@RahulGandhi मुझको अपने बैंक की किताब दीजिए!
देश की तबाही का हिसाब दीजिए!
लोग जो गरीब थे हकीर हो गए,
आप तो गरीब से अमीर हो गए,
यानी कि हुज़ूर बेज़मीर हो गए,
खुद को बेज़मीरी का खिताब दीजिए!!
देश की तबाही का हिसाब दीजिए!!
क्या लगता है मिलेगा हिसाब??
#SupremeCourt#ElectoralBonds
इलेक्टोरल बांड से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद यह पहला विश्लेषण है जिसे एसबीआई ने चुनाव के बाद तक स्थगित करने के कई हफ़्तों के प्रयास के बाद कल रात सार्वजनिक किया:
•1,300 से अधिक कंपनियों और व्यक्तियों ने इलेक्टोरल बांड के रूप में दान दिया है, जिसमें 2019 के बाद से भाजपा को 6,000 करोड़ से अधिक का दान शामिल है।
अब तक, इलेक्टोरल बांड का डेटा भाजपा की कम से कम 4 भ्रष्ट नीति को सामने लाता है:
1) चंदा दो, धंधा लो
ऐसी कई कंपनियों के मामले हैं जिन्होंने इलेक्टोरल बांड दान किया है और इसके तुरंत बाद सरकार से भारी लाभ प्राप्त किया है:
क. मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा ने 800 करोड़ रुपए से अधिक इलेक्टोरल बॉन्ड में दिए हैं। अप्रैल 2023 में, उन्होंने 140 करोड़ डोनेट किया और ठीक एक महीने बाद, उन्हें 14,400 करोड़ रुपए की ठाणे-बोरीवली ट्विन टनल प्रोजेक्ट मिल गया।
ख. जिंदल स्टील एंड पावर ने 7 अक्टूबर 2022 को इलेक्टोरल बॉन्ड में 25 करोड़ रुपए दिए और सिर्फ़ 3 दिन बाद वह 10 अक्टूबर 2022 को गारे पाल्मा 4/6 कोयला खदान हासिल करने में कामयाब हो गया।
2) हफ़्ता वसूली:
भाजपा की हफ्ता वसूली नीति बेहद सरल है - ईडी/सीबीआई/आईटी के माध्यम से किसी कंपनी पर छापा मारो और फ़िर कंपनी की सुरक्षा के लिए हफ़्ता ("दान") मांगो। शीर्ष 30 चंदादाताओं में से कम से कम 14 पर छापे मारे गए हैं।
क. इस साल की शुरुआत में एक जांच में पाया गया कि ईडी/सीबीआई/आईटी छापे के बाद, कंपनियों को चुनावी ट्रस्टों के माध्यम से भाजपा को दान देने के लिए मजबूर किया गया था। हेटेरो फार्मा और यशोदा अस्पताल जैसी कई कंपनियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चंदा दिया है।
ख. इनकम टैक्स विभाग ने दिसंबर 2023 में शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स पर छापा मारा और जनवरी 2024 में उन्होंने इलेक्टोरल बांड के माध्यम से 40 करोड़ रुपए का दान दिया।
ग. फ्यूचर गेमिंग एंड होटल्स ने 1200 करोड़ रुपए से अधिक का दान दिया है जो इसे अब तक के आंकड़ों में सबसे बड़ा दान देने वाला बनाता है। आप क्रोनोलॉजी समझिए:
2 अप्रैल 2022: ईडी ने फ्यूचर पर छापा मारा, और 5 दिन बाद (7 अप्रैल) को उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड में 100 करोड़ रुपए का दान दिया।
अक्टूबर 2023: आईटी विभाग ने फ्यूचर पर छापा मारा, और उसी महीने उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड में 65 करोड़ रुपए का दान दिया।
3)रिश्वत लेने का नया तरीक़ा
आंकड़ों से एक पैटर्न उभरता है, जिसमें केंद्र सरकार से कुछ मदद मिलने के तुरंत बाद कंपनियों ने चुनावी बांड के माध्यम से एहसान चुकाया है।
क. वेदांता को 3 मार्च 2021 को राधिकापुर पश्चिम प्राइवेट कोयला खदान मिला, और फिर अप्रैल 2021 में उन्होंने चुनावी बांड में 25 करोड़ रुपए का दान दिया।
ख. मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रा को अगस्त 2020 में 4,500 करोड़ का जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट मिला, फिर अक्टूबर 2020 में उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड बांड में 20 करोड़ रुपए का दान दिया।
ग. मेघा को दिसंबर 2022 में बीकेसी बुलेट ट्रेन स्टेशन का कॉन्ट्रैक्ट मिला, और उन्होंने उसी महीने 56 करोड़ रुपए का दान दिया।
4) शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग
इलेक्टोरल बांड योजना के मामले में एक बड़ा मुद्दा यह है कि इसने यह प्रतिबंध हटा दिया कि किसी कंपनी के मुनाफे का केवल एक छोटा प्रतिशत ही दान किया जा सकता है, जिससे शेल कंपनियों के लिए काला धन डोनेट करने का रास्ता साफ़ हो गया। ऐसे कई संदिग्ध मामले हैं, जैसे 410 करोड़ रुपए का दान क्विक सप्लाई चेन लिमिटेड द्वारा दिया गया है, यह एक ऐसी कंपनी है जिसकी पूरी शेयर पूंजी MoCA फाइलिंग के अनुसार सिर्फ 130 करोड़ रुपए है।
एक अन्य प्रमुख मुद्दा डेटा का नहीं होना है
• एसबीआई द्वारा प्रदान किया गया डेटा अप्रैल 2019 से शुरू होता है, लेकिन एसबीआई ने मार्च 2018 में बांड की पहली किश्त बेची। इससे 2,500 करोड़ रुपए के बॉन्ड का डेटा गायब है। मार्च 2018 से अप्रैल 2019 तक इन गायब बांड्स का डेटा कहां है? उदाहरण के लिए, बांड की पहली किश्त में, भाजपा को 95% धनराशि मिली। भाजपा किसे बचाने की कोशिश कर रही है?
जैसे-जैसे इलेक्टोरल बांड डेटा का विश्लेषण आगे बढ़ेगा, भाजपा के भ्रष्टाचार के ऐसे कई मामले स्पष्ट होते जाएंगे। हम यूनिक (विशिष्ट) बांड आईडी नंबरों की भी मांग करते रहेंगे, ताकि हम दाताओं का प्राप्तकर्ताओं से सटीक मिलान कर सकें।
#ElectoralBondScam
#संविदाकर्मियों के लिये सत्तारूढ़ सरकार के मनोरंजन का साधन 👇
कमेटी ...कमेटी ...और सिर्फ कमेटी....
पिछले 15वर्षों से कमेटियां बन रही मगर ऐसी कमेटियां आज तक नतीजे पर नही पहुंच रही।
दया करो माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी, बचा लो संविदा परिवारों को इस कमेटी के जंजाल से🙏
@ashokgehlot51 संविदाकर्मियों के नियमितीकरण के काम को आपकी ब्यूरोक्रेसी ने बीच मे लटका दिया,
आपको आगाह करते रहे हम लोग, दर दर दरवाजे ढोगे थे आपके विधायक मंत्रियों के यहां मगर किसी ने ना सुनी,
क्या 30दिवसीय कार्ययोजना में शामिल होगा शेष बचा नियमितीकरण का काम ?
मिल सकती है गारंटी इसकी भी ?
हर बार माइनोरिटी से जुड़े लोगों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
जब शिक्षा क्षेत्र में लगे अन्य विभाग के पैराटीचर व अन्य संविदाकर्मियों को बीएड.एसटीसी. होने पर 16900मानदेय निर्धारित कर पदनाम बदला गया तो मदरसो में शिक्षा देते इन कम्प्यूटर पैराटीचर के साथ भेदभाव क्यो? @ashokgehlot51 जी
चुनावी मेनिफेस्टो 2018 में किया गया, संविदा कर्मियों के स्थाईकरण का वादा आज भी अधूरा?
जबकि आचार संहिता में 45 दिन शेष?
सत्ता में वापसी की चाबी जनता( संविदा कर्मियों ) के हाथ में है, मत भूलना.....
जननायक जी कृपया संज्ञान ले
@ashokgehlot51@kharge@RahulGandhi@1stIndiaNews
ताजमहल भी 10वर्ष लगभग में बन गया था,
देश का संविधान भी 2वर्ष 11माह 18दिन में बन गया था,
मगर इस संविदा की बेड़ियों से आज़ादी के शगूफे दशकों से चल रहे,
क्या IAS पैटर्न की फाइल आचार संहिता तक उलझाने को बैठी है ब्यूरोक्रेसी? मुख्यमंत्री @ashokgehlot51 जी संज्ञान लीजिये।
आदरणीय मुख्यमंत्री श्री @ashokgehlot51 साहब, संविदाकर्मियों के नियमितीकरण की प्रोसेज पर फिलहाल कोई स्पष्ट नीति नही है,
आपकी ब्यूरोक्रेसी ही इस काम को लटका रही,
आपकी निगरानी में ही कोई डेडलाइन घोषित नही होगी तब तक ये काम असंभव सा प्रतीत हो रहा,, कृपया संज्ञान लेंवे।
#नियमितीकरण
@ShaleMohammad_ जब ये पैरवी हो सकती है जो कि आपके अधिकार क्षेत्र में भी नही है,
तो जो आपके विभाग मदरसा बोर्ड में कार्यरत ट्रेंड कम्प्यूटर पैराटीचर जो STC,B.ED,D.el.ed है उन्हें क्यो वंचित रखा जा रहा?
क्या आपको आपके ही विभाग में हुई ये नाइंसाफी नही दिख रही?
दूसरे विभाग 100कदम आगे है ऐसे कामो में!
कहाँ से आ जाते है ये लोग ?
@Ra_THORe साहब कौनसे मदरसे वालो को किस संविदा की नोकरी में प्राथमिकता दी गई है?
अपने आंकड़े दुरुस्त करिये माराज,
माना कि भाजपा सांप्रदायिक विष बेल पर फलती फूलती है मगर ये क्या की बेसिर पैर के ही अफवाह फैलाई जाये,
शर्म कर लेना थोड़ी..
@ImranHu13695226@ashokgehlot51 मदरसा बोर्ड ने हम 250 cpt जो bstc/bed/deled की योग्यता रखते है उन्हें शिक्षा अनुदेशक नहीं बनाकर हमारा भविष्य ख़राब कर दिया है
मुख्यमंत्री जी के आदेश की भी धज्जिया उड़ा दी है मदरसा बोर्ड ने जिसमे विद्यमान कार्मिक जो bstc/bed/deled की योग्यता रखते है उन्हें 16900 मानदेय दिया जाये