@UPGovt माननीय, यह दृष्टांत मेरे यात्रा का है जो आपके परिवहन विभाग की इलेक्ट्रिक बस(UP32 PN6593)के कंडक्टर और चालक के द्वारा बिना किसी यात्री को टिकट दिए बस को बिना किसी डर और तानाशाही से चलाई जा रही है
विरोध करने पर कंडक्टर द्वारा मुझे धमकाया जाता है
कृपया उचितकार्यवाही करे
We came on a trip to Mussoorie, but our vehicle was stopped by RTO officials. They demanded our car without any written order, saying it’s required for PM Modi’s rally on 14 April for the Delhi–Dehradun corridor inauguration. This is unfair and inconvenient for travelers.
We reflect on the life of Dr BR Ambedkar and his timeless values of justice and dignity on his 136th birth anniversary. A fierce defender of human rights, Babasaheb’s vision of an equal world is at the heart of the Sustainable Development Goals and our work at the United Nations
डॉ अंबेडकर जयंती देश भर में धूम धाम से मनाई जा रही है। जनता मना रही है। वीडियो मुंबई के बांद्रा इलाक़े का है। 14 अप्रैल की पूर्व संध्या का। सभी की तरफ़ से सभी को बधाई।
बाबसाहेब भीमराव अंबेडकर के बारे में सबसे बड़ा झूठ ये है कि वो सिर्फ़ दलितों के नेता थे.
सच तो ये है कि अगर डॉक्टर अंबेडकर दलितों के मसीहा हैं तो महिलाओं के लिए भी भगवान से कम नहीं हैं.
ये डॉक्टर अंबेडकर ही थे जिन्होंने भारत में महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाया…वरना स्विट्ज़रलैंड जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1971 में जाकर मिल पाया.
जिस जमाने में महिलाएँ चारदीवारी में बंद रहा करती थीं, डॉक्टर अंबेडकर ने उस दौर में कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिलवाया…वरना अमेरिका जैसे देश में भी महिलाओं को ये अधिकार 1993 में मिला.
महिलाओं को नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें संपत्ति में बराबर अधिकार दिलाने की वकालत भी डॉक्टर अंबेडकर ने ही की थी.
ध्यान रहे कि…
बाबासाहेब ने मनुस्मृति को सिर्फ़ इसलिए नहीं जलाया था कि इसमें दलित विरोधी बातें लिखी थीं…बल्कि इसलिए भी जलाया था क्योंकि इसमें महिलाओं को ग़ुलाम बनाने के तरीक़े लिखे थे.
कुल मिलाकर देश की महिलाओं को याद रखना चाहिए कि भारत में महिला अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा डॉक्टर अंबेडकर जी ही थे.
जय भीम जय भारत…🇮🇳💐
पटना हाइकोर्ट के पास UGC के समर्थन में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं लोगो को अब पता चल गया है कि उनके अधिकारों को खतरा कॉलेजियम से है या सरकार से?
कॉलेजियम से बने जज के एक फैसले ने इस देश में इतना हंगामा करवा दिया है।
#UGC_लागू_करो
भारतीय रेलवे…..!!!
इसको हम सब एक कूड़ेदान की तरह इस्तेमाल करते हैं…
जोधपुर से बैंगलोर ट्रेन रवाना होती है, तब एकदम साफ़ चकाचक स्थिति में होती थी…
48 घंटे की यात्रा करके जब ट्रेन बैंगलोर पहुँचती है…
तो स्लीपर क्लास के डब्बे किसी कूड़ेदान से कम नहीं लगते….!!!
हम लोगों में क्या कभी सफ़ाई के प्रति जागरूकता आ पाएगी….!!!
कल जिन GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने भंभा-भंभाकर सरकार के समर्थन में इस्तीफा दे दिया.
अब उनके सगे बड़े भाई का कहना है 👇
• प्रशांत सिंह ने विकलांग सर्टिफिकेट बनवाकर एक विकलांग का हक मारा है
• मेरी बहन जया सिंह भी विकलांग सर्टिफिकेट बनवाकर तहसीलदार बन गईं
“UGC लाकर गधों को घोड़ा बनाओगे।
तुम्हारी नस्लों की नस्लें टूटकर बिखर जाएँगी,
फिर भी तुम सवर्णों का रोआँ नहीं उखाड़ पाओगे।”
UGC के नए प्रावधान का विरोध कर रहे सवर्णों को बस आप सुन लीजिए।
बाक़ी, समझदार के लिए इशारा काफ़ी होता है।
UGC Bill के मसर्थन में अब पूरे देश के दलित पिछड़े समाज के लोगों को उतरना चाहिए।
अगर अब भी चूक गए तो इसी प्रकार से हमेशा हमारी आने वाली पीढियों का शोषण होता रहेगा...
#UGCAct#We_support_UGC_Act
“मैं ख़ुद सवर्ण हूँ, और सवर्ण होने के बावजूद मैं जिस यूनिवर्सिटी में पढ़ा हूँ या जहाँ भी पढ़ा हूँ वहाँ देखा है वहाँ इस तरह के भेदभाव होते हैं”
ये बात ख़ुद SC ST का व्यक्ति नहीं बल्कि ख़ुद सवर्ण समाज का व्यक्ति स्वीकार कर रहा हैं कि स्कूलों और कॉलेजों में जातिगत भेदभाव होता हैं।
यूजीसी बिल का विरोध अधिकतर वही लोग कर रहे हैं जो समानता की भावना नहीं रखते हैं ना वो जाति के आधार पर भेदभाव एवं उत्पीड़न पर रोकने की बात नहीं करते हैं न बोलते हैं।
क्योंकि UGC बिल में बड़े बड़े अक्षरों में लिखा है कि जो छात्र के साथ जातिगत भेदभाव या शोषण करता है तो बदले में उस पर मुक़दमा होगा लेकिन उससे पहले उस मामले की जाँच होगी और अगर जाँच दोषी साबित होंगे तो दोषी करार दिए जाएँगे।
अब बताओ एक शोषणकर्ता को सज़ा मिले इससे क्या होगा और इसलिए जातिगत आधार पर उत्पीड़न को रोकने के लिए ये कानून लाया गया है।
ये विशाल यादव हैं इन्होंने जेएनयू मे JRF के बाद PHD के लिए प्रो.विकास बाजपेई के पैनल को इंटरव्यू दिया था।
20 मिनट ऑनलाइन साक्षात्कार हुआ लेकिन जब रिजल्ट आया तो इनको अब्सेंट दिखा दिया गया।
बस इसी जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए UGC बिल आया है।
UGC क़ानून ने अंधभक्तों का नशा उतार दिया.
UGC क़ानून इसलिए भी जरूरी था ताकि सरकार के अंधसमर्थकों की मूर्छा टूटे…
…उनका ये भ्रम दूर होना जरूरी था कि ये देश उनकी अवैध मांगों से चलेगा…
जिन लोगों को लगता है कि UGC सिर्फ लड़ाई झगड़ों के लिए लाया गया है तो वह गलत सोच रहे है।
UGC से हमको इस तरीके के होने आले भेदवभाव से बचायेगा..
जो जातिवाद का नंगा नाच खुलेआम होता था उस पर इसी के माध्यम से अब लगाम लगाया जाएगा..
दिल्ली विश्वविद्यालय में 42 साल तक प्रो संगीत रागी को कोई जातिवाद नहीं दिखाई देता है।
उसी DU में प्रो. कौशल पवार को 12 साल में ही नरक दिखा दिया जाता है।
विश्वविद्यालय में भेदभाव की कहानी पूरे एपिसोड में देख सकते हैं-ये क्लिप तो सिर्फ बाहर की यातना का है।
रेपिस्ट को बचाने के लिए यूपी में BJP के नेता दलाली करने पहुंचे
पीड़िता को धमका रहे हैं, घर जाकर 'सेटलमेंट' करने की दलाली कर रहे हैं
यह है इनका असली 'चाल-चरित्र-चेहरा'