शिक्षक भर्ती कब आएगी?
यूपी के करीब 25 लाख युवाओं के मन में यह सवाल रोज आता है। रोज क्या कहें, हर पल आता है। ये वो युवा हैं जिन्होंने लाखों रुपए खर्च करके पढ़ाई की। कोचिंग की। अपने जीवन का सबसे कीमती वक्त दिया। लेकिन अब तक एक अदद मौका नहीं मिल सका।
इंतजार की भी तो एक इंतहा होती है न? बाकी किसी काम में लेटलतीफी नहीं होती फिर युवाओं के हिस्से ही यह लेटलतीफी क्यों आती है? सरकार के पास तो अपना पूरा सिस्टम है। अधिकारी हैं, पेपर बनाने वाले विद्वान हैं। वह सैलरी ले ही रहे फिर काम क्या कर रहे?
सरकार को तुलनात्मकता वाले खांचे से बाहर आना चाहिए। पुरानी सरकारों ने कितनी भर्ती की जैसे जवाबों का अब कोई औचित्य नहीं। अब सवाल यही है कि आपने युवाओं को कितना मौका दिया?
फिर से कह रहा हूं, 8 साल का वक्त बहुत ज्यादा होता है। शिक्षक भर्ती से जुड़ा युवा हताश, निराश और नाउम्मीदी से भर रहा, उसे बचा लीजिए।
दिल्ली में, तिलक हटाकर घूमना पड़ रहा है, यही दिन देखना बाकी रह गया था बस!
"मैं हनुमान मंदिर गया था, भजन-कीर्तन करने के लिए। वहाँ से मुझे माला दी गई। लेकिन मुझे तिलक हटाना पड़ा और माला उतारकर अंदर रखनी पड़ी।
जो व्यक्ति तिलक लगाकर घूम रहा है, वह उनके लिए प्रोटेस्टर है।
एक तरफ हिंदू राष्ट्र की बात होती है और दूसरी तरफ आपको तिलक हटाना पड़ रहा है। अब मैं क्या करूँ? हम किसी भी नाव में पैर नहीं रख सकते।"
विकसित भारत का स्वप्न कौन नहीं देखना चाहता? लेकिन कभी यह भी तो बताइए कि विकसित भारत बनेगा कैसे?
“अगर विकसित भारत का स्वप्न देखने वाली सरकारें 60–70% से अधिक आरक्षण की नीतियों का समर्थन कर रही हों, तो भाई किस हिसाब से 2047 तक विकसित भारत की बात कर रहे हो?”
मोदी जी पहले आए, “पाँच साल दे दो मित्रों।” फिर आए, “पाँच साल दे दो मित्रों।” अब, “2047 दे दो मित्रों।”
हम 2047 भी दे देते हैं, लेकिन कोई यह नहीं बता रहा कि वहाँ तक पहुँचेंगे कैसे।
और मैं आपको बता रहा हूँ कि certainly क्यों नहीं पहुँचेंगे, आरक्षण के कारण।आरक्षण की मात्रा बढ़ने से विकसित भारत नहीं बन सकता!
जिस देश की संस्थाएँ, IITs, IISc, IIMs और अन्य उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान, गुणवत्ता और रिसर्च को लगातार मजबूत करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं;
81.35 करोड़ लोगों को PMGKAY के तहत मुफ्त खाद्यान्न दिया जा रहा है। सवाल मुफ्त राशन देने का नहीं है, सवाल यह है कि इन्हें पंगु क्यों बनाया जा रहा है?
आज भी बड़ी संख्या में बच्चे higher secondary level तक नहीं पहुँच पाते। 2023-24 में higher secondary का Gross Enrolment Ratio 56.2% था, जो 2025-26 में बढ़कर 61.7% हुआ है। यानी सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बहुत लंबी दूरी तय करनी है।
आप 2047 का विकसित भारत का सपना दिखा रहे हैं, तो हमें यह भी बताइए कि वहाँ तक पहुँचेंगे कैसे?
सिर्फ timeline बताने से देश विकसित नहीं होता।
“स्कूल खोजो 1 लाख पाओ”
नगर शिक्षा अधिकारी जौनपुर का 25 मई 2026 का पत्र ध्यान से पढ़िये उन्होंने लिखा “कुछ विद्यालयों का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है”
UDISE में जिन पतों पर स्कूल “Operational” दिखाया जा रहा है वहाँ स्कूल खोज कर दिखाओ भाजपाइयों?
मज़ाल है इन Vacant Posts को भरने के लिए कोई गंभीर बैठक हो जाए, कोई ठोस Timeline बने। ख़ाली पद बढ़ते जा रहे है ……
सच कहूँ तो Students को भी ये लगता है कि इन पदों को भरने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को युवाओं की थोड़ी सी भी चिंता है,
पद खाली रखना लाखों युवाओं के भविष्य को Waiting List में डालने जैसा है। और शिक्षा व्यवस्था का क्या ही कहना ।