते हैं?
दिल्ली की शाहीन और नफीसा को कब मिलेगा इंसाफ ?
दिल्ली के थाने में शाहीन और नफीसा के साथ बर्बरता करने वालों पर कब होगी कार्रवाई?
दिल्ली पुलिस शाहीन और नफीसा को क्यों उठाकर ले गई थी थाने?
मुस्लिम होने की वजह से इन्हें टॉर्चर किया गया ?
दिल्ली की दोनों लड़कियों से मैंने लंबी बात की है .
पूरा वीडियो जल्द ही मेरे यूट्यूब चैनल पर
Students are trapped under the debris, and locals are trying to rescue them with their bare hands.
Not a single person from the administration is in sight.
When every minute could save a life, where is the administration? And for how long this will continue to happen?