@NTA_Exams NTA का यह कहना कि "परीक्षार्थियों को परीक्षा शुल्क का पुनर्भरण किया जाएगा"
अत्यंत गैरजिम्मेदाराना/बच���ाना प्रलोभन है।
सर्वप्रथम तो इस परीक्षा आयोजन में जितना व्यय हुआ उसे NTA की सर्वोच्च जिम्मेदार टोली से वसूलना चाहिए।
@TheTribhuvan NTA का यह कहना कि "परीक्षार्थियों को परीक्षा शुल्क का पुनर्भरण किया जाएगा"
अत्यंत गैरजिम्मेदाराना/बचकाना प्रलोभन है।
सर्वप्रथम तो इस परीक्षा आयोजन में जितना व्यय हुआ उसे NTA की सर्वोच्�� जिम्मेदार टोली से वसूलना चाहिए।
@8PMnoCM SI 2021 कीपुनः विशेष परीक्षा ली जाए तथा नवीन परिणामस्वरूप जो भी वर्तमान चयनित SI पुनः मैरिट में आते है उन्हें समस्त प्रकार के लाभ देते हुए सेवा में निरंतर म��ना जाए तथा बची हुई सीटों पर मैरिट से चयन किया जाए जिससे उस वक्त वंचित रहे योग्य अभ्यर्थियों को भी मौका मिल सके।
@arvindchotia SI 2021 कीपुनः विशेष परीक्षा ली जाए तथा नवीन परिणामस्वरूप जो भी वर्तमान चयनित SI पुनः मैरिट में आते है उन्हें समस्त प्रकार के लाभ देते हुए सेवा में निरंतर माना जाए तथा बची हुई सीटों पर मैरिट से चयन किया जाए जिससे उस वक्त वंचित रहे योग्य अभ्यर्थियों को भी मौका मिल सके।
@TheTribhuvan लगभग 30 वर्ष प्रशासनिक/पुलिस अधिकारी रह कर सेवानिवृत्त होने के बाद पुनः राज्यसभा में स्थान देने की बजाय , सार्वजनिक जीवन के अनुभवी , जो भिन्न भिन्न कारणों से चुनावी दंगल में नही उतरे जा सकते , उन्हें मौका देना चाहिए- वह भी एक व्यक्ति को एक बार।
@TheTribhuvan कोई भी पार्टी हो , अच्छे लोगों के लिये जगह नही है। आप बेहतर जानते है कि राज्यसभा का टिकट केंद्रीय सम्पर्क, जातिगत समीकरण एवं धनबल जैसे घटकों से प्रभावित होता है।
@IgpUdaipur@UdaipurPolice@RajPoliceHelp
आज दि 16/8/2025 को उदयपुर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से असफल हो गई है।
पर्यटकों की गाड़ियों में बढ़ोतरी तो अपेक्षित थी परन्तु टैफिक पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी क्षेत्र में नही निकल रहे।
#Rajasthanpolice#Udaipurpolice
आज दि 16/8/2025 को उदयपुर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से असफल हो गई है।
पर्यटकों की गाड़ियों में बढ़ोतरी तो अपेक्षित थी परन्तु टैफिक पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी एवं सम्पूर्ण पुलिस महकमा अभी तक स्वागत सत्कार में ही लगा है। 🙂
15 नवम्बर 1948 को प्रो. के. टी. शाह ने जी संशोधन प्रस्तुत किया उसमें समाजवाद एवं सेक्यूलर दोनों थे।
पर इसे डा. भीमराव अम्बेडकर जी और संविधान निर्मात्री सदस्य के किसी भी सदस्य ने स्वीकार नहीं किया।
डा. अम्बेडकर आने वाली पीढ़ी को आर्थिक विचारधारा में नहीं बाँधना चाहते थे