वो रस डोलत आपने, उनके फाटत अंग| विश्व को सेकुलर बनाने का अर्थ बर्बर. असभ्य संस्कृति जो कायरों की तरह मजबूर और दुर्बल को मारे काटें उन लोगों को रोकना अनिवार्य है अन्यथा पहले दुर्बल मरेंगे फिर वे भी बचेंगे नही|
-Ashok
@SwamiPMaurya स्वामी प्रसादजी, "माड़वक सूक्त" में देखें, जब माड़वक बुद्ध के सामने ब्राह्मणों की बुराई करने लगा तब बुद्ध ने उसे रोका और उससे उन्होंने कहा, "नहीं माड़वक पहले के ब्राह्मण ऐसे नहीं थे|" ब्राह्म्ण शब्द यदि आपने नहीं बनाया तो कृपया इसे देखें| स्वस्थ आलोचना करण|
@Jairam_Ramesh राष्ट्रीय महत्व के इस प्रतीक चिन्हों के साथ कलाकारों की, उन्हें पारश्रमिक देने वाले अधिकारियों, उसका अनावरण करने वाले राजनेताओं, मीडिया की चुप्पीऔरसंवेदनहीनताअच्छम्य है| भारत की आत्मा और इतिहास इन्हें क्षमा नहीं करेगा| -अशोक 'मनीष'
सब से अधिक मूर्ख, सबसे अधिक घमंडी होते हैं। तुम्हारी मूर्खता तुम्हारे घमंड के अनुपात में होती है। ... तुम किसी सच्चे वैज्ञानिक से मिलो जिसने कठोर परिश्रम किया हो, वह तुमसे कहेगा, -“हम कुछ नहीं जानते”।
-श्रीमातृवाणी-05/26-27