बिहार शिक्षक ट्रांसफर-पोस्टिंग: अब ई-शिक्षाकोष पर चुन सकेंगे 3 से 30 स्कूल, शिक्षा विभाग ने जारी किया नया अपडेट
पटना/मुजफ्फरपुर:
#बिहार के #सरकारी_स्कूल में कार्यरत शिक्षकों के तबादले (#TEACHERTransfer Posting) को लेकर शिक्षा विभाग ने एक और बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। विभाग की ओर से #ईशिक्षाकोष (#eShikshakosh) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया को लेकर नई गाइडलाइंस और विकल्पों की सीमा तय कर दी गई है। इस नए अपडेट के बाद अब शिक्षकों के बीच #ट्रांसफर के विकल्पों को लेकर चल रहा असमंजस पूरी तरह खत्म हो गया है।
कम से कम 3 और अधिकतम 30 स्कूलों का विकल्प
शिक्षा विभाग के नए आदेश के अनुसार, जो भी शिक्षक या #विशिष्ट_शिक्षक अपने मनचाहे जिले या ब्लॉक में ट्रांसफर चाहते हैं, उन्हें ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर आवेदन करते समय स्कूलों की चॉइस (विकल्प) भरनी होगी।
न्यूनतम सीमा: फॉर्म को सबमिट करने के लिए शिक्षकों को कम से कम 3 जिलों या प्रखंडों (ब्लॉक) का चयन करना अनिवार्य होगा। इससे कम विकल्प देने पर आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अधिकतम सीमा: सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शी तरीके से स्कूल अलॉट करने के लिए शिक्षकों को अधिकतम 10 से लेकर 30 विद्यालयों तक को अपनी प्राथमिकता (Preference) सूची में शामिल करने की छूट दी गई है।
सॉफ्टवेयर के जरिए होगा रैंडम अलॉटमेंट
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया को मानवीय हस्तक्षेप से दूर रखने के लिए 'केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर' (Centralized Software) का सहारा लिया जा रहा है। शिक्षक अपनी पसंद के अनुसार 1 से 30 तक के स्कूलों को क्रमबद्ध करेंगे। इसके बाद सॉफ्टवेयर शिक्षक की श्रेणी (महिला, दिव्यांग, असाध्य रोग से पीड़ित या सामान्य), उनकी सर्विस सीनियरिटी और संबंधित स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को देखते हुए उपलब्ध सीट के आधार पर ऑटोमैटिक स्कूल अलॉट कर देगा।
ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऐसे करना होगा आवेदन: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
शिक्षकों की सुविधा के लिए विभाग ने पोर्टल को बेहद यूजर-फ्रेंडली बनाया है। आवेदन की मुख्य प्रक्रिया इस प्रकार है:
लॉगिन प्रक्रिया: शिक्षकों को ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर जाकर अपनी 12 अंकों की टीचर आईडी (Teacher ID) और पासवर्ड से लॉगिन करना होगा।
OTP वेरिफिकेशन: 'Transfer Module' पर क्लिक करते ही शिक्षक के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे दर्ज करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
डेटा मिलान: लॉगिन होते ही शिक्षक की वर्तमान पोस्टिंग, ज्वाइनिंग डेट और अन्य विवरण स्क्रीन पर दिखेंगे। यदि इसमें कोई गड़बड़ी है, तो उसे सुधारने का मौका भी दिया जा रहा है।
चॉइस लॉकिंग: अंत में, शिक्षकों को कम से कम 3 और अधिकतम 30 स्कूलों/प्रखंडों की लिस्ट चुनकर अपनी प्राथमिकता लॉक करनी होगी।
किन शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता?
इस ट्रांसफर नीति में महिला शिक्षकों, दिव्यांग शिक्षकों और गंभीर बीमारियों से ग्रसित शिक्षकों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा, जिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहां सबसे पहले पदस्थापन (Posting) की जाएगी ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
विशेष नोट: शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को सचेत किया है कि वे किसी भी दलाल या बिचौलिए के झांसे में न आएं। ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से डिजिटल और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की जा रही है। किसी भी तकनीकी सहायता के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय में हेल्प डेस्क की शुरुआत भी की गई है।
बड़ी तैयारी: बिहार के सरकारी स्कूलों की टाइमिंग में हो सकता है बड़ा बदलाव, अब सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक चलेंगी कक्षाएं!
पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों के समय-सारणी (Time Table) को लेकर शिक्षा विभाग एक बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों का समय अब सुबह 8:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक करने की प्रबल संभावना है। इसके ठीक बाद स्कूलों में प्रस्तावित 'सरकारी कोचिंग' यानी एक्सटेंडेड लर्निंग सेंटर की शुरुआत की जाएगी।
आइए जानते हैं कि शिक्षा विभाग इस नए टाइम-टेबल पर क्यों विचार कर रहा है और इसके पीछे के मुख्य कारण क्या हैं।
क्यों बदला जा रहा है समय? ये हैं 3 मुख्य कारण
शिक्षा विभाग के गलियारों में चल रहे मंथन के अनुसार, सुबह 8:00 से दोपहर 2:00 बजे का समय तय करने के पीछे निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारण हैं:
1. 'सरकारी कोचिंग' के लिए सही समय निकालना: शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के प्रस्ताव के अनुसार, गरीब और ग्रामीण बच्चों के लिए स्कूल के बाद मुफ्त कोचिंग चलाई जानी है। अगर स्कूल दोपहर 3:00 बजे खत्म होता है, तो कोचिंग 4:00 या 5:00 बजे तक चलेगी, जिससे सर्दियों में बच्चों को घर लौटने में अंधेरा हो सकता है। स्कूल को 2:00 बजे बंद करने से दोपहर 2:00 से 3:00 बजे या 2:30 से 3:30 बजे के बीच आसानी से कोचिंग क्लासेज संचालित की जा सकेंगी।
2. मौसम और बच्चों की सुरक्षा: बिहार में गर्मी और भीषण उमस के कारण दोपहर 3:00 बजे तक बच्चों का स्कूल में रुकना कष्टदायक हो जाता है। सुबह 8:00 बजे स्कूल शुरू होने से सुबह के ठंडे और ताजे माहौल में पढ़ाई बेहतर होगी और दोपहर 2:00 बजे तक बच्चे घर लौट सकेंगे या कोचिंग का लाभ ले सकेंगे।
3. बिना अंतराल (Gap) के निरंतर पढ़ाई: दोपहर 2:00 बजे नियमित कक्षाएं समाप्त होते ही, बिना किसी लंबे ब्रेक के विशेष कोचिंग क्लास (जैसे बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी) शुरू की जा सकेगी। इससे छात्रों का समय बर्बाद नहीं होगा।
योजना से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें
शिक्षकों को मिलेगा अतिरिक्त इंसेंटिव: नियमित ड्यूटी (सुबह 8 से 2 बजे) के बाद जो शिक्षक रुककर बच्चों को कोचिंग देंगे, उन्हें सरकार द्वारा अलग से आर्थिक प्रोत्साहन (मानदेय) दिया जाएगा।
अभिभावकों से ली जाएगी राय: शिक्षा विभाग इस नई टाइमिंग और कोचिंग के प्रारूप को अंतिम रूप देने से पहले छात्र-छात्राओं और उनके माता-पिता से फीडबैक लेगा, ताकि बच्चों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित हो सके।
आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सीधा लाभ: इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, ताकि उन्हें महंगी प्राइवेट कोचिंग्स पर निर्भर न रहना पड़े।
वर्तमान स्थिति: फिलहाल इस योजना और समय-सारणी का खाका (Draft) तैयार किया जा रहा है। जल्द ही अभिभावकों और शिक्षक संगठनों से रायशुमारी करने के बाद शिक्षा विभाग द्वारा इसका आधिकारिक और अंतिम आदेश जारी किया जाएगा।
आधार, राशन, बैंक, छात्रवृत्ति, स्कूल एडमिशन, परीक्षा फॉर्म, बीमा, मनरेगा, किसान योजनाएँ और लगभग सभी सरकारी सेवाएँ आज मोबाइल OTP से जुड़ी हुई हैं।
अगर किसी गरीब व्यक्ति के मोबाइल में रिचार्ज नहीं है तो उसे OTP कैसे मिलेगी? क्या सिर्फ OTP पाने के लिए हर महीने रिचार्ज करवाना गरीबों की मजबूरी बना दी गई है?
ऊपर से टेलीकॉम कंपनियों की 28 दिन में सेवा समाप्त करने की मनमानी व्यवस्था ने लोगों पर और बोझ डाल दिया है।
पहले महीने 30 दिन का होता था, लेकिन अब 28 दिन के रिचार्ज से साल में 12 की जगह 13 बार रिचार्ज करवाना पड़ता है। इसका सीधा असर गरीब, मजदूर, किसान और छात्रों पर पड़ रहा है।
जब सरकार खुद आधार, बैंक, राशन और सरकारी योजनाओं के लिए OTP अनिवार्य कर रही है, तो कम से कम OTP सेवा को सभी नागरिकों के लिए मुफ्त किया जाना चाहिए। डिजिटल इंडिया का मतलब यह नहीं होना चाहिए कि गरीबों पर हर महीने नया आर्थिक बोझ डाल दिया जाए।
@narendramodi@JM_Scindia@reliancejio@TRAI@airtelindia@BSNLCorporate@PMOIndia@mygovindia
AAP MP राघव चड्ढा ने कहा, "आज मैंने सदन में प्रीपेड रिचार्ज कराकर अपना फोन चलाने वाले उपभोक्ताओं का मुद्दा उठाया। जब रिचार्ज की वैद्यता समाप्त हो जाती है तब आउटगोइंग कॉल का बंद होना समझ आता है लेकिन इनकमिंग कॉल भी उसके साथ बंद कर देना उचित नहीं है। ये टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी है जिस पर रोक लगनी चाहिए... मैंने मांग रखी कि कम से कम 1 साल तक इनकमिंग कॉल चालू रहनी चाहिए ताकि देश का आम आदमी राइट टू कम्युनिकेशन सरेंडर ना करें...।"
#RaghavChadha #RajyaSabha #TRAI #MobileUsers #PrepaidUsers #TelecomIssuess
मेरा LPG सिलेंडर रिफिल तो आज घर आ गया
लेकिन कुछ चीजे समझना जरूरी है।
3 मार्च को बुकिंग हुई
पेमेंट किया : 951.50 पैसा
4 मार्च को इनवॉइस बना
अमाउंट : 951.50
लेकिन, सिलेंडर नही मिला
7 मार्च को अपने आप फिर इनवॉइस बना
अमाउंट : 1011.50 पैसा
जब मैंने 3 मार्च को ही पेमेंट कर दिया था फिर मुझे 4 या 5 मार्च तक सिलेंडर मिल जाना चाहिए था, लेकिन नही मिलता है।
7 मार्च को पेमेंट अपडेट किया जाता है, आज जब सिलेंडर डिलिवरी हुई तो 60 रूपए अतिरिक्त मांगा गया, आखिर क्यों? मेरा क्या गलती था?
मैंने तो ईमानदारी से पूरा पेमेंट किया
@IndianOilcl या पोपुलर गैस डिस्ट्रीब्यूटर, पूर्णिया ने टाइम पर सिलेंडर नही दिया लेकिन अंत में मेरे से ही 60 रूपए क्यों लिया गया?
यह तो सरासर अन्याय है
बात 60 रूपए की नहीं है बल्कि सिस्टम की हैं।
3 मार्च की बुकिंग का सिलेंडर 11 मार्च को आया, साथ ही 60 रूपए का अतिरिक्त शुल्क भी लाया
महोदय,
सिस्टम की ऐसी खामियों को दूर कीजिए
जनता बहुत मेहनत से एक एक रूपए कमाती है
राघव चड्ढा की बात से सहमत हो तो रीट्वीट करते जाओ, अगर उठाई गई आवाज कानों तक पहुंच गई तो सिम बंद होने की धमकी मिलना बंद हो जाएगी।
बात में इतना दम है जब सबकुछ अपना है
रिचार्ज करना है नहीं करना है ये फैसला भी अपना होना चाहिए।
उच्च न्यायालय, पटना से
माननीय उच्च न्यायालय, पटना में शोभाकांत सिंह (ग्राम–पोस्ट: खजौली, प्रखंड: खजौली, जिला: मधुबनी) द्वारा शिक्षा विभाग के सचिव के पत्रांक 4207 दिनांक 22.11.2025 को चुनौती देते हुए दायर वाद CWJC 343/2026 की सुनवाई माननीय न्यायाधीश श्री हरिश कुमार के एकल पीठ के समक्ष की गई*।
*वाद की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री शंकर कुमार ठाकुर एवं श्री प्रभाकर ठाकुर ने प्रभावशाली दलीलें प्रस्तुत कीं। दलीलों को सुनने के उपरांत माननीय उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट टिप्पणी की कि शिक्षा विभाग के सचिव द्वारा निर्गत पत्रांक 4207 दिनांक 22.11.2025, बिहार विशिष्ट शिक्षक नियमावली, 2023 के प्रावधानों के प्रत्यक्ष रूप से विपरीत है*।
*माननीय न्यायालय ने कहा कि नियमावली, 2023 के अनुसार योगदान की तिथि से 8 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर प्रोन्नति का स्पष्ट प्रावधान है, जबकि उक्त नियमावली में पूर्व सेवा की गणना के संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में विभागीय पत्र नियमावली के अनुरूप नहीं माना जा सकता*।
*इस पर माननीय उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे चार सप्ताह के भीतर शपथपत्र (हलफनामा) दायर कर यह स्पष्ट करें कि पूर्व सेवा की गणना किस नियम एवं किस आधार पर की जा रही है तथा यह नियमावली, 2023 के अनुरूप कैसे है?
नववर्ष की पूर्व संध्या पर सभी शिक्षक साथियों के लिए संदेश! केवल निज हित का न सोच कर सभी 6 लाख शिक्षकों के हित सोचें इसी में सबकी भलाई है। आपसी प्रेम एवं सौहार्द बनाए रखें। एक दूसरे की मदद करें। एकजुट रहें! संघर्ष करें!
"ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाई जाए"
◆ मद्रास हाईकोर्ट ने कहा
#SocialMedia | Madras High Court | Social Media
वेतन वृद्धि नियम
9. संशोधित वेतन संरचना में अगली वेतन वृद्धि की तिथि। संशोधित वेतन संरचना में अगली वेतन वृद्धि की तिथि। संरचना। संरचना।— ———
(1) वेतन वृद्धि प्रदान करने के लिए प्रत्येक वर्ष की 1 जनवरी और 1 जुलाई की दो तिथियां होंगी, जो वर्तमान तिथि 1 जुलाई के स्थान पर होंगी: बशर्ते कि एक कर्मचारी अपनी नियुक्ति, पदोन्नति या वित्तीय उन्नयन की तिथि के आधार पर 1 जनवरी या 1 जुलाई को केवल एक वार्षिक वेतन वृद्धि का हकदार होगा।
(2) 2 जनवरी और 1 जुलाई (दोनों तिथियां शामिल) के बीच की अवधि में नियुक्त या पदोन्नत या वित्तीय उन्नयन सहित संशोधित सुनिश्चित कैरियर प्रगति योजना (एमएसीपीएस) के तहत उन्नयन प्राप्त करने वाले कर्मचारी के संबंध में वेतन वृद्धि 1 जनवरी को प्रदान की जाएगी और 2 जुलाई और 1 जनवरी (दोनों तिथियां शामिल) के बीच की अवधि में नियुक्त या पदोन्नत या वित्तीय उन्नयन सहित एमएसीपीएस के तहत उन्नयन प्राप्त करने वाले कर्मचारी के संबंध में वेतन वृद्धि 1 जुलाई को प्रदान की जाएगी।
शिक्षा विभाग के पत्र के अनुसार यदि किसी शिक्षक का मूल वेतन अपने से कनीय शिक्षक से कम निर्धारित हो तो उनका मूल वेतन कनीय शिक्षक के मूल वेतन के अनुरूप निर्धारित किया जायेगा l तो 2019-20 में बहाल शिक्षक जो जनवरी 2025 में विशिष्ट शिक्षक बने है उनका मूल वेतन (₹25750) नवंबर 2023 में बहाल विद्यालय अध्यापक के मूल वेतन(₹26520) से कम क्यों निर्धारित किया गया है ?
शिक्षा विभाग के पत्र के अनुसार यदि किसी शिक्षक का मूल वेतन अपने से कनीय शिक्षक से कम निर्धारित हो तो उनका मूल वेतन कनीय शिक्षक के मूल वेतन के अनुरूप निर्धारित किया जायेगा l तो 2019-20 में बहाल शिक्षक जो जनवरी 2025 में विशिष्ट शिक्षक बने है उनका मूल वेतन (₹25750) नवंबर 2023 में बहाल विद्यालय अध्यापक के मूल वेतन(₹26520) से कम क्यों निर्धारित किया गया है ? @BiharEducation_@sunilkbv@NitishKumar
25 से विद्यालयों में अवकाश कई शिक्षक अपना टिकट करा चुके हैं। ऐसे में उन्हें जबरदस्ती प्रशिक्षण में डालना गलत है। इसे बदला जाए
@BiharEducation_@NitishKumar