आरक्षण पर कोई पार्टी बात क्यों नहीं करती?
आरक्षण के खिलाफ़ आंदोलन क्यों नहीं होते।
जाति-धर्म और राज्य के नाम पर कितना आरक्षण दिया जाएगा? सामान्य वर्ग का दर्द कौन समझेगा?
~ Harsh Dubey, NEET Aspirant
"जो सदियों से लाभकारी रहे हैं क्या उनके double cranium हैं?
प्रतिभा तो सबके पास है!"
-पवन वर्मा
हेलो वर्मा जी,
तो जो आरक्षण मांगते हैं और आधे मार्क्स में एडमिशन लेना चाहते हैं उनके क्या half cranium हैं?? अपनी प्रतिभा दिखाते क्यों नहीं??
😂😂😂
"चीन ने मेरिट और इक्विटी को प्राथमिकता दी! ज़बरदस्त सरकारी क्षमता विकसित की, एक ही पीढ़ी में लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला!
भारत ने मेरिट के बजाय इक्विटी को प्राथमिकता दी!
और नतीजा?
-60% कोटा
-औसत दर्जे के संस्थान
-पूरी व्यवस्था पर क्रीमी लेयर का कब्ज़ा"
गुरचरण दास🔥🔥
ब्राह्मणों के गांव के गांव काट दिए गए लेकिन उन्होंने ना अपना जनेऊ तोड़ा ना गाय का मांस खाया। मलेक्ष लोग तलवार की नोंक पर गाय का मांस चखाते तो गर्दन कटा दी गई लेकिन गाय का मांस नहीं खाया: प्रेमानंद जी महाराज को सुनिए
और कुछ लोग धर्म की रक्षा करने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले ऐसे ब्राह्मणों की तुलना “वैश्या” से करते हैं।
कुछ लोग पूछते हैं-
अपने bio में अपनी जाति क्यों लिखी?
कारण-
1. कायस्थ होना मेरी पहचान का अहम हिस्सा है, और मुझे उसपर गर्व है
2. मुझे ब्राह्मण समझकर लोग ब्राह्मणों को अपशब्द बोलते थे, इसलिए मैंने सोचा बता दूं कि बेवजह time waste न करें
3. UR में और जातियाँ भी होती हैं, ये बताना भी ज़रूरी है
वैसे "जातिवाद" होता है-जाति के आधार पर भेदभाव करना, या जाति के आधार पर फायदे लेना!
जोकि हमने आजतक नहीं किया!
तो जिनको दिक्कत है, वो रोते रहें!
आपके रोने से हमें 🔔 फ़र्क़ पड़ता है!
जय श्री चित्रगुप्त महाराज🙏
तमिलनाडु में 87% हिंदू, ईसाई 6% और मुस्लिम 5% । फिर भी जोसेफ विजय की TVK ने पहली बार में ही जबरदस्त जीत दर्ज की। उसके कुछ कारण-
- जब आप हिंदू होकर भी हमेशा हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले पूरे एक समाज को अलग थलग करें
- जब आप हिंदू धर्म के प्रहरी ब्राह्मण समाज के खिलाफ पूरा कैंपेन बनाएं। उन्हें राजनीतिक सामाजिक अछूत बना दें
- जब आप विकास, शिक्षा, रोजगार की जगह सिर्फ और सिर्फ जातिवाद, जातीय नफ़रत, क्षेत्रवाद को बढ़ावा दें
- जब आप हिंदू धर्म के अंदर ही एक अलग “द्रविण विचारधारा” घुसेड़ दें। दलित, ब्राह्मण, गरीब ओबीसी को प्रताड़ित किया जाए
- विजय की TVK ने द्रविड़ विचारधारा नहीं अपनाया, जातीय नफरत नहीं फैलाया, धार्मिक टिप्पणी नहीं की
- नतीजन 5% आबादी वाले ईसाई समाज के विजय थलपति को सर्वसमाज ने स्वीकार किया। ये नफरत के विचारधारा का अंत है।
महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) जी की जयंती पर कोटि-कोटि वंदन। वीरता, पराक्रम और स्वाभिमान के प्रतीक राणा सांगा जी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि मातृभूमि की रक्षा सर्वोपरि है। उनका अदम्य साहस और बलिदान हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
आज राणा सांगा की जन्मतिथि पर उनको शत शत नमन🙏
बता दें कि राणा सांगा (महाराणा संग्राम सिंह) मेवाड़ के एक अद्वितीय हिंदू सम्राट थे, जिन्होंने अपनी वीरता से 16वीं शताब्दी में मेवाड़ को उत्तर भारत की सबसे शक्तिशाली रियासत बनाया!
उन्होंने दिल्ली, मालवा और गुजरात के सुल्तानों को युद्ध के मैदान में धूल चटाई और बाबर जैसे आक्रमणकारी के विरुद्ध भारतीय राजाओं को एक झंडे के नीचे एकजुट किया!
शरीर पर 80 घाव होने और एक आंख, हाथ व पैर खोने के बावजूद उनका युद्ध क्षेत्र में डटे रहना उन्हें 'सैनिकों का भग्नावशेष' और अदम्य साहस का प्रतीक बनाता है!
हमको ऐसे ही वीरों की आज ज़रूरत है🙏
ये कानपुर में तैनात कॉन्स्टेबल 'आशीष शुक्ला' है !
यूपी पीसीएस का रिजल्ट आया, 41वीं रैंक लाकर ये सिपाही से पीसीएस अधिकारी बन गए, ये होता है मेरिट का रुतबा 🔥
राहुल गांधी की मां का इलाज डॉ. अरूप बसु कर रहे हैं, जो सामान्य श्रेणी के डॉक्टर हैं। ऐसा करके उन्होंने पूरे दलित समुदाय के साथ विश्वासघात किया है। उनकी उम्मीदें जगाने के बाद, मां के इलाज के लिए दलित डॉक्टर का चयन न करके उन्होंने दलित समुदाय का अपमान किया है।
क्या उन्हें सच में लगता है कि दलित समुदाय के डॉक्टर सक्षम नहीं होते? क्या यह जाति-आधारित भेदभाव का एक रूप नहीं है? 🤷🤷🤷
सनोज मिश्रा जी मुझे बेटी तरह मानते हैं और बेटी की नजर से देखते हैं और मैं भी उनको पापा की तरह मानती हूं:- मोनालिसा (ठीक 11 माह पहले)
अब ठीक 11 महीने बाद मोनालिसा में “जिन्हें पापा की तरह मानती थी” उसी पापा को कह रही हैं कि उसने इन्हें 10 बार टच किया। मोहतरमा को नंबर तक याद है।
हालांकि ये भूल गई थीं कि X पर एक पत्रकार शुभम शुक्ला भी है। जो मामले की यह तक जाता है और बिना किसी एजेंडे के पूरे मामले का पर्दाफाश कर देता है।
ये पहले भी लिखा था,फिर आज पहला ट्वीट यही कर रहा हूं, लंबा है लेकिन बेहद जरूरी है, पढ़ें जरूर:-
ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद
ब्राह्मणवाद की कब्र खुदेगी JNU की धरती पर ….
सामाजिक न्याय के नाम पर ये जो नारे लगाए जाते हैं, उनमें एक बुनियादी दिक्कत है. मैं इस पर बहस करने के लिए तैयार हूँ.
तो जाति आधारित भेदभाव को ब्राह्मणवाद कहा जाता है. इसके पीछे का तर्क है कि जाति व्यवस्था को बनाने वाले ब्राह्मण थे. इसके विरोध में मनु स्मृति जलाते हैं. ऐसा करने वालों का मानना है कि मनु ने अपनी किताब में ऐसा लिखा है. लेकिन कमाल की बात है कि मनु ब्राह्मण नहीं थे. मत्स्य पूरण के मुताबिक 14वें मनु का नाम श्रद्धादेव था. और वो द्रविड़ देश राजा हुआ करते थे. बाद में इन्ही के वंश में इक्ष्वाकु, पृथु, रघु और राम चन्द्र जी पैदा हुए. इसका मतलब है कि मनु महाराज खुद क्षत्रिय थे.
लेकिन ये तर्क देना कि जाति व्यवस्था की शुरुआत “मनु स्मृति” से हुई, ये भी अर्ध सत्य है. मनु स्मृति वेद वांग्मय की कई स्मृतियों में से एक है. यह स्मृतियाँ ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह एक तरह से इस सभ्यता का पहला व्यवस्थित कानून है. लेकिन मनु स्मृति में दिए गए नियम किसी भी कालखंड में पूरी तरह से लागू हुए हों ऐसा प्रमाण इतिहास में नहीं मिलता. कोई भी राज्य मनु स्मृति के आधार पर चला हो, ऐसा उदाहरण इतिहास में नहीं है. मनु स्मृति में उस समय की सामाजिक मान्यताओं के आधार पर वर्णों के काम और उन्हें ना करने पर क्या सजा होनी चाहिए इसका उल्लेख भर है.
तो फिर क्या जाति व्यवस्था ऋगवेद के पुरुष सूक्त से उपजी है. इसका भी जवाब नहीं है. पुरुष सूक्त के 13वें श्लोक में यह कहा गया है ब्राह्मण मुख से, क्षत्रिय बाहू से राजन्य, उदर से वैश्य और पैरों से शुद्र जन्मते हैं. इस श्लोक को बार-बार गलत अर्थों में पेश किया जाता है. पुरुष सूक्त में ईश्वर की कल्पना एक विराट पुरुष के तौर पर की गई है. जिनके मन से चन्द्र, चक्षु से सूर्य इन्द्रियां अग्नि से और प्राण वायु से जन्मते हैं.
इसका मतलब ये नहीं है कि पुरुष सूक्त पढ़कर समाज चार वर्णों में बंटा. यह पहले से इन चार वर्णों में बंटा हुआ था. और यह अकेले भारत की कहानी नहीं है. दुनिया भर की तमाम सामाजिक व्यवस्थाओं में इस किस्म की हैरारकी देखने को मिलती है. चाहे मेसोपोटामिया हो या ग्रीक सिटी स्टेट. और यह सिलसिला मध्यकाल तक चलता है. आज भी इंग्लैंड के हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स का ढांचा इसी व्यवस्था पर आधारित दिखेगा.
तो जाति व्यवस्था किसने और कब शुरू की, इसका कोई ठोस जवाब हमारे पास नहीं है.
ऐसे में सवाल यह है कि जाति आधारित भेदभाव के लिए सिर्फ ब्राह्मणों को दोषी क्यों ठहराया जाता है? जबकि लगभग सब जातियां अपने से छोटी जाति के साथ भेदभाव करती आ रही हैं. इतिहास में जो भेदभाव एक ब्राह्मण ने एक जाटव के साथ किया उतना ही भेदभाव एक कुर्मी, मीणा और यादव ने एक जाटव के साथ किया. फिर उसी जाटव ने एक वाल्मीकि के साथ भेदभाव करने में कोई कंजूसी नहीं बरती. भारत में जाति आधारित भेदभाव एक सच्चाई है लेकिन यह बात भी उतनी ही सच है कि जातिगत भेदभाव कई परतों में काम करता है.
तो फिर ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद के नारे क्यों लग रहे हैं. जवाब है कि दूसरे विश्वयुद्ध में यहूदियों का नरसंहार क्यों हुआ. ऐसा नहीं है कि यहूदियों को अचानक से हिटलर ने निशाना बनाना शुरू कर दिया. यहूदियों के खिलाफ नफरत की जड़े 1900 साल पुरानी थीं. कभी उन्हें जीसस का हत्यारा कहा गया, कभी ब्लैक डेथ का जिम्मेदार बताया गया.इस सबने हिटलर को नरसंहार करने का ग्राउंड दिया. और भरोसा मानिए, हिटलर के दौर पर उसके इन कदमों पर किसी सवाल खड़े नहीं किए. यहूदियों के नरसंहार के किस्से तो जर्मनी की हार के बाद सामने आए.
ब्राह्मणों के खिलाफ पिछले चार दशक से एक हेट कैम्पेन चल रहा है. क्योंकि OBC और दलितों को एक छतरी के नीचे लाने के लिए एक बड़े दुश्मन की जरुरत थी जिसका भय दिखाकर यह गोलबंदी की जा सके. नफरत की राजनीति में एक डर, एक भय का होना जरुरी है. इसलिए कभी इस्लाम खतरे में होता है, कभी हिन्दू खतरे में होता है, कभी गोरा खतरे में होता है.
जिस जाति आधारित भेदभाव में समाज की लगभग हर जाति शामिल है, उस अपराध की गठरी सिर्फ ब्राह्मणों के मत्थे डाल दी गई है. ये राजनीतिक जालसाजी है.
'ब्राह्मणवाद मुर्दाबाद' सिर्फ एक नारा नहीं है. यह जिनोसाइड की भूमिका है.
प्रोफेसर शुभम शुक्ला (जातीय नफरत मामलों के जानकर✍🏻✍🏻
पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों के लिए लाल चौक में ऐसा दृश्य मैने नहीं देखा था,
पहलगाम में हुए हमले मरे हुए सिविलियन के लिए लखनऊ में प्रदर्शन मैने नहीं देखा,
फिर ऐसा क्या है जो हमारे देश का भी नहीं है उसके लिए प्रदर्शन।
शर्मनाक।
भिखारिस्तान के कटोरा शरीफ ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट साइन किया था।
सऊदी अरब पर हमला पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा और पाकिस्तान पर हमला सऊदी अरब पर हमला माना जाएगा।
अफगानिस्तान पाक के बजा रहा है सऊदी चुप
ईरान सऊदी की बजा रहा है पाक चुप
कैसा है यह डिफेंस पैक्ट..See more
मैं ब्राह्मण नहीं हूं।
लेकिन मैं फ़िर भी ब्राह्मणों के साथ हूं।
आप जातियों में बंटने की बजाए अपने धर्म पर टिक्के रहे।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में ‘ब्राह्मणवाद जिंदाबाद’ का नारा लगाने वाली यह बहुजन समाज की लड़की मेघा लवारिया है
सुनो-सुनो-सुनो……भारत U-19 विश्वकप का विजेता बन गया है।
वैभव सूर्यवंशी के रूप में भारत को एक स्टार नहीं सुपरस्टार बल्लेबाज मिल गया है।
जियो जवानों इतिहास रच दिया। रिकॉर्ड कायम कर दिया।
बधाई…..बधाई…..बधाई…..🎉