25 वर्षों से दैनिक अखबारों में व्यंग्य लेखन, आठ साल अमर उजाला, जागरण, कल्पतरु एक्सप्रेस, दैनिक न्यू ब्राइट स्टार, पंजाब केसरी देहरादून, देश रोजाना के संपादक पद
शुतुरमुर्ग रेत में चोंच घुसेड़कर सोचता है कि खतरा टल गया। लेकिन वह यह नहीं जानता कि उसके आंखें बंद कर लेने से कुछ होने वाला नहीं है। आजकल राजनीति में यही किया जा रहा है। बेवकूफों को कौन समझाए कि खतरा टला नहीं है। और बढ़ सकता है।
एपस्टीन का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। फिर मचेगा बवाल, होगा गदर। नए नए आरोप और सफाइयां आएँगी और फिर मामला ठंडे बस्ते में। कुछ परिवर्तन शायद ही हो।
शर्म आनी चाहिए ऐसी पत्रकारिता करने वालों को। खबर की पुष्टि किए बिना किसी महिला की इज्जत को इस तरह उछालने वाले पत्रकारों का मुंह काला करके बाजार में घुमाना चाहिए। वैचारिक मतभेद हो सकता है, लेकिन इस प्रकार की नीचता। छी...
रिजीम चेंज करने की बात करना क्या वाकई खतरनाक बात है? लोकतांत्रिक देशों में तो सत्ता परिवर्तन तो होता आया है। हां, उसका तरीका जरूर लोकतांत्रिक रहा है। हमारे देश में भी सत्ता परिवर्तन हुए हैं। फिर इतनी हायतौबा क्यों?
मुख्य चुनाव आयुक्त को 48 घंटे का अल्टीमेटम,नहीं तो देशव्यापी आंदोलन, CJP ने किया ऐलान। देश में चुनाव आयोग को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को खुली चुनौती दी है। अभिजीत दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस ...
चुनाव आयोग में मतभेद की जो खबरें आज चल रही हैं,उसमें कितनी सच्चाई है? राहुल गांधी इस बात को एक अगस्त 2025 से दोहरा रहे हैं कि चुनाव आयोग वोट चोरी कर रहा है। इसमें कितनी सच्चाई है। आप लोग बताएं।
इंदौर में राहुल गांधी द्वारा आयोजित छात्रों की गूंज क्या सचमुच प्रभावहीन रही? इस बारे में आप क्या सोचते हैं? राहुल गांधी को कमेडियन को मंच पर जगह नहीं देनी चाहिए थी। आपका क्या कहना है?
दिल्ली यूनिवर्सिसी के छात्र संघ चुनाव में एनएसयूआई को हारना क्यों पड़ा? इस पर एनएसयूआई को गहन मंथन की आवश्यकता है। क्या जेन जेड के मुगालते में रहे एनएसयूआई वाले?
दिल्ली यूनिवर्सिसी के छात्र संघ चुनाव में किसका पलड़ा भारी लग रहा है? मुझे तो लगता है कि एनएसयूआई बेहतर कर सकती है। आप लोगों का क्या विचार है? जरूर बताएं।
शरदकालीन त्यौहार नजदीक आ रहे हैं। त्यौहारों के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने का कारोबार तेज हो जाता है। ऐसी स्थिति में मिलावट करने वालों के खिलाफ अभियान चलाने की योजना सरकारों ने बनाई है। लेकिन क्या मिलावट रुकेगी?
रिश्तों की डोर लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। कुरुक्षेत्र के पिहोवा में पिछले दस साल से रह रहे जुगल किशोर की मौत हो गई। उनकी बहन मौत के बाद भाई को देखने आई तो लेकिन अंतिम संस्कार में शामिल होने से इंकार कर दिया। समय नहीं होने, तबीयत खराब होने जैसा बहाना बनाया।
जो हरियाणा को स्वच्छ रखने में जुटे हैं, उनके भविष्य को सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
नगर निकायों में कार्यरत 13,093 पालिका रोल सफाई कर्मचारियों को हरियाणा संविदात्मक कर्मचारी (सेवा की सुरक्षा) अधिनियम, 2024 के दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है। इससे 60 वर्ष तक सेवा सुरक्षा, नियमित कर्मचारियों के लगभग समान लाभ और ₹2,000 मासिक जोखिम भत्ता मिलेगा।
इसके अतिरिक्त 15% अधिक मासिक राशि, वार्षिक महंगाई भत्ता, डेथ-कम-ग्रेच्युटी, मातृत्व अवकाश तथा HKRNL के तहत एक्स-ग्रेशिया वित्तीय सहायता एवं नियुक्ति जैसी सुविधाएं मिलेंगी। 10 वर्षों से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों की मासिक देय राशि ₹25,560 होगी।
हरियाणा को स्वच्छ रखने वाले इन कर्मठ साथियों के सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।