Pellet guns, Nail-studded lathis, tear gas fired at students who were peacefully asking questions about their own future.
Young women beaten by policemen, many injured on their private parts. Minors with broken bones. This is how the Modi government answers a question.
And the Home Minister? Nearly 20 days and Amit Shah has not come to Parliament to answer for it. Every Opposition motion for a discussion has been rejected.
His silence is not an oversight - it is approval of the violence. He is either culpable or incompetent.
We demand a Supreme Court monitored inquiry. And we will not stop fighting until he is held accountable.
पैलेट गन, कील लगी लाठियां और आंसू गैस के गोले - शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ़ अपने भविष्य के बारे में सवाल पूछ रहे छात्रों पर इनसे हमला किया गया।
पुलिस ने लड़कियों को पीटा, कई के प्राइवेट पार्ट्स पर चोटें आईं। नाबालिगों की हड्डियां टूट गई। मोदी सरकार सवालों का जवाब ऐसी बर्बरता से देती है।
और गृह मंत्री? लगभग 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अमित शाह इस मामले पर जवाब देने के लिए संसद तक नहीं आए। चर्चा के लिए विपक्ष के हर प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया है।
उनकी चुप्पी सिर्फ अनदेखी या चूक नहीं - यह हिंसा को मंज़ूरी है। वो या तो गुनहगार हैं या फिर नाकाबिल।
हम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग करते हैं। और जब तक उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जाता, ये लड़ाई नहीं रुकेगी।
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झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत है।
छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है।
झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।
The use of force against students protesting in Jharkhand is wrong.
Students have a right to peaceful protest, and only dialogue can yield solutions.
The Jharkhand government must continue to hear these students out and resolve their issues immediately.
न प्रधानमंत्री मोदी, न गृह मंत्री अमित शाह में हिम्मत है कि वो संसद में आकर हमारे छात्रों पर हुई बर्बरता पर जवाब दें।
भारत के छात्रों के लिए यह एक साफ़ संदेश है - उन्हें नहीं लगता कि आप पर हुई हिंसा उनकी किसी टिप्पणी के भी लायक है।
देश के छात्रों ने system के फैलाए अंधेरे के बीच, अपने डर का सामना कर, रौशनी की मशाल जलाई है।
ये मशाल अब पूरे देश को अपने अधिकारों का रास्ता दिखा रही है।
BJP-RSS और अडानी के System को अब खतम, tata, bye-bye कहने का वक्त आ गया है।
“अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं बचा” - कल प्रयागराज में एक छात्र ने मुझसे यही कहा। सालों की तैयारी, घर की ज़मीन बेची, माँ-बाप का कर्ज़ और फिर भी हाथ में कुछ नहीं।
यह हार उसकी नहीं है। यह उस व्यवस्था की हार है जिसने उसकी मेहनत का दाम देने से इनकार कर दिया।
तेरह दिन हो गए - गृह मंत्री अमित शाह के मुंह से एक शब्द नहीं निकला। मोदी जी माफी मांगने की जगह क्षमा बाँट रहे हैं।
@AmitShah जी, यह मत समझिए कि हम जवाबदेही मांगना बंद कर देंगे। राजधानी की सड़कों पर बच्चों पर लाठियां और पैलेट चले - और आपने एक शब्द नहीं कहा। आज नहीं तो कल, इस जुर्म का जवाब आपको देना ही पड़ेगा।
छात्र देश की रोशनी हैं, और मैं उनकी पूरी शक्ति के साथ खड़ा हूं।
#ChhatronKiGoonj
विश्व आदिवासी दिवस पर देश के सभी आदिवासी भाई-बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं।
आदिवासी इस देश के पहले मालिक हैं - उनकी ऐतिहासिक संस्कृति भारत की अमूल्य धरोहर है।
जल, जंगल और ज़मीन पर उनके अधिकार के साथ आदिवासी अस्मिता और सम्मान की लड़ाई में हम हमेशा उनके साथ खड़े हैं।
Greetings to all Indian Youth Congress members on IYC's Foundation Day!
India's greatest strength is its youth, and IYC has a proud legacy of giving young Indians a platform - amplifying their voices, raising their concerns, and fighting for their rights, dreams and aspirations.
Today, when our youth are fighting against a system that is rigged against them, IYC is standing with them every step of the way.
कांग्रेस के समय में घर पर तिरंगा लगाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती थी,
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने 140 करोड़ भारतीयों को घर के ऊपर तिरंगा लगाने की आजादी दी...
प्रयागराज आ रहा हूं - देश के उस शहर में जहां सबसे ज़्यादा नौजवान तैयारी करते हैं।
एक बात साफ़ है: यहां का हर छात्र जानता है कि system बेईमान हो चुका है। आपकी मेहनत में कोई कमी नहीं - कमी उस system की नीयत में है जो आपकी मेहनत का दाम नहीं देती।
पेपर लीक, रुकी भर्तियाँ, सालों का इंतज़ार और जवाबदेही किसी की नहीं।
कोटा में छात्र बोले, देहरादून में फिर आवाज़ उठी और दिल्ली में इन्हीं बच्चों पर लाठियाँ चलीं - सिर्फ़ सवाल पूछने के लिए। आखिर में एक मंत्री को जाना पड़ा।
यह सरकार झुकती है बस आवाज़ एक साथ उठनी चाहिए।
कल प्रयागराज में यही बात करने आ रहा हूं। आप भी आइए। 8 अगस्त, शाम 5 बजे - के.पी. ग्राउंड, प्रयागराज।
#ChhatronKiGoonj
रिजिजू जी, संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आपसे बेहतर यह कौन जानता होगा - महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, कांग्रेस के पूर्ण समर्थन के साथ।
सवाल यह है कि तीन साल बाद भी वह लागू क्यों नहीं हुआ और अब आप उसे परिसीमन से बेवजह क्यों जोड़ना चाहते हैं?
2023 का क़ानून लागू कीजिए। बिना किसी शर्त के।
CJP is registered?? Or running organisation unregistered similar to your parent unregistered organisation #RSS .
STOP betraying kids of India. You can not give any conclusions to them. India need leadership like @RahulGandhi , not someone who will divide opposition to help indirectly to BJP.
Deeply saddened by the loss of lives and widespread devastation caused by landslides and flash floods across Nagaland and Arunachal Pradesh.
My heartfelt condolences to the bereaved families, and wishes for a swift recovery to the injured
I urge Congress workers to support the relief and restoration efforts in every possible way. I stand in solidarity with every affected family in this difficult hour.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र फीस वृद्धि और सीट कटौती के खिलाफ़ अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन प्रशासन छात्रों को सुनने के बजाय उन पर FIR कर रहा है।
मोदी सरकार की नीति ही युवाओं की आवाज़ दबाना है। सवाल पूछो तो लाठी, विरोध करो तो मुक़दमे, और आवाज़ उठाओ तो पेलेट गन।
जब मैंने छात्रों की बात को सुनने के लिए प्रयागराज आने का फैसला किया, तब से प्रशासन मेरे कार्यक्रम को हर संभव तरीके से रोकने की कोशिश कर रहा है।
साफ़ है, उन्हें छात्रों की गूंज से भी डर लग रहा है।
मैं छात्रों के साथ हूँ। सरकार चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, मुझे छात्रों की आवाज़ उठाने से रोक नहीं सकती।