काय ताकद असेल मनाची ! आत्म्याची.अकरा दिवस झाली अन्नाच कण तर राहूद्या. एक थेंब पाणी ग्रहण नाही . मुळ चे कोल्हापूर जिल्ह्यातील असलेले मुनी कोल्हापुरी स्टाईल मध्ये दंड थ��पटतांना..!! जणू यमराजला थेट आव्हान देत असावेत.#आचार्य_वर्धमानसागरज #Sallekhna
रात्रि 11:34 बजे...
एक और आत्मा ने हमें याद दिलाया कि शरीर नश्वर है , पर आत्मा अमर है।
पूज्य आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने समाधि मरण (सल्लेखना) के माध्यम से जीवन का वह अध्याय पूर्ण किया, जिसे जैन दर्शन में मृत्यु नहीं, बल्कि जागृति कहा गया है।
वर्षों का तप , अनगिनत उपवास , अटूट ब्रह्मचर्य , अनंत संयम , और अंत में पूर्ण समता के साथ शरीर का विसर्जन। दुनिया मृत्यु से डरती है, लेकिन आज ���मने देखा कि एक महापुरुष ने मृत्यु को भी साध लिया। अनन्त-अनन्त वंदन।
पूज्य आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का समाधि मरण युगों-युगों तक साधकों को प्रेरणा देता रहेगा। 🙏
@DCPCityAgra@vikasmoonagra@DCPCityAgra पुलिस द्वारा गलत जानकारी प्रेषित करना बिलकुल भी उचित नहीं है उक्त जगह 2022 में न्यायालय द्वारा जै�� समाज को दे दी गई है
@DCPCityAgra@AgraMirror@DCPCityAgra आपके द्वारा गलत जानकारी प्रसारित की जा रही है उक्त जगह 2022 में माननीय न्यायालय द्वारा जैन समाज को मिल चुकी है और नितिन शिवहरे के खिलाफ तहरीर दे दी गई है रकाबगंज थाने में आशा करते है आप अपन�� जानकारी ठीक करें
आज आगरा शहर में दिन दहाड़े रकाबगंज थाने की नाक के नीचे जैन समाज की सदियों पुरानी जगह पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कब्जे की कोशिश की गई हम प्रशासन से गुजारिश है कि इसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए
@UPGovt@dgpup@Uppolice@myogiadityanath@agrapolice @akhikesh
@DCPCityAgra@UPGovt@dgpup@Uppolice@myogiadityanath@agrapolice माननीय न्यायालय द्वारा 13 मई 2022 को जैन समाज उक्त भूमि पर अमीन के द्वारा कब्जा दिलाया गया था तभी से जैन समाज इस पर पूर्�� कानूनी रूप से काबिज है समय समय पर यहां धार्मिक आयोजन होते रहते है आज प्रातः ग़ैर कानूनी रूप से नितिन शिवहरे द्वारा गुंडई करते हुए कब्जा करने की कोशिश की
●A public allegation against the revered Digambar Jain Sadhu tradition by @Manekagandhibjp
without credible evidence of killing 15 lakh peacocks for their feathers is deeply irresponsible and unacceptable .
A legal notice was sent to her about which she surprisingly said this 🔽
■She claims that the legal sale of peacock feathers in India exists primarily because Digambar Jain monks use pichhis.
■She says " Wanting peacock feather peechis is just greed and Laalach and Hawas. If the monk can give up everything including clothes why should they want the feathers of dead birds around them"
■She contends that the use of pichhis is not an essential religious requirement but merely a later custom.
■She also says she considers herself sympathetic to Jainism and believes ending this practice would correct what she views as a mistake.
Few of our questions deserve answers too
1:- Where is the evidence that Digambar Jain monks procure feathers from killed peacocks rather than naturally shed feathers?
2:- Which government agency has officially concluded that the Jain pichhi tradition is responsible for mass peacock killings?
3:- If illegal poaching exists, shouldn't the criminals be punished instead of blaming an entire religion built on Ahimsa?
Digambar Jain monks have renounced worldly possessions and dedicate their lives to non-violence living a life which bothers the least.
● we strongly urge you to withdraw these remarks, substantiate them with evidence, or issue a public clarification and apology cuz Extraordinary allegations require extraordinary evidence—not assumptions
@BJP4India@varungandhi80@AmitShah@BJP4Delhi
#Ahimsa #DigambarJain #Jainism
आज आगरा शहर में दिन दहाड़े रकाबगंज थाने की नाक के नीचे जैन समाज की सदियों पुरानी जगह पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा कब्जे की कोशिश की गई हम प्रशासन से ग��जारिश है कि इसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए
@UPGovt @dgpup @Uppolice @myogiadityanath @agrapolice @akhikesh
अतिशय क्षेत्र नांदगीरी - नांदगिरि एक दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र (गुफा मंदिर) है जो वर्षो से उपेक्षित और निर्जन पड़ा था । ये कल्याणगढ़ किले का ही एक हिस्सा है जो की समुद्र तल से ३५३७ फ़ीट की उचाई पर एक पहाड़ पर है । ये क्षेत्र महाराष्ट्र के सातारा जिले की कोरेगाँव तालुका में है और सातारा से मात्र २५ किलोमीटर है ।
इस गुफा मंदिर में भगवन पारसनाथ जी की प्राचीन और अतिशयकारी प्रतिमाजी विराजमान है। गुफा में वर्ष के ८ -९ महीनो तक २ फ़ीट के करीब पानी रहता है, किन्तु वह लोहे की रेलिंग लगी है जिसकी मदद से गुफा में स्थित जैन मंदिर तक आसानी से पंहुचा जा सकत��� है ।
ये क्षेत्र (गुफा मंदिर) सर्व प्रथम नन्द् राजा ने बनवाया था, नन्द राजा और उसके मंत्री सभी जैन थे । ज्ञान कोष में भी ये नन्दगढ़ के नाम से दिया गया है । किसी समय यहाँ और आस पास हजारो जैन रहते थे किन्तु काल के प्रभाव से और दुर्भाग्य से आज एक भी जैन यहाँ नहीं है । और इसी वजह से यहाँ विधर्मी, अन्य धर्मी और अन्य सम्प्रदाय के लोगो ने कई बार इस गुफा मंदिर पर कब्ज़ा करने का प्रयत्न किया (२००२ में और २०१० में) , जिसके कई मुकदमे आज भी चल रहे है । और गुफा में ही एक अन्य धर्मी नवीन प्रतिमा तो आज भी विराजमान है, जिसे हटाना अब संभव नहीं है, किन्तु हमें अपने गुफा मंदिर और प्रभु पार्श्वनाथ की प्राचीन प्रतिमा को बचाना ही होगा । हमें जल्द से जल्द ध्यान देकर और क्षेत्र का दर्शन करके स्थिति को सम���भालना होगा । सातारा के जैन समाज के प्रयासों से अब यहाँ पहाड़ की तलहटी में एक नवीन धर्मशाला, भोजनशाला, और संत निवास का निर्माण कार्य प्रगति पर है । गुफा मंदिर को बुलेट प्रूफ बनाया गया है ताकि कोई समाजकंटक प्रतिमा जी को नुक्सान न पहुचाये । और प्रभु प्रतिमा जी का वज्र लेप भी किया गया है । भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमिटी ने भी इस क्षेत्र को अतिशय क्षेत्रों की सूची में दर्ज़ कर लिया है ।
बंधुओ ...सं��र्धन से पहले संरक्षण अति आवश्यक है ...अतः आप सभी से अनुरोध है की जानकारी को अधिक से अधिक शेयर कर अपने सधर्मी बंधुओ तक पहुचाये | जय जिनेन्द्र | उत्तम क्षमा |
अतिशय क्षेत्र नांदगीरी के बारे में और अधिक जानकारी आपको इस पेज से मिल सकती है | इसकी लिंक है
#Jainism #history