पढ़ाई पर ताना मारा जा रहा है. सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाया जा है पढ़ाई का क्या फायदा जब बिना पढ़े लिखे एक चाय वाला लाखों कमा रहा है ?
ताना मारने वाले 100% लोग सवर्ण हैं. अगड़ी जातियों से हैं. इन्हें समस्या चाय वाले से नही है बल्कि चायवाले की जाति से है.
भारत के फेमस सेलिब्रिटी डॉली चायवाला बहुजन समाज से हैं. इसी कारण बहुतों के पेट में मरोड़ हो रही है.
अगर डॉली भाई का नाम डॉली पांडेय, डॉली मिश्रा, डॉली शर्मा या डॉली शुक्ला होता तब कोई पढ़ाई लिखाई या डिग्री नही खोजता.
जाति के कारण अपने डॉली भाई को निशाना बनाया जा रहा है. सवाल है कितने से प्रसिद्ध बाबा कथा वाचक और संत कम पढ़े लिखे हैं लेकिन उपदेश प्रवचन कथा के नाम पर लाखों करोड़ों कमा रहे हैं.
यहां डिग्री पढ़ाई लिखाई का मुद्दा उठाने के लिए मुंह में दही जम जाता है.
#बाबासाहेब ने 13 अक्टूबर 1935 को येवला कॉन्फ्रेंस में घोषणा की
कि मैं हिंदू धर्म में पैदा हुआ यह मेरे बस की बात नहीं थी।
पर मैं हिन्दू धर्म में मारूंगा नहीं ये मेरे बस की बात है।❤️
मैं तो शादी ऐसे व्यक्ति से ही करूंगी, जिसकी पैनी मूंछें हों और ब्राम्हणवादी विचारधारा को अपने जूते की नोंक पर रखे। 🧔
कमा कर तो हम भी उसे खिला देंगे ।। #जयभीम 🙏 @ashvaniambedkar