माननीय @DrSJaishankar जी भारतीय दूतावास @CGIJeddah के कर्मचारी या जो भी अधिकारी है वह एक गुमसुदा भारतीय का पता क्यों नही लगा पा रहा है सिर्फ कॉल से बोल दिए कि जेद्दाह में नही क्या पता कही दूसरे प्रोविंस में होगा लेकिन दुबारा कोई रेस्पॉन्स ही नही कर रहा है कैसे होगा समस्या का
@pravasiHelp@CGIJeddah@IndianEmbRiyadh@IndiaInYemen@DrSJaishankar Already contact but no any information
सिर्फ रिप्लाई आता है wait , आखिर कब wait करे कही से कुछ भी जानकारी नही आ रही कहा है कैसे है न ही कोई परिवार से कांटेक्ट करता जब तक 4 5 मैसेज या मेल न करे
उस मे भी रिप्लाई आता है वेट
और दूतावास के कोई अधिकारी न कोई जवाब दे रहा है न कोई प्रयास कर रहा परिवार वाले अपने बच्चे को छोड़ से ऐसे ही , माननीय मंत्री जी आप से निवेदन है इस मामले को दूतावास के संज्ञान में लाए
@CGIJeddah को जो भी जरूरी डोकोमेंट है ईमेल कर चुके है
@asadowaisi@AadilHasanAdv1 plz help
यह मामला लगभग एक साल होने को लेकिन अब्बी तक @CGIJeddah@IndianEmbRiyadh@IndiaInYemen के कोई भी अधिकारी न सही से जवाब दे रहा है न कोई प्रयास कर रहा, नही ईमेल व्हाट्सएप पे कोई रिप्लाई कर रहा है आखिर क्यों माननीय @DrSJaishankar जी क्या एक भारतीय नागरिक किसी दूसरे देश मे लापता है
Vande Mataram is an ode to a goddess. It cannot be treated on par with the national anthem. Jana Gana Mana celebrates India and its people, not a particular religion. Religion ≠ nation. The man who wrote Vande Mataram was sympathetic to the British Raj and despised Muslims. Netaji Bose, Gandhi, Nehru, and Tagore all rejected it.
The Preamble to the Constitution of India begins with “We, the People” — not “Bharat Maa”. It promises “liberty of thought, expression, belief, faith and worship”. The very first provision of the Constitution, Article 1, describes “India, that is Bharat” as a Union of States.
In the Constituent Assembly, some members wanted the Preamble to begin in the name of a goddess; they specifically invoked Vande Mataram. Others wanted it to begin “In the name of God” and to replace “its citizens” with “her citizens”. All these amendments were defeated.
India, that is Bharat, is its people. The nation is not a goddess; it does not run in the name of a god or goddess, and it does not belong to one god or goddess.
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बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब ने बरेली के AIMIM जिम्मेदारों से बात कर मरहूम मौलाना तौसीफ़ रज़ा मजहरी साहब के परिवार को हर संभव मदद करने का निर्देश दिया।
अलहम्दुलिल्लाह, प्रदेश महासचिव जनाब Nadeem Qureshi साहब पूरी जिम्मेदारी के साथ इस मामले में सक्रिय रूप से मदद कर रहे हैं और इंसाफ दिलाने के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं।
बिहार: मरहूम मौलाना तौसीफ़ रज़ा साहब के परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए ठाकुरगंज, किशनगंज में कैंडल मार्च निकाला गया। इस मार्च में AIMIM प्रदेश अध्यक्ष व अमौर विधायक अख्तरूल ईमान साहब, कोचाधामन विधायक सरवर आलम साहब और गुलाम हसनैन स���हब सहित हजारों लोग शामिल हुए और सरकार व रेल मंत्री से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए। AIMIM पार्टी मरहूम के परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है।
AIMIM पार्टी भारत सरकार से यह भी मांग करती है कि देश में दाढ़ी और टोपी के आधार पर मुसलमानों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाओं पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही जो लोग धर्म के आधार पर हमला और मारपीट करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
"क्या मुसलमानों को भारत में रहने का हक़ नहीं है?"
AIMIM बिहार अध्यक्ष व अमौर विधायक जनाब @Akhtaruliman5 साहब ने कहा कि ठाकुरगंज, किशनगंज के मौलाना तौसीफ़ रज़ा मजहरी साहब के साथ ट्रेन में हुई यह दर्दनाक घटना क़ानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने आगे कहा कि हम मोदी सरकार और रेल मंत्री से मांग करते हैं कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाए, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जल्द से जल्द कराई जाए, और जो भी दोषी हों उन्हें सख्त से सख्त सज़ा दी जाए, ताकि पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
I hope the Railway Minister @AshwiniVaishnaw will take action against the perpetrators which led to the killing and death of Maulana Tousif Raza on a Train.